राज्य समाचार

कोयला धुल रहा है, निगरानी क्यों धुंधली? तीवरता वाशरी का हिसाब खोलिए, प्रशासन!

Spread the love

 

पानी कितना निकाला, रिजेक्ट किसे दिया, खेतों तक क्या पहुंचा और निरीक्षण में क्या देखा—लिम्हा वाशरी पर कंपनी से लेकर निगरानी विभागों तक सीधे सवाल

 

WhatsApp Group
Telegram Channel Join Now

 

विश्वस्त सूत्र का कथित सांठगांठ का आरोप; स्वतंत्र पुष्टि शेष। सरकारी शर्तों और वास्तविक संचालन का संयुक्त मिलान करे शासन—अनुमति की मुहर को जवाबदेही की ढाल न बनने दे।

 

बिलासपुर/बेलतरा।  अनुमति कंपनी के पास है। निगरानी का अधिकार विभाग के पास है। लेकिन पानी, धूल और खेतों की चिंता किसके हिस्से में है? लिम्हा की तीवरता वाशरी पर उठे सवालों का जवाब अब केवल अनुमति पत्र दिखाकर नहीं दिया जा सकता। कंपनी संचालन का हिसाब दे और प्रशासन अपनी निगरानी का प्रमाण।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की दस्तावेजी पड़ताल में जल खपत, उपचार, कोयला भंडारण, धूल नियंत्रण और परिवहन की स्पष्ट सरकारी शर्तें मिली हैं। सवाल इन्हीं शर्तों के पालन का है। सरकार ने जो जरूरी माना था, विभाग ने उसे मौके पर कितना जरूरी समझा?

विश्वस्त सूत्र ने वाशरी का दूषित पानी खेतों में पहुंचने, ग्रामीण विरोध और संबंधित तंत्र को कथित रूप से ‘मैनेज’ किए जाने की सूचना दी है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। किसी अधिकारी या कंपनी के बीच अनुचित लेन-देन का प्रमाण अभी प्राप्त नहीं हुआ है। लेकिन इस सूचना की निष्पक्ष जांच किए बिना सब कुछ ठीक मान लेने का आधार भी क्या है?

पानी निकालने की सीमा तय है—मीटर का हिसाब सार्वजनिक क्यों न हो?

मार्च 2024 की संचालन सहमति में अधिकतम 3.50 लाख लीटर प्रतिदिन जल खपत निर्धारित है। स्रोत भूजल है। डिजिटल मीटर, बंद जल-चक्र और भूजल अनुमति की शर्तों का पालन अपेक्षित है।

तीवरता प्रबंधन बताए—कितने बोरवेल चल रहे हैं?

कितने पानी की वर्तमान अनुमति है?

वास्तविक निकासी कितनी है?

संबंधित विभाग बताए कि उसने जलमीटर का रिकॉर्ड आखिरी बार कब जांचा। निकासी और उत्पादन का मिलान किया या अनुमति देखकर संतोष कर लिया?

धरती से निकाले गए पानी का प्रमाणित हिसाब सामने आए। कितना ताजा पानी लिया, कितना वापस प्रक्रिया में इस्तेमाल किया और कितना संग्रहण में बचा—इन आंकड़ों से ही पालन की सच्चाई खुलेगी।  खेतों में पानी पहुंचने की सूचना—कंपनी का दावा और किसानों की बात साथ जांचिए

नवंबर 2024 के सरकारी पत्र में थिकनर, पर्याप्त क्षमता के सेडिमेंटेशन तालाब, बेल्ट/फिल्टर प्रेस और रिसाव रोकने वाली लाइनिंग की शर्तें हैं।
यदि ये व्यवस्थाएं प्रभावी हैं तो खेतों में पानी पहुंचने की सूचना का स्रोत क्या है?

