अपराध

सूचना का अधिकार बना कमाई का जरिया ? मत्स्य पालन विभाग में नियमों को धता बताकर मांगे जा रहे दोगुने पैसे

कोरबा। कोरबा जिले के मत्स्य पालन विभाग में सूचना के अधिकार कानून की खुलेआम अनदेखी और मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आरटीआई के तहत जानकारी देने के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांग रहे हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम में जहां प्रति पृष्ठ जानकारी देने के लिए 2 रुपये शुल्क निर्धारित है, वहीं मत्स्य पालन विभाग में आवेदक से 4 रुपये प्रति पेज की दर से शुल्क जोड़कर हजारों रुपये जमा कराने की मांग की जा रही है। इसे लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला मत्स्य पालन विभाग कोरबा के सहायक संचालक कांति कुमार बघेल के कार्यालय से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने के नाम पर आवेदक को भारी भरकम राशि जमा करने के लिए कहा जा रहा है। विभाग द्वारा प्रति पेज 4 रुपये की दर से शुल्क जोड़कर हजारों रुपये की मांग की गई है, जबकि कानून में स्पष्ट रूप से प्रति पृष्ठ 2 रुपये ही निर्धारित हैं।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार आरटीआई के तहत किसी भी दस्तावेज की छायाप्रति उपलब्ध कराने के लिए प्रति पृष्ठ 2 रुपये शुल्क लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार का मनमाना शुल्क लेना नियमों के विपरीत माना जाता है। इसके बावजूद मत्स्य पालन विभाग में नियमों को नजरअंदाज करते हुए दोगुना शुल्क जोड़कर राशि वसूली की कोशिश की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी यदि पूरी तरह उपलब्ध करा दी जाए तो विभाग में हुए कई खर्चों और कार्यों की वास्तविकता सामने आ सकती है। यही वजह है कि जानकारी देने के बजाय अधिक शुल्क बताकर आवेदकों को हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है। आवेदकों का कहना है कि यह साफ तौर पर सूचना से वंचित करने की कोशिश है, ताकि विभाग के भीतर चल रहे संभावित गड़बड़ियों पर पर्दा डाला जा सके।

बताया जा रहा है कि सहायक संचालक कांति कुमार बघेल पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से कोरबा जिले में पदस्थ हैं। विभागीय नियमों के अनुसार अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण होना चाहिए, लेकिन लंबे समय से एक ही जिले में पदस्थ रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि लंबे समय से एक ही जगह पर जमे रहने के कारण विभाग में मनमानी और जवाबदेही की कमी बढ़ती जा रही है।

आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य शासन और प्रशासन में पारदर्शिता लाना है, ताकि आम नागरिक सरकारी कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सके। लेकिन यदि अधिकारी ही नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से शुल्क तय करने लगें तो यह कानून की भावना के विपरीत है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं जानकारी को दबाने या भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं की जा रही।

इस मामले को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या विभाग के अधिकारी जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज कर रहे हैं या फिर यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है। यदि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली की कोशिश की जा रही है तो यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारी इस पूरे मामले का संज्ञान लें और जांच कराएं कि आखिर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने के नाम पर दोगुना शुल्क क्यों मांगा जा रहा है। यदि इसमें किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सूचना के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण कानून की गरिमा बनी रह सके।

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button