नगर निगम कोरबा में विकास या दस्तावेजों का अंधेरा?

भावपत्र, सालाना मरम्मत और गार्डन निर्माण पर उठे सवाल, जांच की मांग तेज
कोरबा। नगर निगम कोरबा में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों, भावपत्र (कोटेशन) आधारित खर्चों, सालाना मरम्मत कार्यों और गार्डन निर्माण एवं रखरखाव को लेकर पारदर्शिता तथा जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल किसी प्रकार की अनियमितता सिद्ध नहीं हुई है, लेकिन दस्तावेजों और वास्तविक कार्यों के बीच सामंजस्य की जांच की मांग लगातार सामने आ रही है।
मामले का केंद्र बिंदु केवल खर्च नहीं, बल्कि यह है कि क्या जनता के धन से कराए गए कार्यों का पूरा रिकॉर्ड, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान विवरण, कार्यादेश और भौतिक सत्यापन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है या नहीं।
सवाल केवल खर्च का नहीं, जवाबदेही का है
नगर निगमों के लिए वित्तीय रिकॉर्ड, लेखा-जोखा और सार्वजनिक सूचना के प्रकटीकरण का प्रावधान कानून में मौजूद है। छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम में खातों के रखरखाव, ऑडिट, रिकॉर्ड संरक्षण और सार्वजनिक सूचना प्रकटीकरण का उल्लेख किया गया है।
ऐसे में नागरिकों का सवाल है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं तो संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराने में कोई बाधा क्यों होनी चाहिए?
भावपत्र प्रणाली पर उठ रहे प्रश्न
नगर निगम में कई कार्य भावपत्र (कोटेशन) प्रक्रिया के माध्यम से कराए जाते हैं। जांच की मांग करने वाले पक्षों का कहना है कि निम्न प्रश्नों के उत्तर सार्वजनिक होने चाहिए—
कितने भावपत्र आमंत्रित किए गए?
कितनी एजेंसियों ने भाग लिया?
चयन का आधार क्या था?
स्वीकृत राशि और भुगतान राशि में कितना अंतर है?
कार्यस्थल पर वास्तविक स्थिति क्या है?
इन प्रश्नों के उत्तर दस्तावेजों के परीक्षण से ही सामने आ सकते हैं। सालाना मरम्मत: हर साल खर्च, लेकिन कितना असर? सालाना मरम्मत कार्यों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मांग की जा रही है कि पिछले वर्षों में हुए मरम्मत कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और यह देखा जाए कि जिन कार्यों के लिए भुगतान हुआ, वे वास्तव में मौके पर दिखाई देते हैं या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक निर्माण या मरम्मत कार्य की वास्तविकता का सबसे मजबूत आधार माप पुस्तिका (Measurement Book) और स्थल निरीक्षण होता है। निर्माण कार्यों के भुगतान और मात्रा सत्यापन में एमबी को महत्वपूर्ण रिकॉर्ड माना जाता है।
निगम कार्यालय के सामने गार्डन भी जांच के दायरे में नगर निगम परिसर के सामने स्थित गार्डन को लेकर भी कई प्रश्न सामने आ रहे हैं।
जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल किए जाने की मांग है—
निर्माण लागत कितनी थी?
रखरखाव पर प्रतिवर्ष कितना खर्च हुआ?
कार्य किस एजेंसी को दिया गया?
तकनीकी स्वीकृति और पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं या नहीं?
मौके पर कार्य की गुणवत्ता स्वीकृत मानकों के अनुरूप है या नहीं?
कानून क्या कहता है?
छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम में खातों, ऑडिट और सार्वजनिक सूचना के प्रकटीकरण का प्रावधान है। कानून के अनुसार निगमों को अपने रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना तथा आवश्यक सूचनाओं का सार्वजनिक प्रकटीकरण सुनिश्चित करना होता है। साथ ही ऑडिट प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और आवश्यकता पड़ने पर भौतिक सत्यापन भी किया जा सकता है।
जांच के प्रमुख बिंदु
🔹 भावपत्र प्रक्रिया की पारदर्शिता
🔹 स्वीकृत राशि और वास्तविक कार्य का मिलान
🔹 वर्क ऑर्डर और एमबी की जांच
🔹 बिल-वाउचर और भुगतान रिकॉर्ड का परीक्षण
🔹 भौतिक सत्यापन
🔹 सालाना मरम्मत कार्यों की उपयोगिता
🔹 गुणवत्ता मानकों का परीक्षण
🔹 दोहराए गए कार्यों और भुगतान की समीक्षा
सबसे बड़ा प्रश्न
नगर निगम कोरबा में उठ रहे सवालों का उत्तर आरोपों से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और तथ्यों से मिलेगा। यदि सभी कार्य नियमों के अनुरूप हुए हैं तो जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा और जनता का विश्वास मजबूत होगा। वहीं यदि किसी स्तर पर प्रक्रियागत या वित्तीय त्रुटियां सामने आती हैं, तो जिम्मेदारी तय करना भी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है।
जनता जानना चाहती है—
क्या नगर निगम एक्ट की भावना के अनुरूप पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है?
क्या विकास कार्यों का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाएगा?
क्या दस्तावेज और जमीनी हकीकत एक-दूसरे से मेल खाते हैं?
और आखिर जवाबदेही किसकी है?
नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उठ रहे प्रश्नों, उपलब्ध कानूनी प्रावधानों और जांच की मांग पर आधारित है। किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था के विरुद्ध किसी प्रकार का दोष सिद्ध होने का दावा नहीं किया जा रहा है। वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।*
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