कोल लेवी का हिसाब अधूरा क्यों? वसूली के पीछे कारोबार और लाभार्थियों की भी जांच की मांग

ग्राम यात्रा की खबरों में उठे सवालों को दीपक दुबे की शिकायत में भी जगह; बिलासपुर पुलिस ने शिकायत की जांच के लिए कथन दर्ज कराने भेजा नोटिस
कोरबा/बिलासपुर। कोयले के कारोबार में कथित अवैध वसूली का सवाल केवल रकम लेने वाले हाथों तक सीमित नहीं है। पैसा कहां से आया, किस दबाव में दिया गया, किसे अनुचित लाभ मिला और किसकी भूमिका ने तंत्र को चलने दिया—इन सवालों की पड़ताल भी जरूरी है। भारतीय जनाधिकार पार्टी के संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे ने अपनी शिकायत और पूरक बयान में इसी व्यापक जांच की मांग उठाई है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क अपनी पूर्व खबरों में कोयला परिवहन, कथित ‘गब्बर टैक्स’, रोड सेल, लोडिंग व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाता रहा है। दुबे की शिकायत में भी भुगतानकर्ताओं, कारोबारी लाभार्थियों और संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग सामने आई है। इससे उन मुद्दों की प्रासंगिकता बढ़ती है जिन्हें ग्राम यात्रा लगातार जनता के सामने रखता आया है।
पुलिस का नोटिस: शिकायत की जांच का दस्तावेजी संकेत
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, कार्यालय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शहर बिलासपुर ने 16 फरवरी 2026 को दीपक दुबे को नोटिस जारी किया था। इसमें ऑनलाइन आवेदन क्रमांक 2026012407176744 के संबंध में शिकायत की जांच इस कार्यालय द्वारा किए जाने का उल्लेख है। दुबे को 17 फरवरी 2026 को कार्यालयीन समय में उपस्थित होकर कथन दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। यह नोटिस शिकायत पर जांच किए जाने की पुष्टि करता है। हालांकि, इससे शिकायत के सभी आरोप प्रमाणित होने अथवा किसी व्यक्ति या संस्था के दोषी पाए जाने का निष्कर्ष नहीं निकलता।
दुबे ने अपने प्रस्तुत जवाब में राज्य से बाहर होने के कारण व्यक्तिगत उपस्थिति में असमर्थता बताते हुए विस्तृत बयान ई-मेल से भेजने की बात कही है। उन्होंने इसे अभिलेख में लेने तथा आवश्यकता होने पर वीडियो कॉन्फ्रेंस या अगली उपयुक्त तारीख पर बयान देने की पेशकश की है।
“केवल वसूलीकर्ता नहीं, लाभार्थियों की भूमिका भी परखें”
26 दिसंबर 2025 की शिकायत और 17 फरवरी 2026 के पूरक बयान में दुबे ने वर्ष 2020–2022 के कथित कोल लेवी तंत्र की जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने ACB/EOW के अपराध क्रमांक 03/2024 और ED के ECIR/RPZO/09/2022 का संदर्भ देते हुए कोल वाशरी संचालकों, कोयला व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, DO होल्डरों और औद्योगिक इकाइयों के भुगतान तथा संभावित लाभ की पड़ताल मांगी है।
उनका आरोप है कि भुगतान करने वाले पक्षों और वास्तविक कारोबारी लाभार्थियों की भूमिका की पर्याप्त जांच नहीं हुई। यह शिकायतकर्ता का आरोप है; उपलब्ध सामग्री से सभी भुगतानकर्ताओं की अभियोजन स्थिति या पूरी जांच का निष्कर्ष स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होता।
मूल सवाल स्पष्ट है—किसने कितना भुगतान किया, किसे किया, किन परिस्थितियों में किया और उसके बदले क्या मिला?
मजबूरी में भुगतान और मिलीभगत का फर्क जांच से खुले
इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर की पड़ताल आवश्यक है। जबरन वसूली के दबाव में रकम देने वाला व्यक्ति और अनुचित व्यावसायिक लाभ पाने के लिए मिलीभगत से भुगतान करने वाला व्यक्ति एक जैसी स्थिति में नहीं होते। इसलिए केवल भुगतान होने के आधार पर हर कारोबारी को अपराधी घोषित करना उचित नहीं होगा। लेकिन जहां अनुचित लाभ, साजिश या सक्रिय सहभागिता का साक्ष्य मिले, वहां संबंधित पक्ष की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। दुबे की मांग का परीक्षण इसी आधार पर किया जाना जरूरी है।
कोयले का रिकॉर्ड खोलेगा भुगतान और लाभ का रिश्ता
शिकायत में ग्रेड और GCV में कथित हेरफेर, सैंपलिंग प्रभावित करने, वेब्रिज गड़बड़ी, अतिरिक्त डिस्पैच, ओवरलोडिंग संरक्षण तथा राजस्व नुकसान जैसे आरोप भी उठाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि तकनीकी और वित्तीय अभिलेखों की जांच से ही हो सकती है।
DO और डिस्पैच रिकॉर्ड, परिवहन अनुमतियां, सैंपलिंग रिपोर्ट, वेब्रिज का मूल डेटा, रेलवे रैक विवरण, स्टॉक रजिस्टर और वित्तीय लेन-देन का मिलान यह स्पष्ट कर सकता है कि कथित भुगतान और किसी अनुचित लाभ के बीच संबंध था या नहीं।
दुबे ने संबंधित SECL और रेलवे अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच, वित्तीय एवं तकनीकी ऑडिट तथा साक्ष्य मिलने पर विधिसम्मत कार्रवाई और पूरक आरोपपत्र की मांग भी की है।
ग्राम यात्रा के सवाल कायम: जवाब रिकॉर्ड से चाहिए
ग्राम यात्रा की पूर्व रिपोर्टों ने कथित अवैध वसूली और जवाबदेही के जिन सवालों को उठाया, यह शिकायत उन्हीं व्यापक चिंताओं को दस्तावेजी मांग के रूप में सामने रखती है। हालांकि, उपलब्ध नोटिस में ग्राम यात्रा की खबरों का उल्लेख नहीं है; इसलिए इसे सीधे खबरों के कारण हुई कार्रवाई बताना अभी उचित नहीं होगा।
अब अपेक्षा है कि जांच शिकायत के प्रत्येक प्रासंगिक बिंदु को परखे। जहां आरोप गलत हों, वहां स्थिति स्पष्ट हो; जहां साक्ष्य मिलें, वहां पद और कारोबारी प्रभाव से ऊपर उठकर कार्रवाई हो। कोयला जनता की संपदा है। उसके कारोबार में कथित अवैध वसूली का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए—रकम लेने वालों का भी, दबाव डालने वालों का भी और अनुचित लाभ पाने वालों का भी। जवाब अनुमान से नहीं, दस्तावेज और निष्पक्ष जांच से निकलेगा।
यह रिपोर्ट उपलब्ध शिकायत, पूरक बयान और पुलिस नोटिस पर आधारित है। संबंधित जांच एजेंसियों तथा आरोपों से जुड़े पक्षों का जवाब प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा। फरवरी 2026 के बाद की जांच प्रगति इन दस्तावेजों से स्पष्ट नहीं है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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