तीवरता वाशरी का ‘काला हिसाब’ कब खुलेगा? रिजेक्ट कहां गया, पानी का क्या हुआ—सरकार निगरानी की फाइल खोले!

पर्यावरणीय शर्तों के पालन पर गंभीर सवाल, विस्तार रिपोर्ट में आंकड़ों का मेल नहीं; खेतों में कथित दूषित बहाव की स्वतंत्र जांच जरूरी—छत्तीसगढ़ शासन कंपनी और निगरानी तंत्र से प्रमाणित जवाब मांगे
बिलासपुर/बेलतरा। कोयले की धुलाई से कमाई हो रही है तो पानी, रिजेक्ट और प्रदूषण नियंत्रण का हिसाब भी सामने आना चाहिए। अनुमति की मुहर दिखाकर जवाबदेही से छुटकारा नहीं मिलता। लिम्हा स्थित तीवरता कोल वाशरी के मामले में अब सवाल कंपनी तक सीमित नहीं है—निगरानी करने वाले विभागों को भी बताना होगा कि उन्होंने क्या मापा, क्या जांचा और किस प्रमाण पर संतोष जताया।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की सार्वजनिक दस्तावेजों पर आधारित पड़ताल में संचालन, रिजेक्ट कोल, जल खपत और पर्यावरणीय निगरानी के ऐसे प्रश्न सामने आए हैं, जिनका समाधान स्वतंत्र जांच और मूल अभिलेखों से होना चाहिए। विश्वस्त सूत्र से खेतों में कथित दूषित पानी पहुंचने, ग्रामीण विरोध और संबंधित तंत्र को कथित रूप से ‘मैनेज’ किए जाने की सूचना मिली है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। अनुचित लेन-देन का प्रमाण प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन शिकायत का वैज्ञानिक परीक्षण किए बिना उसे दबाना भी जवाबदेही नहीं कहलाएगा।
रिजेक्ट का हिसाब खोलिए—माल किसका, बिक्री किस अधिकार से?
वाशरी में आया पूरा कोयला कंपनी की संपत्ति था या ग्राहकों का?
धुलाई के बाद बना रिजेक्ट किसका था?
उसके निपटान अथवा बिक्री का अधिकार किस समझौते से मिला?
जांच को ग्राहकवार कच्चे कोयले की आवक, धुले कोयले की वापसी, रिजेक्ट–स्लरी उत्पादन और स्टॉक से शुरुआत करनी चाहिए। इसके बाद बिक्री बिल, परिवहन अभिलेख, प्रेषण तौल और प्राप्तकर्ता की तौल का खेपवार मिलान हो। बिल पर नाम लिख देना पर्याप्त नहीं। जिस माल की बिक्री दिखाई गई, उसका स्वामित्व और अंतिम प्राप्ति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
विस्तार के प्रकाशित कार्यकारी सारांश में रिजेक्ट की अनुमानित GCV 1,950 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम है। कोयला नियंत्रक संगठन अपनी वेबसाइट पर 2,200 से कम GCV वाले वाशरी रिजेक्ट के निपटान की अनुमति और निगरानी में अपनी भूमिका बताता है। वास्तविक खेपों पर लागू अनुमति उनकी परीक्षण रिपोर्ट और संबंधित नियमों से जांचनी होगी। अभी किसी वास्तविक खरीदार, अवैध बिक्री या माल की हेराफेरी की पुष्टि नहीं हुई है। इसीलिए कंपनीवार अनुमति और खेपवार रिकॉर्ड खोलना जरूरी है।
रिपोर्ट में आंकड़ों का मेल क्यों नहीं?
विस्तार के कार्यकारी सारांश में कच्चे कोयले की राख एक स्थान पर 45 प्रतिशत, जबकि सामग्री-संतुलन तालिका में 40 प्रतिशत है। धुले कोयले के दिए घटकों का जोड़ 106 प्रतिशत और रिजेक्ट के घटकों का जोड़ 113 प्रतिशत बनता है। ये प्रथमदृष्टया दस्तावेजी विसंगतियां हैं। अलग परीक्षण आधार अथवा टंकण त्रुटि कारण हो सकते हैं। कंपनी और सलाहकार मूल लैब रिपोर्ट के साथ बताएं—सही आंकड़े कौन-से हैं? मूल्यांकन करने वाले विभाग ने इन अंतरों पर क्या स्पष्टीकरण लिया?
पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन का आधार बनने वाले आंकड़ों पर अस्पष्टता स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
पानी धरती से निकला—मीटर का हिसाब कहां है?
मार्च 2024 के संचालन सहमति दस्तावेज के उपलब्ध पाठ में अधिकतम जल खपत 350 घनमीटर, अर्थात 3.50 लाख लीटर प्रतिदिन, निर्धारित है। स्रोत भूजल बताया गया है। डिजिटल जलमीटर, बंद जल-चक्र और भूजल अनुमति की शर्तों का पालन अपेक्षित है।
कंपनी बताए—
बोरवेल कितने हैं?
कितनी निकासी अनुमत है?
दैनिक मीटर रीडिंग क्या है?
कितना पानी पुनर्चक्रित हुआ और कितना उत्पाद, स्लरी अथवा अन्य उपयोग में गया?
जमीन से निकले पानी का हिसाब उत्पादन के साथ मिलाइए। आंकड़े सही हैं तो प्रमाण सामने रखने में संकोच क्यों?
