ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की मुहिम का असर: पौधा खरीदी पर शासन ने मांगी जांच, कलेक्टर कार्यालय ने आयुक्त से तलब किया प्रतिवेदन

अब निगम आयुक्त जवाब दें—बोली पूरी होने से पहले पौधे कैसे पहुंचे? पर्ची का ‘Umesh Sir’ कौन? अलग-अलग कामों में उमेश राठौर का नाम सामने आने पर पारदर्शिता का हिसाब कब मिलेगा?
कोरबा। नगर निगम कोरबा की पौधा खरीदी पर ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क द्वारा उठाए गए सवाल अब सरकारी पत्राचार में दर्ज हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने शिकायत के तथ्यों की जांच कर अभिमत सहित तत्काल प्रतिवेदन मांगा है। वहीं कलेक्टर कार्यालय ने निगम आयुक्त को जांच एवं निराकरण कर स्पष्ट अभिमत सहित सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। खबरों और शिकायत के जरिए उठाया गया मुद्दा अब निगम प्रशासन से लिखित जवाब मांग रहा है। सवाल पौधों की गिनती भर का नहीं—सरकारी खरीद में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और जनता के पैसे की जवाबदेही का है।
पहले पौधे, बाद में प्रक्रिया—तो प्रतिस्पर्धा का मतलब क्या?
प्रकरण नगर निगम की 3,290 पौधों की दो GeM बिड से जुड़ा है। शिकायत में बोली प्रक्रिया पूरी होने से पहले पौधों की खेप पहुंचाने और शहर में पहले से कराए गए पौधरोपण पर सवाल उठाए गए हैं। कलेक्टर कार्यालय के पत्र के विषय में ‘Umesh Sir’ के नाम 650 पौधों की खेप, वाहन क्रमांक CG04 RB 0409 और पं. जवाहरलाल नेहरू सभागार परिसर का स्पष्ट उल्लेख है। यही वह बिंदु है जहां निगम प्रशासन को तारीखवार जवाब देना होगा। यदि शिकायत के अनुसार बिड पूरी होने से पहले ही संबंधित आपूर्ति पहुंच गई थी, तो किसके निर्देश पर पहुंची? उसे परिसर में प्रवेश किसने दिया? आपूर्ति का आदेश किसने जारी किया और उसकी जिम्मेदारी किसने ली?
जब माल पहले पहुंचने का आरोप हो, तब बाद की निविदा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उसका जवाब विज्ञप्ति की भाषा से नहीं, खरीद के मूल रिकॉर्ड से मिलेगा।
ग्राम यात्रा की पहल सरकारी जांच की मांग तक पहुंची
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के 28 सितंबर 2026 के पत्र क्रमांक GENCOR-35/8388/2026-UAD/530923 में अब्दुल सुल्तान की 17 सितंबर 2026 की शिकायत का उल्लेख है। विभाग ने नोडल अधिकारी/सहायक संचालक आर.डी. मेहरा को तथ्यों की जांच कर अभिमत सहित प्रतिवेदन तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय, कोरबा के 5 अक्टूबर 2026 के पत्र में निगम आयुक्त को शिकायत के तथ्यों की जांच एवं निराकरण कर आवेदक को सूचित करने तथा स्पष्ट अभिमत सहित सात दिवस में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की मुहिम का ठोस परिणाम यही है—उठाए गए सवालों पर शासन ने जांच और जिला प्रशासन ने आयुक्त से प्रतिवेदन मांगा है। अब जनता को जांच का निष्कर्ष चाहिए।
हर जगह उमेश राठौर ही क्यों? आयुक्त रिकॉर्ड सामने रखें
ग्राम यात्रा की पूर्व खबरों में सभागार से जुड़े कार्यों, पौधा खरीदी और निविदा की शर्तों पर सवाल उठाए गए थे। अलग-अलग प्रकरणों में उमेश राठौर के नाम का उल्लेख सामने आने की पृष्ठभूमि में अब निगम प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पौधों की पर्ची पर लिखा ‘Umesh Sir’ किस व्यक्ति के लिए है? क्या उसका संबंध उमेश राठौर से है? यदि है, तो संबंधित खरीद और आपूर्ति में उनकी अधिकृत भूमिका क्या थी? किसी ठेकेदार को एक से अधिक काम मिलना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन बार-बार एक नाम सामने आए और साथ में बोली पूरी होने से पहले आपूर्ति का आरोप भी हो, तो पारदर्शिता की परीक्षा और जरूरी हो जाती है।
