देश में महापुरुष कम पड़ गए थे क्या? कोरबा में प्रतिमा की पहचान पर सवाल—आयुक्त खोलें मंजूरी और खर्च की फाइल!

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग से सीधा सवाल—किसकी आकृति, किसका चयन, किसकी लिखित अनुमति? क्या सामान्य सभा के सामने रखा गया जनता के पैसे का हिसाब?
कोरबा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। फव्वारा लगा दिया, रोशनी सजा दी, प्रतिमा खड़ी कर दी—लेकिन जनता को उसका परिचय कौन देगा? सुभाष चौक निहारिका के पास स्थापित एक आकृति को लेकर उठे सवाल अब नगर निगम कोरबा की चयन प्रक्रिया, सार्वजनिक खर्च और जवाबदेही तक पहुंचते हैं। जनता के पैसे से शहर सजे और जनता ही पूछती रह जाए कि आखिर लगाया क्या गया है—यह कैसी प्रशासनिक समझदारी है?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की स्पष्ट मांग है: नगर निगम प्रतिमा की वास्तविक पहचान, स्थापना का उद्देश्य, लिखित स्वीकृतियां और पूरे सौंदर्यीकरण का खर्च सार्वजनिक करे। नागरिकों को अनुमान नहीं, दस्तावेज सहित जवाब चाहिए।
देश में महापुरुष और देशभक्त कम पड़ गए थे क्या?
भारत का इतिहास स्वतंत्रता सेनानियों, समाज सुधारकों और जननायकों से भरा है। छत्तीसगढ़ की अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, जनजातीय विरासत और संघर्ष की परंपरा है। ऐसे में सार्वजनिक स्थल के लिए इस आकृति का चयन किस विचार से हुआ?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क पूछता है—क्या देश में महापुरुष और देशभक्त कम पड़ गए थे, जो ऐसी प्रतिमा की जरूरत पड़ी जिसका परिचय तक नागरिकों के लिए प्रश्न बना हुआ है?
यह प्रश्न किसी श्रमिक के सम्मान को छोटा करने का नहीं है। यदि प्रतिमा किसी श्रमिक या पुराने नगर सेवा कर्मी का प्रतीक है, तो निगम उसकी पहचान और स्थानीय संदर्भ स्पष्ट करे। चयन का औचित्य बताने की जिम्मेदारी भी उसी प्रशासन की है जिसने उसे सार्वजनिक स्थल पर स्थापित कराया।
इंटरनेट पर ‘लैंपलाइटर’ का संदर्भ—कोरबा वाली की पुष्टि कौन करेगा?
उपलब्ध तस्वीरों में टोपी और लंबा कोट पहने, हाथ में लंबी छड़ लिए आकृति दिखाई देती है। तस्वीरों के दिखने वाले हिस्से में उसका नाम या परिचय नजर नहीं आता। पूरे परिसर में परिचय पट्टिका की स्थिति का मौके पर सत्यापन आवश्यक है। इंटरनेट पड़ताल में मैड्रिड नगर प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर “Farolero madrileño” नामक प्रतिमा का विवरण मिला। वह पुराने समय में सड़क की गैस बत्तियां जलाने और उनका रखरखाव करने वाले कर्मियों की स्मृति में बनी है। इसे मूर्तिकार Félix Hernando García ने 1999 में बनाया था। यह विवरण मैड्रिड की प्रतिमा का है; कोरबा की आकृति उसी की प्रतिकृति है, इसका प्रमाण नहीं मिला है।
इसलिए कोरबा की प्रतिमा को किसी अंग्रेज अधिकारी, विदेशी शासक या किसी निश्चित व्यक्ति की मूर्ति बताना अभी प्रमाणित नहीं है। इस उलझन को खत्म करने का रास्ता निगम का अधिकृत परिचय और खरीद के दस्तावेज हैं।
आयुक्त महोदय, जनता भुगतान करती है—जवाब भी जनता को दीजिए
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर निगम आयुक्त से निम्न प्रश्नों का दस्तावेज सहित उत्तर मांगता है:
1. यह प्रतिमा किसकी अथवा किस विषय की है? इसका आधिकारिक नाम, निर्माता, सामग्री और स्वीकृत डिजाइन क्या है?
2. इसका चयन किसने किया और क्यों? प्रस्ताव किस अधिकारी, जनप्रतिनिधि या एजेंसी ने तैयार किया?
3. किसकी लिखित अनुमति मिली? प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति के क्रमांक तथा तारीख क्या हैं?