जिला प्रशासन शिकायत वाले खेतों का खसरा चिन्हित कराए। निकासी बिंदु से खेत तक बहाव का निरीक्षण हो। पानी और मिट्टी के नमूने लिए जाएं। घटना के दिन का संचालन, बारिश, उपकरणों की खराबी और ओवरफ्लो रिकॉर्ड मिलाया जाए।

न कंपनी का कथन अकेले अंतिम प्रमाण है, न आरोप। फैसला मौके के प्रमाण करेंगे। प्रशासन वह प्रमाण जुटाए। व्यवस्था उपलब्ध बताने वाले अधिकारी—अपनी जांच का आधार दिखाइए

नवंबर 2024 के पत्र में क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा उपचार और वायु प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था उपलब्ध होने की सूचना तथा नवीनीकरण की सिफारिश दर्ज है। उस सिफारिश की पूरी निरीक्षण रिपोर्ट और परीक्षण परिणाम इस पड़ताल में प्राप्त नहीं हुए हैं।

अब सवाल सीधे विभाग से है:

 

निरीक्षण किस दिन हुआ?
किन उपकरणों को चलते देखा गया?
पानी के नमूने कहां से लिए गए?
तालाबों की क्षमता और लाइनिंग कैसे परखी गई?
कोई कमी मिली तो कार्रवाई क्या हुई?

मशीन लगी होने का उल्लेख, मशीन प्रभावी ढंग से चलने का प्रमाण नहीं है। सिफारिश पर हस्ताक्षर हुए हैं तो उसके आधार की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।  यदि रिपोर्ट मजबूत है, उसे सामने रखिए। यदि जांच अधूरी थी, उसे पूरा कीजिए। जनता को निष्कर्ष के साथ उसका आधार चाहिए।रिजेक्ट कोयला किसे पहुंचा? नाम, मात्रा और प्राप्ति का प्रमाण दीजिए

वाशरी की सहमति में कोल रिजेक्ट, फाइन्स और स्लज को बिजली संयंत्र में ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की शर्त है। कोयला नियंत्रक संगठन के प्रकाशित प्रारूप में उत्पादन, निपटारे, भौतिक स्टॉक और प्राप्तकर्ता का विवरण दर्ज करने की व्यवस्था है।

कौन-सा बिजली संयंत्र? कितनी मात्रा? किस गुणवत्ता का माल? किस तारीख को प्राप्त हुआ?

यह सवाल व्यापारिक बयान से नहीं, रिकॉर्ड से हल होगा। शुरुआती स्टॉक, उत्पादन, प्रेषण और अंतिम स्टॉक का भौतिक मिलान हो। बिक्री बिल और संबंधित ई-वे बिल को वाहन, प्रेषण तौल तथा प्राप्तकर्ता की तौल से जोड़ा जाए।  वाशरी के गेट से निकला माल जांच में खरीदार के गेट तक पहुंचना चाहिए। बीच का रास्ता अनुमान के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

इस पड़ताल में किसी वास्तविक रिजेक्ट खरीदार या कोयला हेराफेरी की पुष्टि नहीं हुई है। गुणवत्ता बदलकर माल निकालने की आशंका को स्वतंत्र परीक्षण और खेपवार मिलान से परखा जाए।

हाईवे के पास कारोबार—जनता की सड़क का हिसाब भी दीजिए

गूगल मैप के निरीक्षण में वाशरी मुख्य सड़क और लिम्हा टोल प्लाजा के पास दिखती है। हाईवे के पास उद्योग होना अपने आप अवैध नहीं है। लेकिन औद्योगिक पहुंच के लिए लागू अनुमति, सर्विस रोड और स्वीकृत नक्शे का वास्तविक प्रवेश–निकास से मिलान जरूरी है।

प्रवेश NOC कहां है?

ट्रकों का रास्ता स्वीकृत नक्शे के मुताबिक है?

सड़क की पटरी, नाली और स्थानीय आवाजाही की सुरक्षा किसने जांची?

