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THE BALCO PAPERS – AGAIN EPISODE–02 “22 शर्तों पर मिली थी मंजूरी… क्या उन 22 शर्तों का हिसाब आज भी बाकी है?” 355 एकड़… ₹125 करोड़… Zero Discharge… 118 एकड़ ग्रीन बेल्ट… और 22 वैधानिक शर्तें। सरकारी फाइल अब पूछ रही है—क्या सबका पालन हुआ था?

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THE BALCO PAPERS – AGAIN

EPISODE–02

“22 शर्तों पर मिली थी मंजूरी… क्या उन 22 शर्तों का हिसाब आज भी बाकी है?”

355 एकड़… ₹125 करोड़… Zero Discharge… 118 एकड़ ग्रीन बेल्ट… और 22 वैधानिक शर्तें। सरकारी फाइल अब पूछ रही है—क्या सबका पालन हुआ था?

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नई दिल्ली | रायपुर | कोरबा

14 अगस्त 2007।

भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने BALCO की 1200 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति दी।

लेकिन यह कोई “खुली छूट” नहीं थी।

यह 22 कठोर वैधानिक शर्तों के साथ जारी किया गया एक सरकारी अनुबंध था।

आज, लगभग दो दशक बाद, वही सरकारी दस्तावेज़ ऐसे सवाल उठा रहा है जिन्हें नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं है।

THE BALCO PAPERS – AGAIN की यह कड़ी किसी आरोप से नहीं, बल्कि भारत सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड से शुरू होती है।

और शायद यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।


क्या 355 एकड़ सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया?

सरकार ने स्पष्ट लिखा—

परियोजना 355 एकड़ भूमि तक सीमित रहेगी।

अब सार्वजनिक हित का पहला प्रश्न है—

  • आज परियोजना का वास्तविक भू-क्षेत्र कितना है?
  • यदि इससे अधिक भूमि का उपयोग हुआ—
  • क्या नई पर्यावरणीय स्वीकृति ली गई?
  • क्या मंत्रालय को इसकी सूचना दी गई?
  • क्या अतिरिक्त भूमि मूल EIA का हिस्सा थी?

यदि उत्तर “हाँ” है तो रिकॉर्ड सामने आना चाहिए।

यदि “नहीं” है तो यह भी सार्वजनिक होना चाहिए।


₹125 करोड़ पर्यावरण के लिए थे… उनका हिसाब कहाँ है?

दस्तावेज़ में स्पष्ट उल्लेख है—

₹125 करोड़ केवल पर्यावरण संरक्षण उपायों के लिए निर्धारित थे।

अब प्रश्न है—

  • वर्षवार कितना खर्च हुआ?
  • किन कार्यों पर हुआ?
  • क्या मंत्रालय को पूरा विवरण भेजा गया?

सरकारी रिकॉर्ड इस प्रश्न का उत्तर दे सकता है।


Zero Discharge… या केवल एक सरकारी शब्द?

मंत्रालय ने आदेश दिया—

“Zero Discharge shall be adopted.”

अर्थात—

संयंत्र का औद्योगिक अपशिष्ट जल बाहर नहीं जाना चाहिए।

अब प्रश्न उठता है—

  • क्या यह शर्त पूरे संचालन काल में लागू रही?
  • यदि कभी बाहरी जल निकासी हुई—
  • तो उसका रिकॉर्ड कहाँ है?

118 एकड़ ग्रीन बेल्ट… क्या वास्तव में विकसित हुई?

22 शर्तों में स्पष्ट निर्देश था—

परियोजना क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई हिस्सा हरित पट्टी होना चाहिए।

यानी—

करीब 118 एकड़।

आज प्रश्न है—

  • क्या इतनी हरित पट्टी वास्तव में मौजूद है?
  • या यह केवल अनुपालन रिपोर्टों तक सीमित रही?

राख सुरक्षित रही… या सिर्फ दावा सुरक्षित रहा?

स्वीकृति पत्र में राख निपटान के लिए कठोर शर्तें थीं—

  • Impervious Lining
  • भूजल सुरक्षा
  • राख बांध की मजबूती
  • धूल नियंत्रण
  • वैज्ञानिक निपटान

यदि कहीं—

  • राख बहने,
  • भूजल प्रभावित होने,
  • राख उड़ने,
  • अथवा राख बांध सुरक्षा पर प्रश्न उठे,

तो यह केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह जाता—

यह पर्यावरणीय स्वीकृति के अनुपालन का राष्ट्रीय प्रश्न बन जाता है।


हर छह महीने रिपोर्ट भेजना अनिवार्य था…

मंत्रालय ने आदेश दिया—

हर छह माह पर अनुपालन रिपोर्ट भेजी जाएगी।

इसका अर्थ है—

2007 से अब तक दर्जनों रिपोर्टें सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा होनी चाहिए।

अब सबसे बड़ा प्रश्न—

  • क्या वे रिपोर्टें सार्वजनिक हैं?
  • यदि हैं—
  • तो उनमें क्या लिखा है?
  • यदि नहीं—
  • तो क्यों नहीं?

परियोजना बदली तो क्या मंत्रालय को बताया गया?

सरकार ने स्पष्ट लिखा—

यदि—

  • क्षमता बदले,
  • तकनीक बदले,
  • भूमि बढ़े,
  • जल उपयोग बदले,
  • परियोजना स्वरूप बदले,

तो मंत्रालय को पुनः संदर्भ देना अनिवार्य होगा।

यही इस पूरी जांच की धुरी है।


सरकारी फाइल का सबसे बड़ा संदेश

यह दस्तावेज़ किसी उल्लंघन का निर्णय नहीं देता।

लेकिन यह अवश्य बताता है कि—

BALCO को मिली पर्यावरणीय स्वीकृति बिना शर्त नहीं थी।

वह 22 वैधानिक दायित्वों से बंधी हुई थी।

अब सवाल यह नहीं है कि—

अनुमति मिली थी या नहीं।

सवाल यह है—

क्या उन 22 शर्तों का पालन भी उसी गंभीरता से हुआ, जिस गंभीरता से सरकार ने उन्हें लिखा था?


THE BALCO PAPERS – AGAIN

“सरकारी दस्तावेज़ों की अगली परत में खुलेंगे अनुपालन रिपोर्टों के पन्ने…”

क्या 2007 से आज तक भेजी गई Compliance Reports इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सच छिपाए बैठी हैं?

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