24 पुलिस क्वार्टर मिट्टी में, तीन साल से FIR फाइलों में—क्या BALCO के दरवाजे पर आकर ठिठक गया कानून?

PWD ने वर्ष 2023 में पुलिस को लिखा था—बिना अनुमति सरकारी कॉलोनी कथित रूप से नष्ट; अब SP को जनहित अभ्यावेदन सौंपकर BALCO, तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका पर FIR की मांग
FIR नहीं हुई तो पहले सक्षम मजिस्ट्रेट, फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की शरण में जाएगा मामला—शिकायतकर्ता ने दी संवैधानिक लड़ाई की चेतावनी
₹13.90 लाख की 1991 वाली लागत नहीं, आज की पुनर्निर्माण कीमत से तय हो सरकारी नुकसान; कूलिंग टावर परियोजना से कथित संबंध की GIS और सैटेलाइट तस्वीरों से जांच कराने की मांग
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क बालको थाना परिसर के पीछे पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के लिए सरकारी धन से बनाए गए 24 आई-टाइप फैमिली क्वार्टर कथित रूप से बिना वैधानिक अनुमति पूरी तरह ध्वस्त कर दिए गए। लोक निर्माण विभाग ने पुलिस से आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के लिए वर्ष 2023 में ही लिख दिया—लेकिन अब तक FIR अथवा जांच का कोई सार्वजनिक परिणाम सामने नहीं आया!
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कानून की तलवार केवल कमजोरों के लिए है और प्रभावशाली कॉरपोरेट के दरवाजे पर पहुंचते ही उसकी धार कुंद हो जाती है?
इस गंभीर मामले में पत्रकार एवं भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव अब्दुल सुल्तान ने पुलिस अधीक्षक को विस्तृत जनहित शिकायत-सह-अभ्यावेदन सौंपकर तत्काल FIR, मूल अभिलेखों की सुरक्षा, सरकारी नुकसान का वर्तमान मूल्यांकन तथा BALCO कंपनी के घटना-समय के जिम्मेदार अधिकारियों और ध्वस्तीकरण ठेकेदार की भूमिका की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अभ्यावेदन की प्रतियां बालको नगर थाना प्रभारी, बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक, कोरबा कलेक्टर, गृह विभाग एवं लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव और छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई हैं।
सरकारी पत्र ही खोल रहा कथित विध्वंस का राज
शिकायत का आधार कोई हवा-हवाई आरोप, राजनीतिक बयान अथवा निजी अनुमान नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता का आधिकारिक पत्र क्रमांक 1841/शिल्प/2023 दिनांक 14 मार्च 2023 है। पत्र का विषय ही कथित तौर पर यह दर्ज करता है कि BALCO प्रबंधन द्वारा पुलिस विभाग के लिए निर्मित 24 फैमिली क्वार्टर नष्ट किए गए। उपलब्ध दस्तावेज पर पुलिस कार्यालय की 17 मार्च 2023 की प्राप्ति प्रविष्टि दिखाई देने का भी दावा है।
शिकायत में प्रस्तुत PWD रिकॉर्ड के अनुसार—
– वर्ष 1991–92 में पुलिसकर्मियों के लिए 24 आई-टाइप क्वार्टर बनाए गए थे।
– इनमें 12 आवास भूतल और 12 प्रथम तल पर थे।
– कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 831.60 वर्गमीटर था।
– इनके निर्माण पर उस समय ₹13,90,354 का सरकारी व्यय दर्ज था।
– PWD ने लिखा कि आवासीय परिसर पूरी तरह तोड़ दिया गया।
– कथित ध्वस्तीकरण से पहले PWD अथवा पुलिस प्रशासन की अनुमति नहीं ली गई।
– विभाग ने आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की आवश्यकता बताई।
यदि ये तथ्य पुलिस जांच में प्रमाणित होते हैं, तो यह किसी जर्जर दीवार को हटाने का मामूली मामला नहीं रहेगा। सवाल उठेगा कि सरकारी खजाने से बनी पुलिस कॉलोनी को किस आदेश से, किस परियोजना के लिए और किस अधिकारी की स्वीकृति पर मिटाया गया?
तीन साल से दबा पत्र—फाइल सोई या किसी ने सुला दी?
PWD का पत्र मार्च 2023 में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचने का दावा किया गया है। इसके बाद सवालों का विस्फोट होना स्वाभाविक है—
– पत्र मिलने के बाद उसे किस अधिकारी को सौंपा गया?
– क्या घटनास्थल का निरीक्षण और पंचनामा हुआ?
