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बांगो बांध से सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा पानी, 80 मेगावाट बिजली उत्पादन जारी; जुलाई में पहली बार जलस्तर में आई गिरावट

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कोरबा । खरीफ सीजन के लिए सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बांगो बांध से दोनों प्रमुख नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके लिए हाइडल पावर प्लांट की दो इकाइयों को पिछले 30 घंटे से लगातार संचालित किया जा रहा है, जिससे 80 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी हो रहा है। पानी छोड़े जाने के कारण जुलाई माह में पहली बार बांगो बांध के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है।

बुधवार सुबह बांगो बांध का जलस्तर 352.74 मीटर दर्ज किया गया, जो एक दिन पहले 352.78 मीटर था। इस तरह जलस्तर में 4 सेंटीमीटर की कमी आई है। वर्तमान में बांध में 1,807.02 मिलियन घन मीटर पानी संग्रहित है, जो इसकी कुल भंडारण क्षमता का 62.43 प्रतिशत है। बारिश थमने के कारण फिलहाल बांध में पानी की आवक लगभग बंद है। हालांकि पिछले करीब डेढ़ महीने में बांध में 253.48 मिलियन घन मीटर पानी की आवक दर्ज की गई है।

 

 

 

 

सिंचाई के लिए वर्तमान में दोनों नहरों में कुल 5,064.57 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें दायीं तट नहर में 2,729.07 क्यूसेक तथा बांयीं तट नहर में 2,335.50 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जा रहा है। दोनों नहरों के माध्यम से जांजगीर-चांपा, सक्ती और रायगढ़ जिलों के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

बांगो हाइडल पावर प्लांट की कुल उत्पादन क्षमता 120 मेगावाट है, लेकिन वर्तमान में तीन में से केवल दो इकाइयों का संचालन किया जा रहा है। इससे 80 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। सिंचाई के लिए नहरों में पानी की मात्रा चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही है। दोनों नहरों की क्षमता 4,200-4,200 क्यूसेक है और आवश्यकता पड़ने पर पूरी क्षमता से पानी छोड़ा जाएगा। विभाग का कहना है कि इस वर्ष बांध का जलस्तर पिछले वर्ष की तुलना में करीब तीन मीटर अधिक है, इसलिए सिंचाई के लिए पानी की कमी की संभावना नहीं है। नहरों में पानी छोड़े जाने के कारण दर्री बैराज का गेट खोलने की आवश्यकता भी नहीं पड़ी है।

हसदेव दर्री बैराज के एसडीओ पी.के. टोप्पो ने बताया कि किसानों की आवश्यकता के अनुसार सुबह और शाम नहरों में पानी की मात्रा बढ़ाई जा रही है। जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर नहरों में पूरी क्षमता के साथ पानी छोड़ा जाएगा।

 

 

 

इधर, जिले में मानसून की रफ्तार अब भी धीमी बनी हुई है। आषाढ़ का एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी लगातार तीसरे दिन जिले में बारिश का रिकॉर्ड शून्य रहा। मानसून सीजन में अब तक 277.5 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पिछले 10 वर्षों का औसत 351.7 मिलीमीटर है। इस प्रकार जिले में अब तक 21.1 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि मंगलवार को कुछ क्षेत्रों में हल्की बौछारें पड़ीं।

 

 

 

कम बारिश का असर खरीफ फसल की बोआई पर भी दिखाई दे रहा है। जिले में खरीफ फसल का कुल रकबा 1 लाख 37 हजार 490 हेक्टेयर है, जिसमें अब तक लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोआई हो सकी है। कृषि विभाग के उपसंचालक डी.पी.एस. कंवर ने बताया कि बोआई का रकबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। किसान धान के साथ-साथ दलहन और तिलहन की फसलों की भी बुवाई कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अच्छी बारिश होने पर आगामी दिनों में बोआई की रफ्तार और तेज होगी।

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