36 साल से बंद पड़ी दो पुरानी खदानों को री-ओपन करने की तैयारी

रायगढ़ । जिले में दो ऐसी खदानों को री-ओपन करने की तैयारी की जा रही है जो करीब 36 साल से बंद पड़ी हैं। एसईसीएल की इन दोनों खदानों से उत्पादन 1990 से पहले ही बंद कर दिया गया था। जब क्लोज करने की फाइल बढ़ी तो पता चला कि माइंस में कोयला बचा हुआ है। अब डोमनारा और मांड कोल माइंस से बचा हुआ कोयला निकालने की संभावना तलाशी जा रही है। पिछले 10-15 सालों में कोयला खदानों की जियोलॉजिकल रिपोर्ट बनाने में तकनीकी पहलू ज्यादा मजबूत हुआ है।
इसके पहले टेक्निकल सर्वे भी एक सीमा में ही हो पाता था। सीएमपीडीआई के पास भी संसाधन कम थे।कोल इंडिया के अधीन छोटी-छोटी खदानें बड़ी संख्या में थी। एसईसीएल के पास भी डोमनारा और मांड अंडरग्राउंड कोल माइंस थी। इन दोनों खदानों से कोयला खनन करीब 1988 में ही बंद कर दिया गया था। कोयले की ग्रेड खराब और माइनिंग कॉस्ट अधिक होने की वजह से उत्पादन बंद कर दिया गया था। दोनों खदानों की क्लोजर रिपोर्ट भेजने पर आपत्ति की गई। कहा गया कि दोनों माइंस में कोयला बचा हुआ है। इसे निकाले बिना माइंस क्लोज नहीं कर सकते। एसईसीएल को दोबारा से दोनों खदानों से कोयला निकालने की संभावना तलाशने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि करीब दस मिलियन टन कोयला बचा हुआ है। इसे निकालने के बाद ही माइंस क्लोज की जा सकेगी।
लेकिन अंडरग्राउंड माइंस होने की वजह से खनन करना मुश्किल है। कई साल पहले जहां से कोयले की निकासी बंद की गई थी, अब दोबारा वहां माइनिंग शुरू करना आसान नहीं होगा। एसईसीएल इसकी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
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