अधिवक्ता नरेंद्र मेहेर के माध्यम से हाईकोर्ट पहुँचा कांस्टेबल नियुक्ति विवाद; मतीन सिद्दीकी और जैनब मुस्तफा वनक ने रखीं दलीलें

नरेंद्र पाल बर्मन की उम्मीदवारी पर 60 दिनों में तर्कपूर्ण निर्णय का निर्देश; सक्षम प्राधिकारी के सामने दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर
बिलासपुर/जांजगीर-चांपा। पुलिस कांस्टेबल भर्ती में नियुक्ति नहीं मिलने से परेशान धनगांव निवासी नरेंद्र पाल बर्मन ने अधिवक्ता नरेंद्र मेहेर के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पैरवी करते हुए नियुक्ति संबंधी मामले पर विधिसम्मत निर्णय की मांग रखी। याचिकाकर्ता की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय द्वारा 1 जनवरी 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के तहत बर्मन ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के लिए अनुसूचित जाति श्रेणी से आवेदन किया था। शारीरिक मापदंड और लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उनका नाम प्रतीक्षा सूची में प्रथम स्थान पर आया तथा उन्हें मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया। बर्मन का कहना था कि उन्होंने अनुप्रमाणन पत्र में अपने विरुद्ध आपराधिक प्रकरण लंबित होने की जानकारी दी थी। इसके बावजूद उन्हें मौखिक रूप से नियुक्ति देने से इनकार किया जा रहा था।
वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने रखा उम्मीदवार का पक्ष
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि लंबित मुकदमे को दोषसिद्धि के समान नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि उम्मीदवार द्वारा आपराधिक प्रकरण की जानकारी दिए जाने के बाद उसकी उम्मीदवारी का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और लागू कानून के आधार पर किया जाना चाहिए। पैरवी के दौरान सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ सहित संबंधित न्यायिक निर्णयों का हवाला भी दिया गया।
रिकॉर्ड की जांच के बाद होगा नियुक्ति पर निर्णय
न्यायमूर्ति बी. डी. गुरु की पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी उम्मीदवारी के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज सक्षम प्राधिकारी अथवा समिति के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया। नियुक्ति संबंधी दावे पर सभी प्रासंगिक तथ्यों और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच के बाद कानून के अनुसार स्पष्ट, कारणयुक्त आदेश पारित किया जाना है। अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होने से 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना है। यह निर्देश सीधे नियुक्ति देने का आदेश नहीं है; नियुक्ति के लिए उपयुक्तता का निर्णय सक्षम प्राधिकारी करेगा। अधिवक्ताओं की पैरवी के बाद बर्मन के नियुक्ति संबंधी दावे पर दस्तावेजों के आधार पर विचार और निर्धारित समय में लिखित निर्णय का रास्ता स्पष्ट हुआ है।
Live Cricket Info


