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बिलासपुर बना ‘वाटरलू’! एक रात की बारिश ने बहा दिए दावे, डूब गई सड़कें… ठप पड़ा सिस्टम… पानी-पानी हुआ पूरा शहर

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ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क | बिलासपुर।   यह सिर्फ बारिश नहीं थी… यह बिलासपुर की शहरी व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा थी, जिसमें सिस्टम बुरी तरह फेल होता दिखाई दिया।

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गुरुवार आधी रात से शुक्रवार सुबह तक हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे बिलासपुर को जलमग्न कर दिया। सड़कें नदी बन गईं, कॉलोनियां तालाब में तब्दील हो गईं, घरों में पानी घुस गया, वाहन बहने लगे, बिजली-पानी की व्यवस्था चरमरा गई और लोग घंटों तक अपने ही घरों में कैद होकर रह गए।

पहली ही बारिश में खुली तैयारियों की पोल

 

हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर नालों की सफाई और प्री-मानसून तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश ने उन सभी दावों की हकीकत सामने ला दी। जिन इलाकों में हर वर्ष जलभराव होता है, इस बार भी वही इलाके सबसे पहले डूब गए।

 

सबसे बड़ा सवाल यही है— यदि कुछ घंटों की बारिश में ही बिलासपुर डूब जाता है, तो करोड़ों रुपये की तैयारियां आखिर गई कहां?

जनजीवन अस्त-व्यस्त, प्रशासन राहत में जुटा

 

जलभराव के कारण कई घरों में पानी घुस गया, बाजार बंद हो गए, स्कूलों में छुट्टी करनी पड़ी और बिजली आपूर्ति बाधित रही। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया, स्वास्थ्य विभाग ने 45 कॉम्बेट टीमें मैदान में उतारीं और कई क्षेत्रों में जलनिकासी के लिए पंप लगाए गए।

अब जवाब कौन देगा?

 

बिलासपुर की इस बारिश ने केवल शहर को नहीं डुबोया, बल्कि शहरी नियोजन, ड्रेनेज सिस्टम, नगर निगम की तैयारियों और आपदा प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

क्या हर मानसून में जनता इसी तरह जलभराव झेलती रहेगी? क्या करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर हर साल डूबता रहेगा? और क्या इस बार जिम्मेदारी तय होगी?

बिलासपुर ने शुक्रवार को केवल बारिश नहीं देखी… उसने सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी भी देखी।

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