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कुमारी शैलजा एवं जिला प्रभारी मंत्री शिव डहरिया के कोरबा प्रवास पर कांग्रेसी पार्षदों ने की पुलिस प्रशासन की शिकायत,, बात नहीं मानने पर सामूहिक इस्तीफा देने की दी धमकी,, दबाव या साजिश,, आखिर इसके पीछे किसका षड्यंत्र???

कोरबा: राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल का क्या उनके गृह जिले में कद कम हो रहा है???? क्या प्रशासनिक अफसर राजस्व मंत्री को हल्के में ले रहे??? क्या कारण है कि जिले में पदस्थ किसी भी उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से इनकी नहीं जमती क्यों कोरबा के कांग्रेसी नेताओं द्वारा समय समय पर जिला प्रशासन पर इस तरह का आरोप लगता रहा है यहां के कुछ कांग्रेसी नेताओं को हमेशा से जिला प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफत करते रहे हैं ,,, सूत्रों द्वारा कहा तो ये जाता है कि इसके पीछे कोरबा जिले का (डी एम एफ मद ) के कार्य है जो इन नेताओं के हिसाब से नहीं होने पर इनका हिसाब – किताब इस अधिकारियों से बिगड़ जाता है और शुरू होता है शिकवे शिकायत का दौर ,,, खैर तरह के तमाम सवाल उस दृश्य को लेकर उठ रहे हैं जिसमें कांग्रेस के ही 27 पार्षद प्रवास पर रहे प्रभारी मंत्री शिव डहरिया और छत्तीसगढ़ प्रभारी कुमारी शैलजा से लिखित शिकायत कर पार्षद अमरजीत सिंह के खिलाफ पुलिस पर देशपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगा रहे थे।

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मामला में सच्चाई जो भी हो दोषी जो भी हो ना हो पर सवाल अभी भी यह है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है और शहर विधायक उस सरकार में कैबिनेट मंत्री है फिर यह नहीं पचता की ज़िले में पदस्थ अधिकारियों द्वारा कांग्रेसी नेताओं को बेवजह फंसा रही है प्रताड़ित कर रही है अगर यह शिकायत विपक्षी दलों और उनके नेताओं द्वारा लगाई जाती तो उसमें सत्ता और ताकत की बात समझ आती,, पर कांग्रेस की सरकार और कांग्रेसी नेताओं द्वारा अपने ही सरकार के अधिकारियों पर इस तरह का आरोप ,, इससे तो यह प्रतीत होता है कि कुछ कांग्रेसी नेताओं द्वारा अपने ही सरकार की छवि धूमिल करने का षणयंत्र रचा जा रहा है जिससे छत्तीसगढ़ में पार्टी बदनाम हो और दबाव में आकर इनके हिसाब से काम करें,, इसी तरह से कटघोरा विधायक के खिलाफ भी कुछ नेताओं के द्वारा विरोध प्रकट किया गया।

विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ ही राजनैतिक दल की सक्रियता काफी बढ़ गई है सभी राजनीतिक दल अपनी जमीन को मजबूत करने विभिन्न क्षेत्रों के प्रवास पर थे इसी कड़ी में कोरबा जिले के प्रवास पर कैबिनेट मंत्री शिव डहरिया और कुमारी शैलजा थी।
यहां सोचनीय विषय है कि क्या राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के गृह जिले में हैं उनकी नहीं चलती। क्योंकि पार्षद अमरजीत सिंह मंत्री के नवरत्नों में शामिल है । कई मौकों पर यह बात स्पष्ट हो चुका है कि पार्षद अमरजीत सिंह उनके बेहद करीबी हैं । इसके बाद भी अमरजीत सिंह मामले के लिए दूसरे मंत्री के पास गुहार लगाना कई सवालों को जन्म देता है।

उक्त घटनाक्रम से केवल यही साबित होता है कि कांग्रेसी अपने ही सरकार पर दबाव बनाने की मंशा से सामूहिक इस्तीफा देने की बात कह रहे थे। सूत्रों का दावा भी कुछ ऐसा ही है। आपको बताते चलें कि कटघोरा विधायक पुरुषोत्तम कवर को लेकर भी कुमारी शैलजा के समक्ष शिकायत की गई है। पुरुषोत्तम कंवर छत्तीसगढ़ के गांधी कहे जाने वाले बोधराम कंवर के पुत्र है, बोधराम कंवर स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर पर एक अलग पहचान रखते हैं। बोधराम कंवर ही है, जिन्होंने कटघोरा क्षेत्र में कांग्रेस को नहीं ऊर्जा प्रदान की थी। लेकिन केवल एक समाज विशेष से ताल्लुक रखने के कारण उनके ऊपर आरोप मढ़े जा रहे हैं। उनके दोबारा जीतने से किसे सब से ज्यादा डर है ,, यह प्रश्न भी इस घटनाक्रम से उठता है।एक विशेष समुदाय से होने के कारण क्या इनका टिकट नहीं मिलना चाहिए?? पुरा कोरबा जिला आदिवासी समुदाय से भरा पुरा है ऐसे में सिर्फ पुरुषोत्तम कवंर का विरोध कहा तक उचित है।

कटघोरा विधायक पुरुषोत्तम कंवर सरल व सहज स्वभाव के धनी है। क्षेत्र में उनकी जमीनी स्तर पर काफी पकड़ है। सूत्र बताते हैं कि कुछ लोगों के द्वारा उनके खिलाफ जानबूझकर षड्यंत्र रचा जा रहा है। यह भी जानकारी मिली है कि पुरुषोत्तम कंवर के खिलाफ की गई शिकायत के पीछे शहर के दिग्गज नेताओं का हाथ है । अब आप समझ सकते हैं कि पुरुषोत्तम कवर के चुनाव जीतने से सबसे ज्यादा नुकसान किस को होगा।

चुनाव के नजदीक आने के साथ ही सियासी उठा पटक शुरू जाती है । उपेक्षा की आड़ लेकर नेता पार्टी बदल लेते हैं । लेकिन सालों तक जिस थाली में खाया उसी में छेद करना सरासर बेईमानी को साबित करता है। सरकार के कुछ दिग्गज ही प्रदेश सरकार की छवि को घुमिल करने के प्रयास में लगे हुए हैं।। चुनाव से पूर्व इस तरह का माहौल निर्मित करना यही साबित करता है। बहरहाल कुमारी शैलजा का कोरबा प्रवास सुर्खियों में रहा। कुछ लोगों ने उपेक्षा का आरोप लगाया , कुछ नेताओं की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि स्थानीय नेताओं ने उन्हें इस तरह से घेर रखा था कि उनकी मुलाकात ही नहीं हो सकी ।

 

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