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छत्तीसगढ़ में खेती का नया मॉडल तैयार, फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर सरकार का जोर

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रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने “नवा अंजोर विजन 2047” के तहत कृषि क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

 

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कृषि मंत्री ने बताया कि धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ अब फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है। राज्य में वर्ष 2025-26 के दौरान दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि तिलहन फसलों के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक का विस्तार हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि खरीफ 2026 में अरहर, उड़द और मूंग की खेती के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू की जा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित खाद उपलब्ध कराना है। सरकार रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स को भी बढ़ावा दे रही है।

कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से कृषि व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जा रहा है। सीमांत किसानों को एकमुश्त उर्वरक वितरण और यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए चरणबद्ध वितरण व्यवस्था लागू की गई है।

 

उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में 23,050 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया गया है। इसके लिए 461 क्लस्टर और 922 कृषि सखियों की मदद ली जा रही है। वहीं 2.81 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए हैं और 126 पीएम  स्कूलों में सॉइल टेस्टिंग लैब स्थापित की गई हैं।

 

सरकार सूक्ष्म सिंचाई, ड्रोन तकनीक और इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम को भी बढ़ावा दे रही है। साथ ही जून-जुलाई 2026 में विशेष किसान क्रेडिट कार्ड अभियान चलाने की तैयारी है। पीएम आशा योजना के तहत दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

 

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने केंद्र सरकार से फसल विविधीकरण के लिए अलग प्रोत्साहन नीति, प्राकृतिक खेती उत्पादों के लिए अलग एमएसपी और आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष कृषि विकास पैकेज की मांग भी रखी।

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