खदान सरकारी, हुक्म किसका? ‘एलाओ’ की आड़ में कथित ‘गब्बर टैक्स’—हर टन पर किसकी नजर?

संतोष सिन्हा और कथित बाबू ‘सूत्रधार’ की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो—SECL मुख्यालय बताए, अधिकृत शुल्क कितना और कथित वसूली किसके लिए?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
संपादक – अब्दुल सुल्तान
कोरबा। कोयला देश का है। खदान सार्वजनिक संपत्ति है। फिर उसके उठाव के रास्ते में कथित ‘गब्बर टैक्स’ का हिसाब कौन खोल रहा है? खरीदार को कोयला उठाना है या किसी अनौपचारिक दरबार की चौखट पर चढ़ावा चढ़ाना है?
ग्राम यात्रा द्वारा उठाए गए कथित अवैध वसूली प्रकरण में अब संतोष सिन्हा और एक बाबू को कथित ‘सूत्रधार’ बताए जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। आरोप है कि ‘एलाओ’ के नाम पर रकम जुटाने में इस माध्यम का इस्तेमाल होता है। इसकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड, भुगतानकर्ताओं के बयान और रकम के वास्तविक प्राप्तकर्ता की पहचान से ही होगी।
सवाल सीधा है: पैसा किसने मांगा, किस अधिकार से मांगा और किसकी जेब तक पहुंचा?
‘एलाओ’ का आदेश कहां है—या सिर्फ रकम मांगने का बहाना?
SECL स्पष्ट करे कि ‘एलाओ’ के नाम पर कौन-सा अधिकृत शुल्क निर्धारित है। उसका आदेश कहां है?
दर क्या है?
भुगतान किस खाते में होता है और रसीद कौन देता है?
यदि शुल्क अधिकृत है तो दस्तावेज सामने रखिए। यदि अधिकृत नहीं है तो उसके नाम पर कथित मांग की जांच कीजिए। सरकारी व्यवस्था की प्रतिष्ठा किसी मौखिक सफाई से नहीं बचती। वह साफ रिकॉर्ड और निष्पक्ष कार्रवाई से बचती है। खदान के प्रवेश से लेकर लोडिंग और निकासी तक हर प्रक्रिया दर्ज होती है; इसलिए कथित भुगतान की कहानी भी जांच के दायरे से बाहर नहीं रहनी चाहिए।
कांटा कोयला तौलता है—कथित ‘चढ़ावे’ का वजन कौन बताएगा?
इस प्रकरण का सबसे कड़वा व्यंग्य यही है: ट्रक में एक टन का अंतर हिसाब मांगता है, तो बिना रसीद मांगी गई कथित रकम का हिसाब क्यों नहीं मांगा जाएगा?
यदि किसी खरीदार या परिवहनकर्ता से काम आगे बढ़ाने के बदले रकम मांगी गई है, तो उसकी तारीख, DO नंबर, वाहन, लोडिंग समय और संबंधित कर्मचारी का विवरण दर्ज कर जांच हो। किसे प्राथमिकता मिली, किसका काम रुका और क्या उसका किसी भुगतान से संबंध था—इसका उत्तर अनुमान से नहीं, रिकॉर्ड के मिलान से निकलेगा। संतोष सिन्हा की कथित भूमिका पर स्पष्ट जवाब लिया जाए। कथित बाबू ‘सूत्रधार’ की पहचान और जिम्मेदारी सत्यापित की जाए। किसी एक व्यक्ति पर जांच रोकने के बजाय रकम मांगने से प्राप्त करने तक पूरी शृंखला खंगाली जाए।
SECL मुख्यालय—जवाब की जगह चुप्पी कब तक?
SECL मुख्यालय और क्षेत्रीय प्रबंधन बताएं कि इन आरोपों पर शिकायत प्राप्त हुई है या नहीं। शिकायत मिली है तो जांच किसे सौंपी गई, कौन-से रिकॉर्ड सुरक्षित किए गए और निष्कर्ष कब सार्वजनिक होगा?
DO रिकॉर्ड, कांटा–गेट लॉग, उपलब्ध CCTV और संबंधित भुगतान विवरण सुरक्षित रखे जाएं। शिकायतकर्ताओं को निर्भय होकर बयान देने का अवसर मिले। निष्पक्ष जांच संबंधित कर्मचारियों के लिए भी जरूरी है। आरोप गलत हैं तो प्रमाण के साथ स्थिति स्पष्ट हो; सही हैं तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई हो।
खदान सरकारी है—उसके दरवाजे पर कथित निजी वसूली की चौकी स्वीकार नहीं हो सकती। हर टन का हिसाब चाहिए, हर कथित भुगतान का जवाब चाहिए। ‘गब्बर टैक्स’ के आरोपों पर अब कागज बोलें और जांच निष्कर्ष दे। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। इस रिपोर्ट में किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। संबंधित पक्षों का जवाब प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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