 

सरकारी सहमति में ट्रकों की पार्किंग परिसर के भीतर रखने और सार्वजनिक स्थान का उपयोग नहीं करने की शर्त है।  यदि सार्वजनिक सड़क पर कतार या पार्किंग मिलती है तो उसका समय, वाहन और तस्वीर दर्ज हो। नियम का उल्लंघन मिले तो कार्रवाई हो। कारोबार की सुविधा का बोझ सड़क पर चलने वाली जनता क्यों उठाए?

पांच मीटर दीवार की शर्त—मापने कौन जाएगा?

मार्च 2024 के पत्र में गांव, स्कूल और सड़क की ओर निर्धारित हिस्से में पांच मीटर दीवार, अन्य परिधि में तीन मीटर दीवार, हवा रोकने वाली स्क्रीन और रेन गन की शर्त है। कोयले के ढेर की अधिकतम ऊंचाई तीन मीटर निर्धारित है। यह जांच कठिन नहीं है। टीम मौके पर जाए, माप ले और तस्वीर सहित रिपोर्ट दे।  जिस शर्त को अनुमति में लिखना जरूरी था, उसके पालन को मापना भी जरूरी है। फाइल में लिखी ऊंचाई और मौके की ऊंचाई एक है या नहीं—जनता यह जानना चाहती है।

‘मैनेजमेंट’ के आरोप का उत्तर स्वतंत्र जांच से दीजिए

कथित सांठगांठ की सूचना गंभीर है। इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसे सिद्ध आरोप की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। लेकिन प्रशासन चाहे तो जांच को पारदर्शी बनाकर संदेह दूर कर सकता है।  शिकायत मिलने की तारीख, निरीक्षण, नोटिस, कंपनी का जवाब और कार्रवाई का क्रम सामने आए। जिन अधिकारियों ने व्यवस्था पर्याप्त बताई, उनकी रिपोर्ट भी जांची जाए। कंपनी की जवाबदेही पूछते समय निगरानी विभाग की जवाबदेही को बाहर क्यों रखा जाए?

शासन बताए—संयुक्त जांच कब?

उपलब्ध नवंबर 2024 के पत्र में संचालन सहमति 28 फरवरी 2025 तक बढ़ाई गई थी। उसके बाद की वर्तमान सहमति इस पड़ताल में सत्यापित नहीं हुई है। इससे अवैध संचालन का निष्कर्ष नहीं निकलता; वर्तमान अनुमति सामने रखने का प्रश्न जरूर उठता है।   जिला प्रशासन, CECB, भूजल प्राधिकरण, कोयला नियंत्रक संगठन, NHAI और राजस्व विभाग संयुक्त जांच करें। किसानों की शिकायतों को रिकॉर्ड में लें। जलमीटर, संचालन, स्टॉक, तौल और परिवहन अभिलेख सुरक्षित कर उनका मिलान करें।   जहां उल्लंघन साबित हो, कंपनी पर नियमानुसार कार्रवाई हो। जहां दर्ज शिकायत या कमी के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई हो, जिम्मेदार अधिकारी भी जवाब दें।

ग्राम यात्रा की मांग स्पष्ट है: अनुमति का दावा करने वाला पक्ष पालन का प्रमाण दे; निगरानी का दावा करने वाला विभाग निरीक्षण का प्रमाण दे।  जल्द अगली दस्तावेजी रिपोर्ट—पानी से रिजेक्ट तक, अनुमति से निरीक्षण तक। दस्तावेज संकलन और सत्यापन जारी है। अगली रिपोर्ट में प्राप्त प्रमाणों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर नए तथ्य सामने रखे जाएंगे।  कोयले का कारोबार चलता है तो उसका लेखा भी खुले। सरकारी निगरानी होती है तो उसका प्रमाण भी दिखे। अब सवाल फाइलों से निकलकर जनता के सामने हैं।

 

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button