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पहाड़ खोदा… बॉक्साइट निकाला… अब बताइए जंगल और जमीन को वापस क्या मिला?

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Bodai-Daldali में धूल, ब्लास्टिंग, भूमि पुनर्स्थापन और वृक्षारोपण पर पुराने सवाल—2019 की Groundtruthing Study ने दर्ज किए गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव

 

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कंपनी की वेबसाइट पर Environment Clearance और Compliance Reports मौजूद—अब सवाल: कागजों के दावों और जमीन की वास्तविक स्थिति में कितना मेल?

 

विशेष खोजी रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क कबीरधाम/कोरबा। बोदई-दलदली की कहानी अब केवल विस्थापित आदिवासी परिवारों के पुनर्वास की नहीं रही। मामला अब उस पहाड़, जंगल, हवा और जमीन का भी है, जहां वर्षों से बॉक्साइट खनन हुआ।  2019 में Janabhivyakti, Centre for Policy Research–Namati Environmental Justice Program और Oxfam India द्वारा की गई groundtruthing study ने Bodai-Daldali में प्रभावित समुदायों के अनुभवों की तुलना सरकारी दस्तावेजों से की। अध्ययन में चार प्रमुख समस्याएं दर्ज की गईं—खुले ट्रकों, ब्लास्टिंग और ड्रिलिंग से धूल प्रदूषण; भूमि पुनर्स्थापन और reclaimed land पर afforestation की खराब स्थिति; खनन श्रमिकों की स्वास्थ्य-सुरक्षा संबंधी अनुपालन की कमी; तथा पुनर्वास प्रक्रिया का अधूरा और अपर्याप्त होना।

यानी अब सवाल केवल इतना नहीं है कि

किसे मुआवजा मिला?

सवाल यह भी है— जहां से लाखों टन बॉक्साइट निकला, उस पहाड़ का पर्यावरणीय हिसाब कहां है?

33.566 हेक्टेयर वनभूमि का मामला भी रिकॉर्ड पर। केंद्रीय Forest Clearance portal पर BALCO द्वारा दाखिल प्रस्ताव में Bodai-Daldali mining lease का कुल क्षेत्र 626.117 हेक्टेयर बताया गया है। इसमें 33.566 हेक्टेयर Revenue Forest/Van Nistar land के लिए Forest Conservation Act के तहत अनुमति मांगी गई थी, जबकि 592.551 हेक्टेयर हिस्सा non-forest land के रूप में दर्ज था। इसी आवेदन में अनुमानित वार्षिक बॉक्साइट निकासी 1.25 million tonnes बताई गई थी।

अब यहां पहला बड़ा प्रश्न खड़ा होता है—

खनन क्षेत्र का नक्शा साफ है… तो Reclamation का नक्शा भी सार्वजनिक हो!

कितना क्षेत्र वास्तव में खोदा गया?

कितना क्षेत्र backfill किया गया?

कितनी जमीन को मूल या उपयोग योग्य स्थिति में लौटाया गया?

कितने हेक्टेयर में वृक्षारोपण हुआ?

और लगाए गए पौधों में आज कितने जीवित हैं?

ये सवाल किसी नारे से नहीं, DGPS map, satellite imagery और वन विभाग के संयुक्त भौतिक सत्यापन से साफ हो सकते हैं।   Groundtruthing Study का गंभीर दावा—Reclamation और Afforestation की स्थिति खराब। 2019 के अध्ययन का दूसरा बड़ा observation यही था कि reclaimed land की land reclamation और afforestation की स्थिति खराब पाई गई। यह अध्ययन केवल शोधकर्ताओं की डेस्क रिपोर्ट नहीं था; इसमें प्रभावित समुदायों के साथ group discussions भी किए गए थे और उन अनुभवों की तुलना आधिकारिक अभिलेखों से की गई थी।

इसलिए सवाल सीधा है—

जिस जमीन से बॉक्साइट निकाल लिया गया, क्या वह जमीन वैज्ञानिक तरीके से वापस भरी गई?

क्या top soil दोबारा बिछाई गई?

क्या वहां स्थानीय प्रजातियों का पौधरोपण हुआ?

क्या reclaimed land फिर खेती, जंगल या किसी उपयोग योग्य रूप में लौटी?

अगर हां—तो उसकी वर्षवार तस्वीरें और survival report सार्वजनिक कीजिए।

 

धूल कहां से आई? रिपोर्ट ने तीन कारण गिनाए 2019 की groundtruthing study ने धूल प्रदूषण को uncovered trucks, blasting और drilling से जोड़ा।

यह बेहद महत्वपूर्ण है।

क्योंकि खनन क्षेत्र में धूल केवल दृश्य असुविधा नहीं होती। इसका प्रश्न आसपास की आबादी, वनस्पति, खेत, रास्तों और श्रमिकों की exposure से भी जुड़ता है।

इसलिए ग्राम यात्रा पूछता है—। बॉक्साइट ढोने वाले वाहनों की covering का रिकॉर्ड कहां है?

