छत्तीसगढ़ के इस गांव में 3 नवंबर को ही मना ली गई दिवाली, अनहोनी के डर से करीब 100 साल से निभाई जा रही अनोखी परंपरा

धमतरी- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एक गांव में दिवाली की रौनक देश के बाकी हिस्सों से पहले ही देखने को मिल गई। यहां ग्रामीणों ने 3 नवंबर को दीप जलाकर और मां लक्ष्मी की पूजा कर दीपावली का त्योहार मनाया। गांव के हर घर को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया। आंगन में रंगोली बनाई गई और पूजा के बाद बच्चों ने पटाखे फोड़कर खुशियां मनाईं। खास बात यह है कि यहां दिवाली देशभर में मनाए जाने वाले पर्व से करीब पांच दिन पहले मनाई जाती है।
धमतरी जिले के सेमरा-सी गांव में यह परंपरा करीब 100 साल पुरानी बताई जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके पीछे अनहोनी का डर जुड़ा हुआ है। इसी मान्यता के चलते गांव में हर साल निर्धारित परंपरा के अनुसार देश के अन्य हिस्सों से पहले दिवाली मनाई जाती है। समय के साथ गांव की कई पीढ़ियां इस परंपरा को निभाती आ रही हैं।
3 नवंबर को गांव में मनाई गई दिवाली
इस साल 3 नवंबर को सेमरा-सी गांव में दीपावली का उत्सव मनाया गया। सुबह से ही घरों में साफ-सफाई और सजावट की तैयारियां शुरू हो गई थीं। शाम होते ही घरों में दीप जलाए गए और रंग-बिरंगी रोशनी से पूरा गांव जगमगा उठा। महिलाओं ने आंगन में आकर्षक रंगोली बनाई और परिवार के लोगों ने मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद बच्चों ने पटाखे फोड़े और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। गांव में हर तरफ त्योहार का माहौल नजर आया।
करीब 100 साल से चली आ रही है परंपरा
सेमरा-सी गांव में दिवाली पहले मनाने की परंपरा नई नहीं है। ग्रामीण इसे करीब एक सदी पुरानी परंपरा बताते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा का आज भी गांव के लोग पालन करते हैं। यही वजह है कि देश के अन्य हिस्सों में दिवाली की तैयारियां होने से पहले ही यहां दीपोत्सव मनाया जाता है।
अनहोनी के डर से पहले मनाते हैं दीपावली
गांव में दिवाली पहले मनाने के पीछे एक पुरानी मान्यता और अनहोनी का डर जुड़ा हुआ है। इसी मान्यता के कारण ग्रामीण सामान्य तिथि से पहले लक्ष्मी पूजा करते हैं। हालांकि, इस परंपरा की शुरुआत से जुड़ी विस्तृत घटना या मान्यता का स्पष्ट विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है। सेमरा-सी गांव की यह परंपरा छत्तीसगढ़ की अनूठी सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को भी दर्शाती है, जहां वर्षों पुरानी परंपराएं आज भी लोगों के जीवन का हिस्सा बनी हुई हैं।
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