– क्या BALCO प्रबंधन को कोई नोटिस दिया गया?
– क्या PWD, पुलिस और राजस्व विभाग से अभिलेख मांगे गए?
– क्या किसी अधिकारी ने FIR दर्ज नहीं करने का लिखित निर्णय लिया?
– यदि मामला बंद किया गया तो उसका वैधानिक आधार क्या था?
– क्या पत्र किसी फाइल में दबा रहा या जानबूझकर दबाया गया?
– PWD को कार्रवाई की जानकारी क्यों नहीं दी गई?
– क्या किसी औद्योगिक, प्रशासनिक अथवा राजनीतिक प्रभाव ने पुलिस के हाथ बांध दिए?
सरकारी भवन जमीन पर गिर गया, लेकिन कानून की फाइल मेज से क्यों नहीं उठी—जनता इसका उत्तर चाहती है।
पांच वर्ष तक की सजा वाला कानून—फिर FIR से परहेज क्यों?
शिकायत में Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 लागू करने की मांग की गई है। इस कानून के अंतर्गत सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर अधिकतम पांच वर्ष तक कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने Lalita Kumari v. Government of Uttar Pradesh में स्पष्ट सिद्धांत निर्धारित किया है कि सूचना से संज्ञेय अपराध प्रकट होने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है। प्रारंभिक जांच को अनिश्चितकाल तक शिकायत लटकाने की ढाल नहीं बनाया जा सकता।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(3) के अंतर्गत तीन वर्ष या अधिक, किंतु सात वर्ष से कम दंड वाले कुछ अपराधों में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति से सीमित प्रारंभिक जांच की जा सकती है, लेकिन इसे 14 दिनों के भीतर पूरा करना होता है।
अब पुलिस को साफ बताना होगा—FIR होगी, समयबद्ध प्रारंभिक जांच होगी या शिकायत को फिर उसी अंधेरी सुरंग में भेज दिया जाएगा, जहां वर्ष 2023 का PWD पत्र कथित रूप से खो गया?
CEO का पद नहीं, आदेश और सक्रिय भूमिका के प्रमाण तय करेंगे आरोपी शिकायत में वर्तमान अथवा तत्कालीन CEO को केवल पदनाम के आधार पर आरोपी बनाने की मांग नहीं की गई है। मांग यह है कि घटना के समय पदस्थ—
– CEO अथवा यूनिट प्रमुख,
– परियोजना प्रमुख,
– इंजीनियरिंग एवं सिविल अधिकारी,
– भूमि एवं एस्टेट विभाग,
– प्रशासन एवं कॉरपोरेट अफेयर्स विभाग,
– सुरक्षा विभाग,
– ध्वस्तीकरण ठेकेदार,
– कार्यादेश और भुगतान स्वीकृत करने वाले अधिकारियों की वास्तविक भूमिका जांची जाए।
कानून का स्थापित सिद्धांत है कि किसी कंपनी के शीर्ष अधिकारी पर व्यक्तिगत आपराधिक दायित्व केवल उसके पदनाम के आधार पर नहीं थोपा जा सकता। उसके आदेश, सहमति, जानकारी, सक्रिय भूमिका अथवा आपराधिक आशय का ठोस आधार सामने आना आवश्यक है। इसीलिए जांच को मशीन चालक अथवा छोटे ठेकेदार तक सीमित रखकर “बलि का बकरा” तैयार करने के बजाय निर्णय लेने, आदेश देने और भुगतान स्वीकृत करने वाली पूरी कमांड-चेन तक पहुंचना होगा।
क्या औद्योगिक परियोजना के लिए साफ की गई पुलिस कॉलोनी की जमीन?