Haul roads पर water sprinkling कितनी बार होती है?

Ambient air quality monitoring stations कहां स्थापित हैं?

PM10 और PM2.5 के साल-दर-साल आंकड़े क्या हैं?

निकटवर्ती गांवों के लिए अलग monitoring हुई या नहीं?

ब्लास्टिंग—कितनी, कब और किस निगरानी में?

रिपोर्ट में blasting और drilling को धूल के स्रोतों में शामिल किया गया है।  खनन में controlled blasting सामान्य तकनीकी प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन उसके साथ ground vibration, fly-rock, noise और nearby habitation की सुरक्षा का सवाल जुड़ा रहता है।

अब जरूरी है कि रिकॉर्ड सामने आए

Blast register क्या कहता है?

प्रति माह कितनी blasting हुई?

Vibration monitoring हुई?

किस agency ने की?

निकटतम आबादी से blast zone की दूरी कितनी है?

और यदि पिछले वर्षों में ग्रामीणों से शिकायतें आईं—

तो उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?

BALCO खुद सार्वजनिक करता है Compliance Reports। BALCO की आधिकारिक वेबसाइट पर Bodai-Daldali/Kawardha के लिए अलग से Environment Clearance, Six Monthly Compliance Report, Environment Statement, hazardous waste authorisation और अन्य environmental compliance दस्तावेज प्रकाशित किए गए हैं।  यानी रिकॉर्ड मौजूद हैं।  और यही इस पड़ताल को और महत्वपूर्ण बनाता है।

अब सवाल यह होना चाहिए—

Compliance Report कहती क्या है… और जमीन दिखाई क्या देती है?

यह मुकाबला कंपनी बनाम आंदोलनकारी नहीं होना चाहिए।

यह होना चाहिए—

DOCUMENT बनाम GROUND REALITY कागज में यदि 100% compliance है तो स्थल निरीक्षण में वही स्थिति दिखाई देनी चाहिए।  यदि वृक्षारोपण दर्ज है तो जंगल दिखाई देना चाहिए।  यदि reclamation दर्ज है तो reclaimed land की पहचान और उपयोग स्पष्ट होना चाहिए।  यदि dust control दर्ज है तो गांवों की शिकायतों से उसका मिलान होना चाहिए।   यदि worker safety compliance दर्ज है तो occupational health records भी मौजूद होने चाहिए।

 

श्रमिकों की सुरक्षा पर भी सवाल

2019 के अध्ययन ने mining operations में लगे श्रमिकों की health and safety compliance पर भी सवाल दर्ज किए।   इसलिए अब खदान से सिर्फ खनिज उत्पादन की संख्या नहीं—। worker health data भी सामने आना चाहिए।

कितने श्रमिकों का periodic medical examination हुआ?

कितनों का lung-function test?

कितनों की audiometry?

Dust exposure से संबंधित बीमारी के कितने मामले?

PPE distribution और actual use की निगरानी कैसे हुई?

ये प्रश्न सीधे श्रमिक सुरक्षा से जुड़े हैं।

खनिज का वजन रोज तौला जाता है… पर्यावरणीय नुकसान का वजन कौन तौलेगा?

यही इस कहानी का सबसे बड़ा कटाक्ष है।

बॉक्साइट कितना निकला—रिकॉर्ड।

कितने ट्रक निकले—रिकॉर्ड।

कितनी royalty—रिकॉर्ड।

कितनी उत्पादन क्षमता—रिकॉर्ड।

तो फिर—

कितनी जमीन लौटाई?

कितने पेड़ जिंदा हैं?
कितनी धूल कम हुई?
कितने परिवार सुरक्षित हैं?

इसका भी उतना ही स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की मांग है कि Bodai-Daldali mining area का स्वतंत्र संयुक्त पर्यावरणीय ऑडिट कराया जाए, जिसमें Forest Department, Pollution Control Board, जिला प्रशासन, खनन विभाग तथा प्रभावित ग्राम प्रतिनिधियों की मौजूदगी में reclamation, plantation, dust control, blasting और worker health की भौतिक जांच हो।

क्योंकि खनन खत्म होने के बाद सिर्फ गड्ढे नहीं बचने चाहिए—

जवाबदेही भी बचनी चाहिए।  BALCO–Vedanta का पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कंपनी यदि उपलब्ध compliance reports, plantation survival data, reclamation map, air-quality data और worker-health records सार्वजनिक करती है तो उन्हें भी ग्राम यात्रा प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

 अगली कड़ी

“Compliance Report में सब ठीक… तो Ground Report क्या कहेगी?”

BALCO की Kawardha Six-Monthly Compliance Report की शर्त-दर-शर्त पड़ताल—कौन सी शर्त ‘Complied’, कौन ‘Partially Complied’ और कौन बनी रही सवालों में?

विशेष खोजी श्रृंखला | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

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