टीईटी की चुनौती: डेढ़-दो दशक से पढ़ा रहे हजारों शिक्षक अब खुद बनेंगे परीक्षार्थी, 2028 तक पास नहीं करने पर सेवा पर मंडराएगा संकट


कोरबा । वर्षों से स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले हजारों शिक्षक अब स्वयं परीक्षा की तैयारी करने को मजबूर हैं। प्रदेश के कोरबा जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ में वर्ष 2001 से 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों के सामने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कोरबा जिले में ऐसे 864 शिक्षक हैं, जबकि पूरे प्रदेश में इनकी संख्या लगभग 80 हजार बताई जा रही है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो 50 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं और कई की उम्र 54 से 55 वर्ष तक पहुंच चुकी है। ऐसे में लंबे समय बाद फिर से किताबों के बीच लौटकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं माना जा रहा है।

दरअसल, 3 सितंबर 2001 से 23 अगस्त 2010 के बीच प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के प्रावधानों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। इस मामले को लेकर लंबे समय से न्यायालय में कानूनी लड़ाई चल रही थी। शिक्षकों को उम्मीद थी कि उन्हें टीईटी से छूट मिल सकती है, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करना होगा और उन्हें इस अनिवार्यता से छूट नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है। हालांकि न्यायालय ने शिक्षकों को राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा एक वर्ष बढ़ा दी है। पहले यह अंतिम तिथि 21 अगस्त 2027 निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब 21 अगस्त 2028 कर दिया गया है। यदि निर्धारित अवधि तक शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर पाए, तो उनकी सेवा पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
इस निर्णय के बाद प्रदेशभर के शिक्षकों में चिंता का माहौल है। कई शिक्षक पिछले 15 से 20 वर्षों से लगातार अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में भी काफी बदलाव आया है। अब उन्हें आधुनिक पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षा के स्वरूप के अनुरूप तैयारी करनी होगी। अधिकांश शिक्षक नियमित स्कूल संचालन, मूल्यांकन, प्रशासनिक कार्यों और अन्य शासकीय जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में अध्ययन के लिए पर्याप्त समय निकालना भी उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे अनुभवी शिक्षकों को सेवा समाप्ति जैसी स्थिति से बचाने के लिए सरकार को विशेष प्रशिक्षण, निःशुल्क कोचिंग, अध्ययन सामग्री तथा पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि वे बिना अनावश्यक दबाव के टीईटी उत्तीर्ण कर सकें।
कोरबा जिले के 864 शिक्षकों सहित प्रदेशभर के लगभग 80 हजार शिक्षक अब आगामी टीईटी परीक्षा की तैयारी में जुटने की योजना बना रहे हैं। शिक्षा विभाग की ओर से भी समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। फिलहाल शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी सेवाओं को सुरक्षित रखना है। आने वाले दो वर्षों में टीईटी इन शिक्षकों के लिए केवल एक पात्रता परीक्षा नहीं, बल्कि उनके पूरे सेवा भविष्य का निर्णायक आधार बन जाएगी।

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