खेतों तक कथित काला पानी—जांच परिसर की दीवार पर खत्म न हो। नवंबर 2024 के पत्र में थिकनर, पर्याप्त क्षमता के सेडिमेंटेशन तालाब, बेल्ट अथवा फिल्टर प्रेस, घरेलू अपशिष्ट उपचार और रिसाव रोकने के लिए तालाबों की लाइनिंग की शर्तें हैं। भंडारण क्षेत्रों के आसपास नालियां तथा चेक डैम बनाने का प्रावधान भी है। कलेक्टर प्रभावित खेतों की पहचान कराएं। भंडारण क्षेत्र, नालियां, पुलिया, परिसर की निकासी और खेत तक बहाव का पूरा रास्ता दर्ज हो। पानी–मिट्टी के नमूने लिए जाएं और घटना की तारीख को बारिश तथा संचालन लॉग से मिलाया जाए।
कथित बहाव प्रक्रिया का अपशिष्ट था, कोयले के भंडारण से निकला वर्षाजल था या किसी दूसरे स्रोत का पानी—यह परीक्षण से तय होगा। तालाब की तस्वीर शिकायत का अंतिम उत्तर नहीं है। किसान की सूचना और कंपनी का दावा, दोनों प्रमाण की एक ही कसौटी पर परखे जाएं।
उपकरण मौजूद थे—क्या उत्पादन के दौरान चलते भी थे?
मार्च 2024 के दस्तावेज में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के लिए अलग बिजली मीटर, संचालन अवधि दर्ज करने की व्यवस्था और इंटरलॉकिंग निर्धारित है। उपकरण बंद होने पर कच्चा कोयला आपूर्ति प्रणाली रुकनी चाहिए। बिजली–रसायन खपत का मासिक रिकॉर्ड बोर्ड को देने की शर्त भी है। अब उपकरणों की सूची से आगे बढ़िए। वाशरी के संचालन घंटे और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के संचालन घंटे मिलाइए।
खराबी कब हुई?
उत्पादन कब रोका गया?
मासिक रिपोर्ट किस अधिकारी ने जांची?
कमी मिली तो कार्रवाई क्या हुई?
निगरानी का दावा इन रिकॉर्ड से साबित होगा। बैंक गारंटी और हरित पट्टी—शर्तों का पालन किसने सत्यापित किया?
उपलब्ध मार्च दस्तावेज में पक्की सड़क तथा 30 KLD क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट छह महीने में बनाने की शर्त है। पालन नहीं होने पर बैंक गारंटी जब्त की जा सकने का उल्लेख है। काम कब पूरा हुआ? किसने स्थल सत्यापन किया? बैंक गारंटी वापस हुई, बढ़ाई गई या कार्रवाई हुई? नवंबर पत्र में कम से कम 9.8 एकड़—कुल क्षेत्र का 49.17 प्रतिशत—हरित पट्टी के लिए निर्धारित है। बस्ती की ओर 37 मीटर, सड़क की ओर 25 मीटर और शेष सीमा पर 15 मीटर चौड़ाई दर्ज है। स्वीकृत नक्शा लेकर मौके पर माप हो। पौधारोपण का दावा पर्याप्त नहीं; निर्धारित क्षेत्र और चौड़ाई का पालन सामने आना चाहिए। वर्तमान अनुमति सामने रखिए—पुरानी फाइल से आज का उत्तर मत दीजिए
उपलब्ध नवंबर 2024 के पत्र में संचालन सहमति 28 फरवरी 2025 तक बढ़ाई गई थी। उसके बाद की वर्तमान सहमति इस पड़ताल में सत्यापित नहीं हुई है। इससे अवैध संचालन का निष्कर्ष नहीं निकलता, लेकिन आज की वैध अनुमति सार्वजनिक करने का प्रश्न अवश्य उठता है। वर्तमान CTO, विस्तार की अंतिम पर्यावरण स्वीकृति, भूजल अनुमति और रिजेक्ट संबंधी लागू अनुमतियां तारीख तथा शर्तों सहित सामने रखी जाएं।
छत्तीसगढ़ शासन तत्काल संज्ञान ले—निगरानी की भी जांच हो। जिला प्रशासन CECB, खनिज विभाग, संबंधित भूजल प्राधिकरण, राजस्व विभाग और कोयला नियंत्रक संगठन के समन्वय से स्वतंत्र संयुक्त जांच कराए।
जलमीटर, उत्पादन, स्टॉक, तौल, परिवहन, परीक्षण और निरीक्षण रिकॉर्ड सुरक्षित हों। प्रभावित खेतों, जलस्रोतों और बस्ती में वैज्ञानिक परीक्षण हो। प्रदूषणकारी बहाव मिले तो तत्काल रोका जाए। उल्लंघन स्थापित हो तो कंपनी पर कार्रवाई हो। शिकायत अथवा दर्ज कमी के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई हो तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी परखी जाए। तीवरता प्रबंधन रिजेक्ट और पानी का हिसाब दे। पर्यावरण विभाग निरीक्षण का प्रमाण रखे। खनिज विभाग आवक–जावक और स्टॉक का मिलान दिखाए। प्रशासन जांच का परिणाम सार्वजनिक करे। कोयले की धुलाई के साथ जवाबदेही भी धुलकर गायब नहीं हो सकती। जनता को आश्वासन नहीं—प्रमाणित जवाब चाहिए।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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