स्थानीय स्तर पर आरोप सामने आया है कि पुलिस क्वार्टरों और आसपास के शांतिनगर क्षेत्र को BALCO की औद्योगिक परियोजना अथवा कूलिंग टावर के लिए हटाया गया। शिकायतकर्ता ने स्वयं इस आरोप को अंतिम सत्य नहीं, बल्कि जांच योग्य सूचना बताया है।
इसीलिए मांग की गई है कि—
– पुराने राजस्व नक्शे,
– क्वार्टरों का मूल साइट-प्लान,
– BALCO परियोजना का स्वीकृत लेआउट,
– पर्यावरणीय स्वीकृतियां,
– भूमि हस्तांतरण और ध्वस्तीकरण आदेश,
– शांतिनगर का बेदखली एवं पुनर्वास रिकॉर्ड,
– पुराने और वर्तमान सैटेलाइट चित्र का GIS ओवरले तैयार कराया जाए।
यदि नक्शे यह बताते हैं कि सरकारी पुलिस आवास वाली भूमि का बाद में औद्योगिक अथवा व्यावसायिक उपयोग हुआ, तो जांच को यह भी निर्धारित करना होगा कि उससे किसे लाभ मिला और किस सरकारी अधिकारी ने अपनी आंखें बंद रखीं। नुकसान ₹13.90 लाख नहीं—आज की पुनर्निर्माण लागत से बनेगा हिसाब वर्ष 1991–92 में दर्ज ₹13.90 लाख को आज की कुल सरकारी क्षति मान लेना वास्तविक नुकसान को कागज पर बौना बनाने जैसा होगा।
स्वतंत्र मूल्यांकन में—
– 24 आवासों की वर्तमान पुनर्निर्माण लागत,
– भूमि का वर्तमान मूल्य,
– पुलिसकर्मियों को सरकारी आवास सुविधा की हानि,
– वैकल्पिक आवास पर हुआ खर्च,
– मलबे एवं सरकारी निर्माण सामग्री का मूल्य,
– कथित औद्योगिक अथवा व्यावसायिक लाभ,
– अन्य प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष सरकारी नुकसान शामिल किया जाना चाहिए।
यदि जांच में 24 सरकारी आवासों का अनधिकृत ध्वस्तीकरण प्रमाणित होता है, तो केवल FIR पर्याप्त नहीं होगी। दोषियों से एक-एक रुपये की वसूली और पुलिस आवासों के पुनर्निर्माण की जवाबदेही भी तय करनी होगी। FIR नहीं हुई तो सक्षम मजिस्ट्रेट और हाईकोर्ट की शरण में जाएगा मामला
शिकायतकर्ता अब्दुल सुल्तान ने स्पष्ट किया है कि यदि जनहित अभ्यावेदन पर निर्धारित समय के भीतर निष्पक्ष और विधिसम्मत कार्रवाई नहीं हुई, FIR दर्ज नहीं की गई अथवा शिकायत को बिना कारण फाइलों में दबाया गया, तो वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत पहले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपलब्ध वैधानिक उपचार अपनाएंगे।
इसके बाद भी सरकारी अभिलेखों एवं साक्ष्यों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हुई तो माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की शरण ली जाएगी।
अब्दुल सुल्तान ने कहा—
«“यह किसी निजी विवाद का मामला नहीं, बल्कि सरकारी धन से पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए बनाए गए 24 आवासों को कथित रूप से नष्ट किए जाने का गंभीर प्रश्न है। यदि कानून प्रभावशाली कॉरपोरेट के सामने मौन रहा, तो जनता की ओर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। सरकारी संपत्ति और कानून—दोनों को फाइलों के मलबे में दफन नहीं होने दिया जाएगा।”»
जनता पूछ रही है—कॉरपोरेट बड़ा या संविधान?
इस मामले ने छत्तीसगढ़ सरकार और कोरबा पुलिस के सामने परीक्षा की घड़ी खड़ी कर दी है।
क्या PWD के आधिकारिक पत्र को संज्ञेय अपराध की सूचना माना जाएगा?
क्या घटना-समय के जिम्मेदार BALCO अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या वर्ष 2023 से कार्रवाई रोकने अथवा फाइल दबाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
क्या मूल फाइलें, नोटशीट, कार्यादेश, गेट एंट्री, भुगतान रिकॉर्ड और परियोजना नक्शे सुरक्षित किए जाएंगे?
क्या वर्तमान नुकसान का स्वतंत्र तकनीकी मूल्यांकन कराया जाएगा?
या एक बार फिर सरकारी संपत्ति का मलबा जनता की आंखों में झोंककर फाइल पर केवल “जांच जारी है” लिख दिया जाएगा?
24 पुलिस क्वार्टर जमीन से गायब बताए जा रहे हैं। अब कानून भी गायब रहेगा या FIR के रूप में दिखाई देगा—पूरे छत्तीसगढ़ की निगाह पुलिस अधीक्षक और राज्य सरकार के अगले कदम पर है।
BALCO प्रबंधन को पक्ष रखने का अवसर
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का स्पष्ट मत है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच के साथ BALCO प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष तथा वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। यदि ध्वस्तीकरण की सक्षम अनुमति, भूमि हस्तांतरण आदेश, विभागीय सहमति अथवा किसी न्यायालय का आदेश उपलब्ध है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। यदि ऐसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो कानून को बिना भय, दबाव और पक्षपात के अपना काम करना चाहिए।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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