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क्या BALCO विनिवेश की पूरी कहानी देश से छिपी रह गई? कोरबा ही नहीं, पश्चिम बंगाल की बिधानबाग इकाई भी थी सौदे का हिस्सा “पश्चिम बंगाल से छत्तीसगढ़ तक BALCO की पूरी कहानी”

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विशेष खोजी रिपोर्ट

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली / कोरबा / आसनसोल।

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जब भी भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) के वर्ष 2001 के विनिवेश की चर्चा होती है, तो अधिकांश बहस छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित विशाल एल्युमिनियम संयंत्र, पावर प्लांट और टाउनशिप तक सीमित रह जाती है। लेकिन क्या देश को यह पूरी जानकारी है कि BALCO के पास पश्चिम बंगाल के आसनसोल क्षेत्र में स्थित बिधानबाग (J.K. Nagar) की एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई भी थी, जो उसी विनिवेश सौदे का हिस्सा बनी?

यह सवाल आज इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि BALCO विनिवेश को देश के सबसे चर्चित रणनीतिक विनिवेशों में गिना जाता है।


राष्ट्रीयकरण से BALCO तक का सफर

बिधानबाग इकाई मूल रूप से Aluminium Corporation of India Ltd. (ALUCOIN) की संपत्ति थी। आर्थिक संकट के बाद केंद्र सरकार ने संसद के अधिनियम के माध्यम से इस बीमार उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया और वर्ष 1984 में इसे BALCO में विलय कर दिया।

यानी यह केवल एक फैक्ट्री नहीं थी, बल्कि जनता के धन से पुनर्जीवित की गई राष्ट्रीय औद्योगिक परिसंपत्ति थी।


केवल कोरबा नहीं, BALCO की दूसरी बड़ी कार्यशील इकाई

सार्वजनिक अभिलेख बताते हैं कि BALCO की पहचान दो प्रमुख परिसंपत्तियों से थी—

● कोरबा – प्राथमिक एल्युमिनियम उत्पादन

● बिधानबाग – मूल्यवर्धित एल्युमिनियम उत्पाद निर्माण

बिधानबाग इकाई में रोल्ड उत्पाद, एक्सट्रूज़न, फॉइल, एलॉय रॉड और कंडक्टर जैसे उत्पाद बनाए जाते थे।


सबसे बड़ा सवाल: उस परिसंपत्ति का मूल्यांकन कितना हुआ?

विनिवेश के दौरान BALCO की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी और प्रबंधन नियंत्रण ₹551.5 करोड़ में हस्तांतरित किया गया।

लेकिन आज भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनने बाकी हैं—

● बिधानबाग इकाई की कुल भूमि कितनी थी?

● वहां स्थित भवनों, मशीनरी और टाउनशिप का मूल्यांकन कितना हुआ?

● क्या स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्ट सार्वजनिक है?

● उस परिसंपत्ति का बाजार मूल्य क्या था?

● क्या इन परिसंपत्तियों का मूल्य विनिवेश मूल्य में पर्याप्त रूप से शामिल किया गया था?


संसद में दर्ज था तकनीकी पिछड़ेपन का उल्लेख

संसदीय उत्तरों में यह स्वीकार किया गया था कि बिधानबाग इकाई पुरानी मशीनरी, सीमित उत्पाद श्रृंखला और घटते उत्पादन जैसी चुनौतियों से जूझ रही थी।

लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी औद्योगिक इकाई का मूल्यांकन केवल तत्काल उत्पादन क्षमता से नहीं बल्कि—

● भूमि,

● भवन,

● अवसंरचना,

● औद्योगिक लाइसेंस,

● मानव संसाधन,

जैसी परिसंपत्तियों के आधार पर भी किया जाता है।


विनिवेश के बाद क्या हुआ?

वर्तमान में BALCO की पहचान लगभग पूरी तरह कोरबा परिसर तक सीमित दिखाई देती है। बिधानबाग इकाई का उल्लेख सार्वजनिक कॉर्पोरेट प्रोफाइल में बहुत कम दिखाई देता है।

ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है—

विनिवेश के बाद बिधानबाग इकाई, उसकी भूमि, भवन और संबंधित परिसंपत्तियों का क्या हुआ?


राष्ट्रीय महत्व का विषय

यह केवल BALCO या किसी एक कंपनी का विषय नहीं है।

यह उन सभी सार्वजनिक उपक्रमों का प्रश्न है जिन्हें दशकों तक जनता के धन से विकसित किया गया और बाद में रणनीतिक विनिवेश के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपा गया।


जनता जानना चाहती है

देश की जनता, शोधकर्ता, नीति निर्माता और संसद के सदस्य आज भी कुछ मूलभूत सवालों के जवाब चाहते हैं—

✔ बिधानबाग इकाई की वास्तविक परिसंपत्ति कितनी थी?

✔ उसका मूल्यांकन किस आधार पर हुआ?

✔ विनिवेश के बाद उसकी स्थिति क्या रही?

✔ क्या विनिवेश प्रक्रिया में सभी परिसंपत्तियों का पूर्ण और पारदर्शी आकलन किया गया था?


अंतिम प्रश्न

जब तक इन सवालों के स्पष्ट उत्तर सार्वजनिक नहीं होते, BALCO विनिवेश की बहस अधूरी मानी जाएगी।

“राष्ट्रीय संपत्तियों का मूल्यांकन केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही का प्रश्न भी है।”

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