शबरी वाचनालय से जनजातीय विरासत को मिला नया मंच

राज्यपाल रमेन डेका ने किया उद्घाटन, बोले— शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रसेवा का बनेगा सशक्त केंद्र
विशेष संवाददाता | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
रायपुर, 21 जुलाई। जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ द्वारा स्थापित “शबरी वाचनालय” का मंगलवार को शबरी कन्या आश्रम परिसर, रोहिणीपुरम (रायपुर) में भव्य उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका रहे, जिन्होंने वाचनालय का शुभारंभ करते हुए इसे जनजातीय संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया।
समारोह की अध्यक्षता वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री उमेश कच्छप ने की, जबकि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री अतुल जोग ने मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री राजीव शर्मा ने किया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत, छात्राओं ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं वाचनालय के उद्घाटन के साथ हुआ। शबरी कन्या आश्रम की छात्राओं ने आकर्षक स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया तथा “राष्ट्र विजयी हो हमारा” एकल गीत की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण बना रहा।
जनजातीय इतिहास, भाषा और संस्कृति के संरक्षण का होगा केंद्र
वनवासी विकास समिति के प्रतिनिधि श्री अनुराग जैन ने संस्था द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज उत्थान के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत में छात्रावास, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और शैक्षिक परियोजनाओं के माध्यम से जनजातीय समाज के विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शबरी वाचनालय का उद्देश्य जनजातीय इतिहास, भाषा, साहित्य, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करने के साथ-साथ बालिकाओं में अध्ययन की आदत विकसित करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बनाना है।
1952 से शुरू हुई यात्रा का उल्लेख
मुख्य वक्ता श्री अतुल जोग ने अपने संबोधन में कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम की शुरुआत वर्ष 1952 में जशपुर से हुई थी। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के बारे में वर्षों से फैलाए गए अनेक भ्रमों और मिथकों को तथ्यों के आधार पर समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि आश्रम से शिक्षित अनेक बालिकाएँ आज डॉक्टर, प्रोफेसर, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी, सेना के अधिकारी तथा महिला कमांडो के रूप में देश की सेवा कर रही हैं, जो इस अभियान की सफलता का प्रमाण है।
राज्यपाल बोले— नई पीढ़ी तक पहुंचे जनजातीय वीरों का इतिहास
मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि “शबरी वाचनालय जैसी पहल समाज के उत्थान और संस्कृति के संवर्धन की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।”
उन्होंने विशेष रूप से अत्यंत पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के संरक्षण, उनकी संस्कृति के संवर्धन तथा जीवन स्तर में सुधार के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल ने जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीरांगनाओं—विशेषकर रानी दुर्गावती—के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शबरी आश्रम केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने का भी सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से समाजहित में कम-से-कम एक रचनात्मक कार्य करने का संकल्प लेने की अपील की।
आभार के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री उमेश कच्छप ने राज्यपाल, मुख्य वक्ता, सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं और उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का औपचारिक समापन हुआ।
मुख्य बातें
– रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित शबरी कन्या आश्रम में “शबरी वाचनालय” का शुभारंभ।
– राज्यपाल रमेन डेका ने किया उद्घाटन।
– जनजातीय इतिहास, भाषा, संस्कृति और साहित्य के संरक्षण पर विशेष जोर।
– बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रसेवा की भावना को बढ़ावा देने का उद्देश्य।
– PVTG समुदायों के संरक्षण और जनजातीय वीरों के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का आह्वान।
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