बालको प्रोजेक्ट गेट के सामने बदहाल सड़क ने फिर बहाया खून!

वेदांता प्रबंधन की कथित हठधर्मिता का खामियाजा भुगत रही जनता—आखिर कितने हादसों के बाद जागेंगे जिम्मेदार?
भारी वाहनों का दबाव, जर्जर सड़क और लगातार दुर्घटनाएं; प्रशासन से तत्काल मरम्मत एवं सुरक्षा व्यवस्था की मांग
बालकोनगर/कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क बालको प्रोजेक्ट गेट के सामने बदहाल सड़क ने एक बार फिर हादसे को जन्म दे दिया। दुर्घटना में कई लोगों के घायल होने की सूचना है। यह घटना केवल सड़क दुर्घटना मानकर भुला देने वाली नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही और जनसुरक्षा की अनदेखी का गंभीर परिणाम है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस सड़क पर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही होती है, लेकिन इसकी मरम्मत और सुरक्षित यातायात व्यवस्था को लेकर न तो प्रभावी कदम उठाए गए और न ही लोगों की शिकायतों को अपेक्षित गंभीरता से लिया गया। नतीजा यह है कि आम नागरिक जान जोखिम में डालकर यहां से गुजरने को मजबूर हैं।
उद्योग का बोझ जनता उठाए और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभाए?
सवाल सीधा है—बालको-वेदांता के औद्योगिक संचालन से जुड़ी भारी आवाजाही का दबाव जब इस मार्ग पर पड़ता है, तो सड़क को सुरक्षित बनाए रखने की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी से प्रबंधन स्वयं को कैसे अलग कर सकता है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की बदहाली को लेकर लगातार आवाज उठाई गई, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी नहीं टूटी। यदि शिकायतों के बाद भी सड़क नहीं सुधारी गई, तो इसे सामान्य प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि जनसुरक्षा के प्रति गंभीर उदासीनता माना जाएगा।
हादसे के बाद मरहम या हादसे से पहले इंतजाम?
हर दुर्घटना के बाद जांच, आश्वासन और मरम्मत की बात होती है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर जस की तस दिखाई देती है। आखिर प्रशासन और प्रबंधन किसी बड़ी जनहानि की प्रतीक्षा क्यों कर रहे हैं?
इस मामले में तत्काल ये कदम उठाए जाने चाहिए—
– दुर्घटना और उसके कारणों की निष्पक्ष जांच हो।
– घायलों को समुचित उपचार एवं नियमानुसार सहायता दी जाए।
– प्रोजेक्ट गेट के सामने सड़क की तत्काल गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाए।
– पर्याप्त प्रकाश, संकेतक, गति अवरोधक और यातायात सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
– भारी वाहनों के संचालन एवं सड़क पर पड़ने वाले दबाव का तकनीकी परीक्षण हो।
– सड़क की देखरेख के लिए जिम्मेदार विभाग और संस्था सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाएं।
अब आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए
प्रशासन और बालको-वेदांता प्रबंधन को समझना होगा कि सड़क पर चलने वाले नागरिक किसी उद्योग की सुविधा के सामने गौण नहीं हैं। उद्योग चले, उत्पादन बढ़े और मुनाफा हो—लेकिन उसकी कीमत आम जनता अपने खून और जीवन से नहीं चुकाएगी। यह हादसा आखिरी चेतावनी माना जाना चाहिए। सड़क तत्काल दुरुस्त नहीं हुई और फिर कोई दुर्घटना हुई, तो जिम्मेदारी केवल खराब सड़क की नहीं होगी—उन अधिकारियों और संस्थाओं की भी होगी, जिन्होंने खतरा सामने होने के बावजूद आंखें मूंदे रखीं। बालको प्रोजेक्ट गेट की सड़क कब सुधरेगी? जिम्मेदार जवाब दें—क्योंकि अब और बहाने स्वीकार नहीं!
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