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वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी की धारदार पैरवी—अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के Dean डॉ. अविनाश मेश्राम के तबादले पर हाईकोर्ट की रोक

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Dean को निचले पद पर भेजने और कनिष्ठ अधिकारी को प्रभार सौंपने पर उठा गंभीर सवाल; हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब

 

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बिलासपुर/अंबिकापुर | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर के अधिष्ठाता (Dean) डॉ. अविनाश मेश्राम को Dean पद से हटाकर दुर्ग मेडिकल कॉलेज में Professor-cum-Director के कथित रूप से निचले पद पर भेजने का शासन का आदेश फिलहाल हाईकोर्ट की कसौटी पर टिक नहीं सका। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2026 के स्थानांतरण आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने न्यायालय के समक्ष शासन के निर्णय की विसंगतियों को मजबूती से रखा। उन्होंने दलील दी कि एक नियमित Dean को उसकी पदस्थिति से नीचे Professor-cum-Director बनाकर भेजना सामान्य प्रशासनिक स्थानांतरण नहीं माना जा सकता। यह निर्णय अधिकारी की वरिष्ठता, पद-प्रतिष्ठा और सेवा-अधिकारों पर सीधा प्रभाव डालता है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ में हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के साथ अधिवक्ता अपूर्वा पांडे ने याचिकाकर्ता का पक्ष रखा।

पदोन्नति Dean की, तबादला निचले पद पर क्यों?

डॉ. अविनाश मेश्राम पहले शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय कोरबा में Professor-cum-Director के पद पर कार्यरत थे। राज्य शासन के 2 नवंबर 2022 के आदेश से उन्हें Dean के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद 17 अक्टूबर 2024 को उनकी पदस्थापना शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में Dean के रूप में की गई।  लेकिन 3 सितंबर 2026 को शासन ने उन्हें अंबिकापुर से हटाकर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दुर्ग में फिर Professor-cum-Director के पद पर भेज दिया। सवाल यही उठा कि जब अधिकारी का मूल और पदोन्नत पद Dean है, तब उसे निचले पद पर पदस्थ करने का प्रशासनिक और कानूनी आधार क्या है?

दो वर्ष भी पूरे नहीं—फिर इतनी जल्दबाजी क्यों?

वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने न्यायालय को बताया कि डॉ. मेश्राम को अक्टूबर 2024 में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में पदस्थ किया गया था। उनके कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने से पहले ही स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया गया।

याचिका में इसे लागू स्थानांतरण नीति के विपरीत बताते हुए प्रश्न उठाया गया कि ऐसी कौन-सी प्रशासनिक आवश्यकता उत्पन्न हुई, जिसके कारण नियमित Dean को कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाना जरूरी हो गया?

वरिष्ठ को हटाकर कनिष्ठ को प्रभार देने पर भी घिरा आदेश

मामले का दूसरा गंभीर पहलू यह है कि डॉ. मेश्राम के स्थान पर संबंधित प्रतिवादी अधिकारी को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के Dean का प्रभार दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि उक्त अधिकारी डॉ. मेश्राम से काफी कनिष्ठ हैं और कथित रूप से Dean पद धारण करने के लिए आवश्यक कैडर में भी नहीं हैं।

अदालत के सामने यह गंभीर प्रश्न रखा गया कि यदि वरिष्ठ एवं नियमित Dean उपलब्ध हैं, तो उन्हें निचले पद पर भेजकर एक कनिष्ठ अधिकारी को Dean का प्रभार क्यों सौंपा गया?

वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी की दलील पर मिला अंतरिम संरक्षण

वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने पद की वरिष्ठता, कैडर व्यवस्था, दो वर्ष से कम कार्यकाल और स्थानांतरण नीति के उल्लंघन से जुड़े तथ्यों को न्यायालय के समक्ष रखा।

इन दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने विशेष रूप से दर्ज किया कि डॉ. मेश्राम को Dean के पद से Government Medical College, Durg में Professor-cum-Director के पद पर भेजा गया है, जो Dean से निचला पद है।

न्यायालय ने अंतरिम आदेश में कहा कि:

> 3 सितंबर 2026 के विवादित स्थानांतरण आदेश का प्रभाव एवं क्रियान्वयन, जहां तक वह डॉ. अविनाश मेश्राम की पदस्थापना से संबंधित है, अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा।

 

शासन को देना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने प्रतिवादी क्रमांक 1 से 3 की ओर से नोटिस स्वीकार कर जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। प्रतिवादी क्रमांक 4 को प्रक्रिया शुल्क जमा होने पर नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है।

अब शासन को न्यायालय के समक्ष स्पष्ट करना होगा कि:

नियमित Dean को निचले पद पर भेजने का आधार क्या था?

दो वर्ष पूरे होने से पहले स्थानांतरण क्यों किया गया?

वरिष्ठ अधिकारी के रहते कनिष्ठ अधिकारी को Dean का प्रभार क्यों दिया गया?

क्या विवादित आदेश लागू स्थानांतरण नीति और कैडर नियमों के अनुरूप था?

मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी। फिलहाल यह अंतरिम आदेश है और प्रकरण के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय आना शेष है।

प्रकरण एक नजर में

प्रकरण: WPS No. 6675 of 2026
पक्षकार: Dr. Avinash Meshram versus State of Chhattisgarh
आदेश: 10 सितंबर 2026
पीठ: न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु
याचिकाकर्ता की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी एवं अधिवक्ता अपूर्वा पांडे
अगली सुनवाई: 12 अक्टूबर 2026

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