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नशे में दौड़ी स्कूल बस… बुझ गया एक घर का चिराग!

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सेंट जेवियर्स स्कूल बस की टक्कर से बुजुर्ग की मौत, चालक गिरफ्तार—अब स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही से कौन बचाएगा?


क्या बच्चों की जान भी भगवान भरोसे थी? क्या नशे में चालक को स्कूल बस की चाबी सौंप दी गई?

 

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कोरबा। पंडित रविशंकर शुक्ल नगर, वार्ड क्रमांक 26 में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। सेंट जेवियर्स स्कूल की बस की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। पुलिस ने बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है।

 

 

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चालक के नशे में होने के आरोप सामने आए हैं।बस चालक ने खुद कहा हां मैंने पी है… विडियो में

 

यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो मामला केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि दर्जनों स्कूली बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही का भी होगा।

 

सवाल सिर्फ चालक पर नहीं, पूरे सिस्टम पर है

एक चालक यदि कथित रूप से नशे की हालत में स्कूल बस चला रहा था, तो सवाल यह भी उठता है—

क्या स्कूल प्रबंधन ने चालक की ड्यूटी से पहले कोई जांच की?

क्या चालक की फिटनेस और सुरक्षा मानकों का पालन कराया गया?

यदि बस में बच्चे मौजूद थे या उन्हें ले जाने वाली बस थी, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?

क्या स्कूल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है?

एक परिवार उजड़ गया… जिम्मेदार कौन?

इस हादसे में एक बुजुर्ग ने अपनी जान गंवा दी। एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यही बस आगे जाकर बच्चों से भरी होती, तो क्या तब भी इसे केवल “दुर्घटना” कहा जाता?

वार्ड 26 के पार्षद अब्दुल रहमान अधिवक्ता की मांग

 

स्थानीय पार्षद ने मांग की है कि—

 

मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।

बस चालक के साथ-साथ यदि जांच में लापरवाही सिद्ध हो तो स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

जिले के सभी निजी स्कूलों की बसों की विशेष जांच कराई जाए।

भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

अब जिला प्रशासन की अग्निपरीक्षा

 

यह मामला केवल एक एफआईआर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा—

क्या जिले की सभी स्कूल बसों का फिटनेस और चालक सत्यापन अभियान चलेगा?

क्या शराब या नशीले पदार्थों के सेवन की जांच की व्यवस्था होगी?

क्या निजी स्कूलों की परिवहन व्यवस्था का स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा?

जनता पूछ रही है...

 

क्या अब भी बच्चों की सुरक्षा कागजों तक सीमित रहेगी?

क्या किसी और परिवार को अपने प्रियजन की जान गंवाने का इंतजार किया जाएगा?

या इस हादसे के बाद वास्तव में ऐसी कार्रवाई होगी जो आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे?

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