धुलाई कोयले की, हिसाब पर पर्दा क्यों? तीवरता वाशरी बताए—पानी कितना निकाला, रिजेक्ट कहां पहुंचाया!

विश्वस्त सूत्र से गंभीर अनियमितताओं की सूचना; लिम्हा वाशरी के सरकारी रिकॉर्ड से उठे सवाल—खरीदार, जलमीटर, गुणवत्ता और वास्तविक स्टॉक का स्वतंत्र मिलान जरूरी
बिलासपुर/कोरबा। कोयला धुलाई के लिए आया तो उसका पूरा हिसाब भी सामने आना चाहिए। कितना धुला कोयला बना, कितना रिजेक्ट निकला, कितनी स्लाइम वापस मिलाई गई और कौन-सा माल किस खरीदार तक पहुंचा—इन सवालों का जवाब केवल अनुमति पत्र दिखाकर नहीं दिया जा सकता। कारोबार की अनुमति जवाबदेही से छूट नहीं है। छत्तीसगढ़ की कोल वाशरियों में जल दोहन, रिजेक्ट के निपटारे और कोयले के लेखे में कथित अनियमितताओं की विश्वस्त सूत्र से मिली सूचना के बाद ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने सार्वजनिक सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल की है। इसमें तीवरता कोल बेनिफिशिएशन लिमिटेड की लिम्हा–बेलतरा, बिलासपुर स्थित वाशरी से संबंधित अनुमति की शर्तें और तकनीकी स्पष्टीकरण मांगने वाली विसंगतियां मिली हैं। इन दस्तावेजों से कथित कोयला अफरातफरी या भ्रष्टाचार अभी सिद्ध नहीं होता। लेकिन घोषित व्यवस्था और वास्तविक संचालन का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है।
रिजेक्ट पावर प्लांट में जाना है—तो प्राप्ति का प्रमाण कहां है?
CECB के नवंबर 2024 के संचालन सहमति विस्तार पत्र में कोल रिजेक्ट, कोल फाइन्स और कोल स्लज को पावर प्लांट में ईंधन के रूप में उपयोग करने की शर्त दर्ज है। प्रवेश द्वार, तौल कांटे और संबंधित स्थानों पर CCTV निगरानी का निर्देश भी है। इसलिए प्रश्न बिल्कुल स्पष्ट है: किस बिजली संयंत्र को कितना माल भेजा गया और उसने कितनी मात्रा प्राप्त की? अपना पावर प्लांट नहीं होने पर बाहरी संयंत्र को आपूर्ति संभव है। लेकिन बिक्री बिल, वाहन की आवाजाही और खरीदार की प्राप्ति का मिलान होना चाहिए। कागज पर गंतव्य लिख देने से माल वहां पहुंचा मान लेना जांच नहीं है। इस पड़ताल में खरीदारवार वास्तविक प्राप्ति और अंतिम उपयोग का पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला है। उसकी अनुपलब्धता अपने आप गड़बड़ी साबित नहीं करती; संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन जरूरी बनाती है।
लगभग 1.91 लाख टन रिजेक्ट का अनुमान—वास्तविक उत्पादन सामने आए
पुराने परियोजना आवेदन में 9.60 लाख टन वार्षिक क्षमता पर लगभग 1.91 लाख टन रिजेक्ट उत्पन्न होने का अनुमान और बाहरी बिजली उत्पादकों को बिक्री की योजना है। उसी आवेदन में सूखी स्लाइम निकालकर धुले कोयले में मिलाने का विवरण दर्ज है। ये प्रस्तावित आंकड़े और व्यवस्थाएं हैं, वास्तविक उत्पादन का प्रमाण नहीं। अब मासिक उत्पादन और भौतिक स्टॉक का हिसाब चाहिए। कितना कच्चा कोयला आया, कितना तैयार उत्पाद निकला, कितना रिजेक्ट बेचा और कितना परिसर में बचा? स्लाइम तथा फाइन्स का अलग लेखा भी जांचा जाए। यदि सामग्री तैयार उत्पाद में वापस मिलाई गई, तो उसकी मात्रा और गुणवत्ता का रिकॉर्ड सामने आए। यह मिलान एक समान नमी आधार पर विशेषज्ञों से कराया जाना चाहिए, ताकि मापन के अंतर और संभावित हेराफेरी में स्पष्ट फर्क हो। जिस माल को स्टॉक में बताया गया, वह मौके पर मिलना चाहिए। जिसे बाहर भेजा बताया गया, उसकी प्राप्ति दूसरी तरफ दर्ज होनी चाहिए।
रोजाना 3.50 लाख लीटर की सीमा—मीटर क्या बताते हैं?
