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छत्तीसगढ़ में युवाओं के हाथ में काम, लेकिन पक्की नौकरी नहीं! रिपोर्ट ने खोली रोजगार की पोल

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रायपुर –  छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए रोजगार हासिल करना ही नहीं, बल्कि स्थायी नौकरी और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। यूथपावर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 81.8 लाख युवाओं का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि काम कर रहे युवाओं में करीब 80 प्रतिशत नियमित वेतन वाली नौकरी में नहीं हैं। वहीं, 87.8 प्रतिशत युवा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है।

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में रोजगार के अवसरों के साथ-साथ नौकरी की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की जरूरत है। बड़ी संख्या में युवा स्वरोजगार, कृषि और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। इनमें से कई युवाओं की आमदनी काम की उपलब्धता पर निर्भर करती है, जिससे हर महीने एक जैसी आय सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है।

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छत्तीसगढ़ में 61.4% युवा श्रमबल का हिस्सा, बेरोजगारी दर 6.1%

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 61.4 प्रतिशत युवा श्रमबल में शामिल हैं। इस समूह में नौकरी कर रहे युवाओं के साथ काम की तलाश करने वाले युवा भी आते हैं। इस आयु वर्ग में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत दर्ज की गई है।

इसके अलावा, करीब 15.7 प्रतिशत युवा ऐसे हैं, जो न पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े हैं। यह स्थिति युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने के लिए प्रभावी प्रयासों की जरूरत को दर्शाती है।

स्वरोजगार और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं युवा

रोजगार में लगे युवाओं में लगभग 61.7 प्रतिशत स्वरोजगार से जुड़े हैं। इनमें छोटे व्यवसाय और पारिवारिक कामकाज करने वाले युवा भी शामिल हैं। वहीं, 19.4 प्रतिशत युवा आकस्मिक या दिहाड़ी आधारित काम करते हैं। नियमित वेतन वाली नौकरियों में युवाओं की हिस्सेदारी करीब 18.9 प्रतिशत बताई गई है, जबकि रिपोर्ट के कुछ हिस्सों में यह आंकड़ा 20.2 प्रतिशत के आसपास है।

स्वरोजगार करने वाले युवाओं की आय कारोबार की स्थिति पर निर्भर करती है, जबकि दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलने के आधार पर कमाई होती है। ऐसे में रोजगार होने के बावजूद नियमित आमदनी और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा हर युवा के लिए सुनिश्चित नहीं है।

कृषि क्षेत्र में काम कर रहे हैं आधे से ज्यादा युवा

छत्तीसगढ़ में युवाओं के रोजगार का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। रिपोर्ट के अनुसार, रोजगार में लगे करीब 52 प्रतिशत युवा कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं। इसके अलावा, लगभग 14 प्रतिशत युवा निर्माण क्षेत्र, 12 प्रतिशत व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र, 10 प्रतिशत सेवा क्षेत्र और सात प्रतिशत विनिर्माण क्षेत्र में काम करते हैं।

रिपोर्ट में प्रदेश के पंजीकृत कारखानों में लगभग तीन लाख लोगों को रोजगार मिलने और करीब 13.8 लाख अनौपचारिक उद्यमों का भी उल्लेख है। ये आंकड़े प्रदेश की अर्थव्यवस्था में छोटे कारोबारों और असंगठित क्षेत्र की भूमिका को सामने लाते हैं। नियमित वेतन वाली नौकरियों के अवसर बढ़ाना युवाओं के लिए अहम चुनौती बनी हुई है।

युवाओं की औसत मासिक कमाई कितनी?

रिपोर्ट में अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले युवाओं की औसत मासिक कमाई में अंतर बताया गया है।

नियमित वेतन वाली नौकरी: 6,651 रुपये

कृषि क्षेत्र: 5,671 रुपये

निर्माण क्षेत्र: 5,301 रुपये

विनिर्माण क्षेत्र: 5,773 रुपये

व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र: 7,339 रुपये

ये आंकड़े संबंधित क्षेत्रों में युवाओं की औसत कमाई दर्शाते हैं। इन्हें सभी कर्मचारियों का वेतन या न्यूनतम मजदूरी नहीं माना जाना चाहिए। कम औसत आय और काम की अनिश्चितता युवाओं के लिए आर्थिक स्थिरता हासिल करना मुश्किल बना सकती है।

87.8% युवा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 87.8 प्रतिशत युवा श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, करीब 88 प्रतिशत वेतनभोगी युवा श्रमिकों के पास लिखित रोजगार अनुबंध नहीं है। लिखित अनुबंध नहीं होने से वेतन, काम के घंटे और नौकरी की शर्तों को लेकर विवाद की स्थिति में श्रमिकों को परेशानी हो सकती है। सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। इन सुविधाओं का अभाव युवाओं के लिए बीमारी, नौकरी छूटने या भविष्य की जरूरतों के समय आर्थिक जोखिम बढ़ा सकता है।

व्यावसायिक प्रशिक्षण में भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 49.9 प्रतिशत युवाओं ने किसी न किसी तरह का व्यावसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण लिया है। हालांकि, औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की हिस्सेदारी केवल 1.8 प्रतिशत बताई गई है।

रोजगार की स्थिति में सुधार के लिए युवाओं को बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने, छोटे कारोबारों को प्रोत्साहित करने और नियमित वेतन वाली नौकरियों के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना जरूरी है। रिपोर्ट के आंकड़े संकेत देते हैं कि रोजगार की संख्या के साथ उसकी स्थिरता, आय और सामाजिक सुरक्षा भी छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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