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बालको–वेदांता प्रबंधन की कथित मनमानी पर कब लगेगी लगाम? खसरा 543/1 पर शासन का पत्र, अब कार्रवाई का हिसाब दे प्रशासन

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ग्राम यात्रा की लगातार उठाई आवाज और संपादक अब्दुल सुल्तान की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने कलेक्टर को लिखा पत्र; जमीन के अधिकार, कथित फर्जी दस्तावेज और राखड़ डैम संबंधी आरोपों पर ठोस जांच की मांग

 

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कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क  औद्योगिक प्रतिष्ठान कितना भी बड़ा हो, जमीन पर उसके अधिकार और निर्माण की वैधता का जवाब दस्तावेजों से ही तय होगा। खसरा नंबर 543/1 से जुड़े भूमि विवाद और राखड़ डैम निर्माण संबंधी आरोपों ने बालको–वेदांता प्रबंधन की कार्यशैली के साथ जिला प्रशासन की जवाबदेही को भी सवालों के घेरे में ला दिया है। अब पूछा जाना चाहिए—भूमि के मूल रिकॉर्ड का परीक्षण हुआ या नहीं? मौके की जांच किसने की? और शिकायत पर शासन को क्या जवाब भेजा गया?

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस खसरे से जुड़े भूमि उपयोग, दस्तावेजों की कथित विसंगतियों और पर्यावरणीय प्रश्नों को पहले भी उठा चुका है। पूर्व प्रकाशित रिपोर्ट में बालको–वेदांता प्रबंधन से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब की मांग की गई थी।  अब सामने आए शासकीय पत्र ने कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की आवश्यकता और बढ़ा दी है।

शासन ने कलेक्टर को लिखा—नियमानुसार कार्रवाई कर अवगत कराएं

 

उपलब्ध पत्र की प्रति के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 12 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कोरबा को पत्र भेजा है। पत्र क्रमांक GENCOR-35/1312/2025-REVENUE में खसरा नंबर 543/1 में फर्जी दस्तावेज तैयार कर बड़े पैमाने पर भूमि घोटाला एवं अवैध कब्जा कर राखड़ डैम निर्माण संबंधी शिकायत का उल्लेख है।  अवर सचिव धनंजय नेताम के डिजिटल हस्ताक्षर वाले पत्र में मुख्य सचिव को संबोधित ग्राम यात्रा के संपादक अब्दुल सुल्तान की 11 अगस्त 2026 की शिकायत संलग्न करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर संबंधित पक्ष और विभाग को अवगत कराने के लिए कहा गया है।  यह शिकायत पर कार्रवाई के लिए भेजा गया पत्र है; आरोप सिद्ध होने की जांच रिपोर्ट नहीं। लेकिन इसे केवल पत्राचार तक सीमित छोड़ देना भी पर्याप्त नहीं होगा।

बालको–वेदांता प्रबंधन से सीधा सवाल—भूमि अधिकार का आधार क्या है?

 

खसरा 543/1 के संबंध में प्रबंधन अपनी स्थिति स्पष्ट करे।   संबंधित भूमि पर उसके अधिकार का आधार क्या है? किस क्षेत्रफल के लिए कौन-सा आवंटन, लीज अथवा अन्य वैध दस्तावेज उपलब्ध है? शिकायत में उल्लिखित राखड़ डैम निर्माण या भूमि उपयोग के लिए किन सक्षम प्राधिकारियों की अनुमतियां प्राप्त की गईं?  इन प्रश्नों का उत्तर संबंधित आदेशों, नक्शों और स्वीकृतियों से दिया जाना चाहिए। यदि प्रबंधन का पक्ष अभिलेखों से पुष्ट है तो वे अभिलेख सामने आएं। कोई विसंगति है तो उसकी जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।  हालांकि उपलब्ध शासकीय पत्र में बालको–वेदांता अथवा किसी अन्य पक्ष की दोषसिद्धि या जिम्मेदारी निर्धारित नहीं की गई है।

कलेक्टर कार्यालय बताए—कार्रवाई की फाइल कहां पहुंची?

शासन के पत्र के बाद जिला प्रशासन से स्पष्ट जानकारी अपेक्षित है कि प्रकरण किस अधिकारी को सौंपा गया, कौन-से मूल रिकॉर्ड मंगाए गए और क्या स्थल निरीक्षण कराया गया।  क्या शिकायतकर्ता के दस्तावेज लिए गए? क्या संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया? क्या पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का मिलान हुआ? क्या शासन को प्रतिवेदन भेजा गया?  कार्रवाई हुई है तो उसका विवरण सार्वजनिक कीजिए। लंबित है तो कारण और समयसीमा बताइए। उपलब्ध सामग्री में कार्रवाई रिपोर्ट नहीं है; इसलिए प्रशासन की वास्तविक प्रगति स्पष्ट होना आवश्यक है।

जमीन का रिकॉर्ड और मौके की स्थिति—दोनों का मिलान हो

फर्जी दस्तावेज और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोपों का परीक्षण मूल खसरा, बी-1, नक्शा, नामांतरण आदेश, आवंटन अथवा लीज तथा संबंधित अनुमति की फाइलों से होना चाहिए। रिकॉर्ड में परिवर्तन हुआ हो तो उसका आधार और स्वीकृति देने वाला अधिकारी स्पष्ट हो।  साथ ही सीमांकन और स्थल निरीक्षण से यह निर्धारित किया जाए कि वास्तविक उपयोग किस भूमि पर, कितने क्षेत्र में और किस अधिकार से हुआ। राखड़ डैम संबंधी आरोपों के परीक्षण में राजस्व रिकॉर्ड के साथ लागू पर्यावरणीय एवं तकनीकी स्वीकृतियों का भी मिलान आवश्यक है।  किसी अनियमितता की पुष्टि होती है तो जांच केवल लाभ पाने वाले पक्ष तक सीमित न रहे; संबंधित निर्णय लेने, अभिलेख तैयार करने और सत्यापन करने वालों की भूमिका भी तय हो।

ग्राम यात्रा की मांग—जांच का निष्कर्ष सामने आए

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की मांग है कि खसरा 543/1 से संबंधित मूल एवं डिजिटल अभिलेख सुरक्षित किए जाएं, संबंधित पक्षों का जवाब लिया जाए और स्वतंत्र परीक्षण के आधार पर कारणयुक्त निष्कर्ष सार्वजनिक किया जाए।  दस्तावेजी हेरफेर या अवैध कब्जा प्रमाणित हो तो विधिसम्मत कार्रवाई हो। आरोप गलत मिलें तो उन्हें खारिज करने का अभिलेखीय आधार बताया जाए।

बालको–वेदांता प्रबंधन पर उठे सवालों का जवाब स्पष्ट होना चाहिए। प्रशासन भी बताए—शासन के पत्र के बाद जांच में क्या निकला? जमीन किसकी है, उपयोग किस अधिकार से हुआ और जवाबदेही किसकी बनती है?

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