मार्च 2024 की संचालन सहमति के उपलब्ध सरकारी पाठ में जल खपत अधिकतम 350 घनमीटर, अर्थात 3.50 लाख लीटर प्रतिदिन, निर्धारित है। इसमें प्रक्रिया के लिए 300, घरेलू उपयोग के लिए 30 और धूल नियंत्रण के लिए 20 घनमीटर शामिल हैं। स्रोत भूजल बताया गया है; डिजिटल जलमीटर और CGWA अनुमति की शर्तों का पालन अपेक्षित है। बोरवेल कितने हैं? वर्तमान भूजल अनुमति क्या है? दैनिक निकासी का प्रमाणित रिकॉर्ड कहां है? भूजल किसी कारोबारी की निजी संपत्ति नहीं है। अनुमति, मीटर और वास्तविक उत्पादन का संयुक्त सत्यापन होना चाहिए। इस पड़ताल में निर्धारित सीमा से अधिक दोहन का प्रमाण नहीं मिला है; इसकी पुष्टि या खंडन वास्तविक रिकॉर्ड से होगा।
विभाग ने व्यवस्था उपलब्ध बताई—निरीक्षण का आधार भी सामने आए
नवंबर 2024 के पत्र में क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा उपचार और वायु प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था उपलब्ध होने की सूचना तथा नवीनीकरण की सिफारिश दर्ज है। सहमति 28 फरवरी 2025 तक बढ़ाई गई थी। थिकनर, सेडिमेंटेशन तालाब, बेल्ट/फिल्टर प्रेस, घरेलू अपशिष्ट उपचार और रिसाव रोकने की शर्तें भी शामिल हैं। उपकरण स्थापित होना और उनका नियमित संचालन होना अलग तथ्य हैं। निरीक्षण रिपोर्ट, पानी के नमूने, संचालन लॉग और उपकरण खराब होने के समय की व्यवस्था से ही पालन की वास्तविक स्थिति पता चलेगी। इसके बाद की संचालन सहमति इस खोज में नहीं मिली। इससे वर्तमान अवैध संचालन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अलग सरकारी रिकॉर्ड में पुरानी पर्यावरणीय स्वीकृति की वैधता 21 जनवरी 2028 तक बताई गई है। पर्यावरणीय स्वीकृति और संचालन सहमति की वर्तमान स्थिति अलग-अलग सत्यापित करनी होगी।
आंकड़ों में असंगति—मूल परीक्षण रिपोर्ट जरूरी
CECB वेबसाइट पर उपलब्ध ड्राफ्ट विस्तार सारांश में कच्चे कोयले की राख एक जगह 45%, दूसरी तालिका में 40% है। रिजेक्ट के दिए राख, फिक्स्ड कार्बन, वाष्पशील पदार्थ और नमी के अंक जोड़ने पर 113% आते हैं। परीक्षण आधार अथवा संभावित टंकण त्रुटि का स्पष्टीकरण जरूरी है। दस्तावेज उपज के आंकड़ों को अनुमानित भी बताता है। यह विसंगति भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है, लेकिन मूल रिपोर्ट और विशेषज्ञ सत्यापन मांगने का ठोस कारण है। तकनीकी आंकड़ों को बिना स्पष्टीकरण छोड़ देना जनहित के सवालों का जवाब नहीं होगा।
जांच वाशरी के गेट से खरीदार के परिसर तक पहुंचे
विश्वस्त सूत्र के आरोपों को परखने के लिए वर्तमान अनुमतियां, जलमीटर, उत्पादन, गुणवत्ता, भौतिक स्टॉक और बिक्री का संयुक्त मिलान आवश्यक है। डिजिटल तौल, CCTV तथा परिवहन अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं। प्राप्तकर्ता संयंत्रों की तौल और उपयोग का रिकॉर्ड भी जांच में शामिल हो।अच्छे कोयले को रिजेक्ट बताकर निकालने के आरोप की पुष्टि संबंधित खेप के स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण और दस्तावेजी मिलान से ही हो सकती है। वित्तीय अनियमितता के संकेत मिलने पर सक्षम एजेंसियां भुगतान और कर विवरण जांचें। जहां उल्लंघन साबित हो, वहां संचालक जवाब दे। जहां दर्ज उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई हो, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांची जाए। कोयला धुल सकता है, जवाबदेही नहीं। कंपनी अपने संचालन का प्रमाण दे और विभाग अपनी निगरानी का आधार सामने रखे। जनता को आश्वासन नहीं, सत्यापित हिसाब चाहिए।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की पड़ताल जारी है। जल्द बड़ा खुलासा—प्रमाणित दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के जवाब के साथ। बने रहें ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के साथ। कंपनी और संबंधित विभाग का प्राप्त जवाब इस मसौदे में शामिल नहीं है। प्रकाशन से पहले विशिष्ट प्रश्न भेजकर उनका पक्ष लिया जाना चाहिए। विश्वस्त सूत्र के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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