क्या सभी पात्र कारोबारियों को बराबर अवसर मिला? क्या शर्तों का आधार वास्तविक आवश्यकता थी? क्या किसी को पहले से आपूर्ति का भरोसा मिल चुका था? इन सवालों का उत्तर ही बताएगा कि प्रक्रिया निष्पक्ष थी या उसमें किसी को अनुचित लाभ मिला।
शहर में टेंडरों का खेला? शक का जवाब दस्तावेज देंगे
निगम की फाइलों में प्रतिस्पर्धा दिखाई देना पर्याप्त नहीं है; वास्तविक प्रक्रिया में भी समान अवसर दिखना चाहिए। आयुक्त संबंधित बिड की समयरेखा, तकनीकी मूल्यांकन, स्वीकृति, कार्यादेश और आपूर्ति की तारीखें सार्वजनिक करें। साथ में गेट रजिस्टर, उपलब्ध CCTV रिकॉर्ड, स्टॉक प्रविष्टि, GST बिल, ई-वे बिल और परिवहन भुगतान का मिलान कराएं। एक ही घटनाक्रम की अलग-अलग तारीखें पूरी तस्वीर खोल सकती हैं—बिड कब निकली, चयन कब हुआ, आदेश कब दिया गया और पौधे कब पहुंचे। यदि प्रक्रिया सही है, तो रिकॉर्ड उसे स्पष्ट करेंगे। यदि विसंगति है, तो जिम्मेदारी भी पद और हस्ताक्षर के आधार पर तय होनी चाहिए।
सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी—अब निष्कर्ष कहां है?
कलेक्टर कार्यालय के पत्र में सात दिवस के भीतर प्रतिवेदन मांगा गया है। उपलब्ध दस्तावेजों में निगम का जवाब या जांच प्रतिवेदन शामिल नहीं है। इसलिए आयुक्त स्पष्ट करें कि पत्र कब प्राप्त हुआ, जांच किस अधिकारी ने की और प्रतिवेदन कब भेजा गया। क्या 650 पौधों की खेप का सत्यापन हुआ? क्या ‘Umesh Sir’ की पहचान की गई? क्या खरीद और आपूर्ति की तारीखों का मिलान हुआ? क्या शिकायतकर्ता को निष्कर्ष बताया गया? जांच का अर्थ केवल संबंधित शाखा से जवाब लेकर फाइल आगे बढ़ाना नहीं हो सकता। जिन अभिलेखों पर सवाल हैं, उनकी स्वतंत्र पड़ताल और कारण सहित निष्कर्ष जरूरी हैं।
शिकायत की मांग और प्रशासन का निर्देश—दोनों स्पष्ट रहें
कलेक्टर कार्यालय के पत्र के विषय में बिड, अनुबंध प्रदान करने और भुगतान पर रोक, डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा प्रथमदृष्टया आपराधिकता मिलने पर EOW/ACB में प्रकरण दर्ज कराने जैसी शिकायत की मांगें दर्ज हैं। पत्र का वास्तविक निर्देश तथ्यों की जांच, निराकरण और प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है। उपलब्ध पत्रों से भुगतान रुकने, अपराध दर्ज होने या सांठगांठ सिद्ध होने की पुष्टि नहीं होती। अब जांच से तय होना है कि आरोपों में कितना तथ्य है और किसकी क्या जिम्मेदारी बनती है।
सवाल दबेंगे नहीं—अगली कड़ियों में दस्तावेजों की कसौटी
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क संबंधित निविदाओं, आपूर्ति और भुगतान के रिकॉर्ड की पड़ताल आगे बढ़ाएगा। अन्य मामलों में भी सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर अगली रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। आयुक्त महोदय, अब जवाब दीजिए—पौधे पहले कैसे पहुंचे, ‘Umesh Sir’ कौन हैं और जांच में क्या निकला? जनता की रकम से होने वाली खरीद का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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