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छत्तीसगढ़ में नशामुक्ति अभियान को मिलेगी नई मजबूती, 5 जिलों में खुलेंगे नए नशामुक्ति केंद्र

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रायपुर । छत्तीसगढ़ में शराब और नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार एवं पुनर्वास को और प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ शराब व्यसन मुक्ति अभियान (भारत माता वाहिनी योजना) की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश के पांच जिलों में नए नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने सहित कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा और सहमति बनी।

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मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित बैठक की अध्यक्षता समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव  शहला निगार ने की। बैठक में समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान राज्य में संचालित नशामुक्ति कार्यक्रमों की प्रगति, नशापीड़ित व्यक्तियों के पुनर्वास, नशामुक्ति केंद्रों के संचालन और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में राज्य स्तरीय समिति की 6 अक्टूबर 2023 को आयोजित पिछली बैठक के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा करते हुए विभिन्न लंबित प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। समिति ने भारत माता वाहिनी योजना के विस्तार पर विशेष जोर देते हुए प्रत्येक विकासखंड की एक हजार से अधिक आबादी वाली नवीन ग्राम पंचायतों में भारत माता वाहिनी के गठन एवं विस्तार का प्रस्ताव रखा, ताकि नशामुक्ति अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके।

 

बैठक में नशापीड़ित व्यक्तियों के उपचार और पुनर्वास के लिए संचालित 15 बिस्तरों वाले एकीकृत पुनर्वास केंद्रों की क्षमता बढ़ाकर 50 बिस्तर करने का सुझाव दिया गया। समिति का मानना है कि बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए पुनर्वास केंद्रों की क्षमता बढ़ाना जरूरी है, जिससे अधिक संख्या में जरूरतमंद लोगों को उपचार और परामर्श की सुविधा मिल सके।

समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि राज्य के कुछ जिलों में अभी तक नशामुक्ति केंद्र संचालित नहीं हैं। ऐसे जिलों में केंद्रों की स्थापना के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। इसी कड़ी में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सुकमा, बेमेतरा और कोरबा जिलों में नए नशामुक्ति केंद्र खोले जाने की दिशा में पहल शुरू की जाएगी।

नशामुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए बैठक में सीसीटीवी कैमरे और बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई। समिति ने माना कि इन व्यवस्थाओं से केंद्रों की निगरानी बेहतर होगी और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

 

बैठक में वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान अभियान के तहत किए गए कार्यों और व्यय की समीक्षा की गई। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना, मानव संसाधन की उपलब्धता और प्रशासनिक आवश्यकताओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

समिति ने एनसीओआरडी (NCORD) और एनएमबीए (NMBA) के प्रभावी क्रियान्वयन में विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों और समुदाय आधारित समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में कहा गया कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है।

 

 

राज्य सरकार ने नशामुक्ति अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने, पुनर्वास सेवाओं को मजबूत बनाने तथा समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर संचालित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से प्रदेश में नशे के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती मिलेगी तथा प्रभावित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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