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कोरबा से अभनपुर तक साल की लकड़ी का खेल!

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206 पेड़ों की कटाई के बाद सरकारी डिपो से गायब हुई लकड़ी, आरा मिल में मिली खेप — वन विभाग की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

 

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मुख्य आरोपी गिरफ्तार, आरा मिल सील — अब सवाल, इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल?

 

विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

कोरबा/रायपुर।   छत्तीसगढ़ में अवैध लकड़ी कारोबार के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साल प्रजाति की बहुमूल्य लकड़ी की कथित हेराफेरी का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान लगभग 8 से 10 लाख रुपये मूल्य की साल की लकड़ी बरामद की गई है। मामले के मुख्य आरोपी सुनील गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि रायपुर जिले के अभनपुर स्थित एक आरा मिल को सील कर दिया गया है।

 

 

इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि यदि जांच निष्पक्ष और व्यापक हुई तो अवैध लकड़ी कारोबार के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

डिपो में जमा होनी थी लकड़ी, पहुंच गई आरा मिल

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोरबा के सीएसईबी क्षेत्र में विधिवत अनुमति लेकर 206 साल के पेड़ों की कटाई की गई थी। नियमानुसार कटाई के बाद पूरी लकड़ी को वन विभाग के अधिकृत डिपो में जमा कराना आवश्यक था ताकि उसका रिकॉर्ड और सत्यापन किया जा सके।

लेकिन आरोप है कि लकड़ी को निर्धारित डिपो में जमा कराने के बजाय सीधे अभनपुर स्थित एक निजी आरा मिल भेज दिया गया।

डीएफओ के निरीक्षण से खुला पूरा मामला

 

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब डीएफओ प्रेमलता यादव ने डिपो का निरीक्षण किया। निरीक्षण में स्टॉक और रिकॉर्ड में अंतर मिला। इसके बाद विशेष जांच दल गठित किया गया।

 

जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि गायब लकड़ी को कोरबा से अभनपुर भेजा गया था। वन विभाग की टीम ने तत्काल दबिश देकर लकड़ी बरामद की और संबंधित आरा मिल को सील कर दिया।

 

अब जांच के घेरे में पूरा नेटवर्क

वन विभाग की प्रारंभिक कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आ रहे हैं—

206 पेड़ों से प्राप्त कुल लकड़ी का आधिकारिक हिसाब क्या है?

डिपो से लकड़ी बाहर कैसे निकली?

परिवहन के दौरान किसने अनुमति दी?

क्या यह एक अकेले व्यक्ति का मामला है या संगठित गिरोह सक्रिय था?

संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी या नहीं?

क्या राज्यभर की अन्य कटाई परियोजनाओं का भी ऑडिट कराया जाएगा?

कानून से बड़ा कोई नहीं

 

वन संपदा केवल आर्थिक संसाधन नहीं बल्कि पर्यावरणीय धरोहर भी है। यदि सरकारी अनुमति की आड़ में लकड़ी की अवैध निकासी हुई है तो यह केवल वन अपराध नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला है। दोषी चाहे कोई भी हो, निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

ग्राम यात्रा की मांग

पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

कटाई से लेकर परिवहन और भंडारण तक की पूरी चेन सार्वजनिक की जाए।

सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए।

भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतंत्र ऑडिट की व्यवस्था लागू की जाए।

“जंगल सिर्फ पेड़ों का नहीं, आने वाली पीढ़ियों का भी है। यदि अवैध कटाई और तस्करी पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो नुकसान केवल सरकार का नहीं, पूरे समाज का होगा।”

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