4. कुल कितना खर्च हुआ? प्रतिमा, परिवहन, स्थापना, आधार, फव्वारे, टाइल्स और प्रकाश व्यवस्था की लागत अलग-अलग कितनी है?
5. ठेका या आपूर्ति आदेश किसे मिला? खरीद प्रक्रिया, अनुबंध, बिल और भुगतान का विवरण क्या है?
6. क्या विषय सामान्य सभा या मेयर-इन-काउंसिल में रखा गया? यदि हां, तो प्रस्ताव और निर्णय सार्वजनिक हों। यदि नहीं, तो निर्णय लेने वाले सक्षम प्राधिकारी और लागू नियम की जानकारी दी जाए।
7. रखरखाव पर कितना खर्च होगा? सफाई, मरम्मत, बिजली और फव्वारे के संचालन की जिम्मेदारी किसकी है?
शहर सजाने का अधिकार मिला है तो खर्च समझाने की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी होगी। सरकारी भुगतान का हिसाब कोई निजी रहस्य नहीं है।
सौंदर्यीकरण का औचित्य बताइए—सिर्फ चमक दिखाकर सवाल मत ढकिए
इस विशिष्ट कार्य की प्रमाणित लागत, कार्यादेश और भुगतान का विवरण इंटरनेट पड़ताल में नहीं मिला। इसलिए अभी किसी रकम को वास्तविक खर्च बताना या धन की बर्बादी सिद्ध घोषित करना उचित नहीं होगा। लेकिन यही स्थिति दस्तावेज सार्वजनिक करने की जरूरत और बढ़ाती है। खर्च उचित है तो उसका आधार सामने रखिए। चयन सोच-समझकर हुआ है तो उसका उद्देश्य बताइए। प्रक्रिया नियमानुसार हुई है तो स्वीकृति दिखाइए। जनता को फव्वारे की धार दिखाई दे रही है; अब उसे फैसले का आधार भी दिखाई देना चाहिए।
नगरीय प्रशासन विभाग और सरकार भी स्थिति स्पष्ट करें
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन विभाग और राज्य सरकार से सवाल है—इस परियोजना की स्वीकृति, खरीद प्रक्रिया और खर्च का परीक्षण हुआ है या नहीं? यदि हुआ है तो संबंधित अभिलेख और निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। यदि नहीं हुआ है, तो निगम से दस्तावेज मंगाकर उठे प्रश्नों का परीक्षण किया जाए। बिना जानकारी यह दावा नहीं किया जा सकता कि शासन को पहले से शिकायत मिली थी या उसने जानबूझकर अनदेखी की। लेकिन अब उठे सवालों पर स्पष्ट जवाब अपेक्षित है।
छत्तीसगढ़ महतारी के सम्मान पर ठोस प्रस्ताव लाइए
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की मांग है कि कोरबा के उपयुक्त प्रमुख स्थल पर छत्तीसगढ़ महतारी चौक और सम्मानपूर्ण प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव विधिवत विचार के लिए रखा जाए। नागरिक सुझाव, स्थल, डिजाइन, बजट और सक्षम स्वीकृति के साथ निर्णय सार्वजनिक हो।
साथ ही निगम शहर में पहले से स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमाओं और प्रस्तावित कार्यों की सूची जारी करे। पूरे शहर में ऐसी कोई प्रतिमा नहीं है—इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अपनी माटी के सम्मान की मांग को केवल भाषणों में जगह नहीं, नगर नियोजन के निर्णयों में स्थान चाहिए।
जनता का सीधा संदेश—पहचान बताओ, अनुमति दिखाओ, हिसाब दो!
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी और दस्तावेजी जवाब की मांग करता है। प्रतिमा किसकी है, चयन क्यों हुआ, स्वीकृति किसने दी और भुगतान कितना हुआ—इन प्रश्नों का उत्तर नगर निगम के रिकॉर्ड में होना चाहिए। आयुक्त महोदय, प्रतिमा खड़ी हो गई है—अब जवाबदेही को भी खड़ा कीजिए। फव्वारे से पानी बहाइए, जनता के सवालों को नहीं!
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
प्रतिमा की वास्तविक पहचान, लागत और स्वीकृतियों के प्रमाणित अभिलेख इस पड़ताल में प्राप्त नहीं हुए हैं। नगर निगम और नगरीय प्रशासन विभाग का प्रत्यक्ष पक्ष भी प्राप्त नहीं किया गया है। अधिकृत जवाब तथा दस्तावेज मिलने पर रिपोर्ट में शामिल किए जाएंगे।
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