ब्रेकिंग न्यूज़

क्या BALCO प्रबंधन के लिए कलेक्टर का पत्र भी बेअसर?

Spread the love

 

₹7.05 करोड़ की लंबित CSR राशि पर उठे बड़े सवाल—बार-बार निर्देश के बाद भी भुगतान नहीं, आखिर किसके भरोसे चल रही है यह चुप्पी?

 

WhatsApp Group
Telegram Channel Join Now

 

आईटी कोरबा के भविष्य से जुड़ी करोड़ों की राशि अटकी, प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी या कोई और वजह?

 

विशेष खोजी रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

 

कोरबा।   यदि किसी निजी औद्योगिक कंपनी को जिला कलेक्टर स्वयं पत्र लिखकर करोड़ों रुपये की लंबित राशि शीघ्र जमा करने के निर्देश दें, अनेक उच्चस्तरीय बैठकों में निर्णय हो चुके हों, वर्षों से पत्राचार जारी हो, फिर भी राशि जमा न हो— तो यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह जाती, बल्कि शासन-प्रशासन की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

 

 

उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार 08 जून 2026 को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, कोरबा ने भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) को स्पष्ट पत्र जारी कर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईटी) कोरबा के लिए सीएसआर मद की ₹7.05 करोड़ की शेष सहयोग राशि तत्काल जारी करने को कहा।

 

 

पत्र में यह भी उल्लेख है कि यह कोई पहला पत्र नहीं था। 24 जून 2021, 30 अक्टूबर 2021 और 19 अप्रैल 2026 की उच्चस्तरीय बैठकों में भी यही विषय तय हुआ था। अपेक्षित ₹10 करोड़ में से केवल लगभग ₹2.95 करोड़ ही प्राप्त हुए, जबकि शेष ₹7.05 करोड़ आज भी लंबित बताए गए।

आखिर क्यों नहीं हुआ भुगतान?

 

यदि कलेक्टर के स्पष्ट पत्र के बाद भी भुगतान नहीं हुआ, तो अब सवाल केवल राशि का नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेशों के सम्मान और जवाबदेही का भी है।

क्या किसी निजी कंपनी के लिए जिला प्रशासन के लिखित निर्देशों का पालन वैकल्पिक है?

यदि नहीं, तो फिर इतने समय बाद भी आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हुआ?

कहीं यह प्रशासनिक अधिकार की परीक्षा तो नहीं?

जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी द्वारा जारी पत्र के बाद भी यदि स्थिति जस की तस बनी रहती है, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि—

क्या जिला प्रशासन ने आगे कोई वैधानिक कदम उठाया?

क्या कंपनी ने भुगतान न करने का कोई अधिकृत कारण बताया?

यदि कारण बताया गया, तो क्या वह सार्वजनिक किया गया?

यदि कारण नहीं बताया गया, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

तकनीकी शिक्षा का सवाल, सिर्फ एक भुगतान का नहीं

आईटी कोरबा जैसे संस्थान के लिए स्वीकृत सहयोग राशि वर्षों तक लंबित रहना केवल वित्तीय विषय नहीं है। यह उन छात्रों और जिले के तकनीकी विकास से जुड़ा मुद्दा है, जिनके हित में यह सहयोग प्रस्तावित किया गया था।

अब प्रशासन को स्पष्ट जवाब देना होगा

 

यह मामला अब केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जनहित में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि—

क्या ₹7.05 करोड़ की राशि आज तक जमा हुई?

यदि नहीं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

क्या जिला प्रशासन इस मामले में अगली वैधानिक कार्रवाई करेगा?

 

या फिर यह पत्र भी सरकारी अभिलेखों में दर्ज एक और औपचारिक दस्तावेज़ बनकर रह जाएगा?

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क का प्रश्न

 

“जब जिला कलेक्टर के लिखित निर्देश के बाद भी करोड़ों रुपये की लंबित राशि का भुगतान नहीं होता, तब जवाबदेही किसकी तय होगी—और जनता को इसका उत्तर कब मिलेगा?”

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button