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24 पुलिस क्वार्टर मिटे, जवाबदेही कब तय होगी? बालको के खिलाफ कार्रवाई की मांग अब प्रशासन की कसौटी

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ग्राम यात्रा की खबरों और शिकायत के बाद सात दिन में जांच रिपोर्ट के निर्देश; सवाल—दस्तावेजों से जिम्मेदारी तय होगी या मामला फिर पत्राचार में उलझेगा?

 

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कोरबा।   ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। पुलिस परिवारों के लिए सरकारी धन से बने 24 क्वार्टर तोड़ दिए जाने के मामले में अब प्रशासन की जवाबदेही भी सवालों के घेरे में है। लोक निर्माण विभाग के वर्ष 2023 के पत्र में बिना अनुमति आवासीय परिसर तोड़े जाने की बात दर्ज है। उसी पत्र में बालको प्रबंधन के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का अनुरोध भी किया गया था। अब वर्ष 2026 में शिकायत के परीक्षण और सात दिन में तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन के निर्देश सामने आए हैं।

 

सवाल सीधा है—जिस मामले में सरकारी विभाग ने आपराधिक कार्रवाई मांगी थी, उसमें अब ठोस निर्णय होगा या एक और पत्र पुराने पत्रों के साथ फाइल में रख दिया जाएगा?

 

क्वार्टर टूटने का दस्तावेज है, कार्रवाई का परिणाम कहां है?

 

 

कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग, कोरबा संभाग के 14 मार्च 2023 के पत्र के अनुसार, बालको थाना के पीछे निर्मित 24 आई-टाइप आवासों का परिसर बालको प्रबंधन ने पूर्णतः तोड़ दिया था। विभाग ने लिखा कि इसके लिए पीडब्ल्यूडी अथवा पुलिस प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई।

 

यह किसी अनाम आरोप का मामला नहीं है। कार्रवाई मांगने वाला पत्र स्वयं निर्माण कराने वाले सरकारी विभाग का है। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि पुलिस ने उस सूचना का क्या परीक्षण किया, किन अभिलेखों की जांच की और क्या निर्णय लिया।

 

सरकारी भवनों का अस्तित्व समाप्त हो गया; क्या उनकी जवाबदेही भी कागजों से गायब हो जाएगी?

बालको-वेदांता का बड़ा नाम—क्या जांच उतनी ही बेझिझक होगी?

 

इस मामले में प्रशासन की विश्वसनीयता की परीक्षा यही है कि बालको-वेदांता जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान से जुड़े आरोपों की जांच कितनी स्वतंत्रता और गंभीरता से होती है।

कंपनी का आकार, आर्थिक महत्व या प्रभाव जांच की दिशा तय नहीं कर सकते। निर्णय का आधार अनुमति, स्वामित्व, विभागीय अभिलेख, ध्वस्तीकरण के आदेश और संबंधित व्यक्तियों की प्रमाणित भूमिका होनी चाहिए।

क्या जांच निर्णय लेने वालों तक पहुंचेगी?

क्या प्रबंधन से मूल दस्तावेज मांगे जाएंगे?

क्या अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में जिम्मेदारी तय होगी?

 

उपलब्ध दस्तावेज प्रबंधन द्वारा मामला दबाने का प्रयास सिद्ध नहीं करते। लेकिन पुराने विभागीय पत्र पर कार्रवाई का परिणाम स्पष्ट नहीं होने से उठ रहे सवालों का उत्तर पारदर्शी जांच और दर्ज निर्णय से ही मिलेगा।

ग्राम यात्रा की शिकायत पहुंची शासन तक—अब रिपोर्ट का इंतजार

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क द्वारा विषय उठाए जाने और संपादक अब्दुल सुल्तान की 14 सितंबर 2026 की शिकायत के बाद मामला शासन से प्रमुख अभियंता कार्यालय तक पहुंचा है।

प्रमुख अभियंता कार्यालय के 9 अक्टूबर 2026 के पत्र में मुख्य अभियंता, बिलासपुर परिक्षेत्र को शिकायत का शीघ्र परीक्षण कर सात दिन के भीतर तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

अब संबंधित कार्यालयों को बताना चाहिए कि रिपोर्ट प्रस्तुत हुई या नहीं। यदि हुई है, तो उसके निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई क्या हैं?  जांच का आदेश शुरुआत है; जवाबदेही तय होना उसका परिणाम होना चाहिए।

एफआईआर होगी या नहीं—कारण सहित निर्णय सामने आए

 

पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2023 में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का अनुरोध किया था। शिकायत में भी एफआईआर और साक्ष्यों के संरक्षण की मांग की गई है। उपलब्ध दस्तावेजों से एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं होती।

ऐसे में पुलिस प्रशासन से अपेक्षा है कि शिकायत और अभिलेखों पर कानून के अनुसार स्पष्ट निर्णय ले। अपराध के आवश्यक तथ्य मिलने पर कार्रवाई आगे बढ़े; किसी अलग निष्कर्ष पर पहुंचने की स्थिति में उसके कारण अभिलेखों में दर्ज हों।  चुप्पी किसी गंभीर शिकायत का उत्तर नहीं हो सकती।

केवल ठेकेदार तक जांच सीमित क्यों रहे?

 

यदि आवास बिना अनुमति तोड़े गए, तो जांच का प्रश्न केवल यह नहीं है कि मशीन किसने चलाई। यह भी पता चलना चाहिए कि—

– ध्वस्तीकरण का आदेश किसने दिया?

– सरकारी भवनों की स्थिति और स्वामित्व का परीक्षण किसने किया?

– कार्यादेश तथा भुगतान किसने स्वीकृत किए?

– क्या भवन अनुपयोगी घोषित थे और विधिवत अनुमति उपलब्ध थी?

– मलबे और सरकारी सामग्री का हिसाब किसके पास है?

 

जिम्मेदारी पद देखकर नहीं, दस्तावेज देखकर तय हो—लेकिन जांच किसी पद या प्रभाव के सामने रुकनी भी नहीं चाहिए।

पुलिस परिवारों के आवासों का हिसाब कौन देगा?

 

ये आवास पुलिस विभाग के उपयोग के लिए सरकारी धन से बनाए गए थे। इसलिए मामला सार्वजनिक संपत्ति के साथ पुलिसकर्मियों की आवासीय सुविधा से भी जुड़ा है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज यह स्पष्ट नहीं करते कि ध्वस्तीकरण के समय कितने परिवार वहां रह रहे थे अथवा उन्हें क्या वैकल्पिक व्यवस्था दी गई।   इसीलिए निर्माण, आवंटन, कब्जा, भवन खाली कराने और हस्तांतरण के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। न्याय का अर्थ होगा—तथ्य सामने आना, नुकसान का मूल्यांकन और प्रमाणित जिम्मेदारी पर कार्रवाई।

 

बालको प्रबंधन का पक्ष और अंतिम जांच प्रतिवेदन अभी उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं हैं। संबंधित पक्षों का दस्तावेजी जवाब भी सामने आना चाहिए।

अब कसौटी किसी कंपनी के दावे या शिकायतकर्ता के शब्द नहीं—सरकारी रिकॉर्ड हैं। 24 क्वार्टरों का मामला फिर फाइलों में खोया, तो सवाल केवल बालको प्रबंधन से नहीं, कार्रवाई के लिए जिम्मेदार प्रशासन से भी पूछा जाएगा।

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