ग्राम यात्रा की लगातार खबरों के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी : जमीन SECL की, सौदा किस अधिकार से? कुसमुंडा पेट्रोल पंप को दूसरा नोटिस, अब बेदखली पर जवाब तलब

मजुमदार से तीवरता ग्रुप को कथित बिक्री पर उठे गंभीर सवाल; निरीक्षण रिपोर्ट में लीज समाप्त होने का उल्लेख—संचालन और कथित हस्तांतरण का दस्तावेजी आधार सामने लाएं संबंधित पक्ष
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क पेट्रोल पंप का सौदा हो जाने से क्या उसके नीचे की एसईसीएल की जमीन भी निजी संपत्ति बन जाती है? लीज समाप्त होने के बाद संचालन किस अधिकार से जारी रहा? और कथित खरीदार को आखिर किस अधिकार का हस्तांतरण किया गया? कुसमुंडा के कोरबा सर्विस स्टेशन मामले में सामने आए दूसरे नोटिस ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क द्वारा पेट्रोल पंप की जमीन, लीज और कथित खरीद-बिक्री पर लगातार सवाल उठाए जाने के बीच एसईसीएल कुसमुंडा के संपदा अधिकारी ने दूसरा नोटिस जारी कर पूछा है कि परिसर से बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए।
अब संबंधित पक्षों के सामने सीधा सवाल है—कब्जे और संचालन का वैध अधिकार है, तो उसका दस्तावेज कहां है?
दूसरा नोटिस: जवाब दीजिए, अन्यथा एकपक्षीय निपटारा
उपलब्ध दस्तावेजों में पहला नोटिस क्रमांक 708, दिनांक 13 अक्टूबर 2026 का है। इसके बाद 22 अक्टूबर 2026 को क्रमांक 741 का ‘द्वितीय नोटिस’ जारी किया गया। दूसरे नोटिस में संबंधित परिसर पर अनधिकृत कब्जे का आधार बताते हुए बेदखली के प्रस्ताव पर जवाब मांगा गया है। संचालक को 28 अक्टूबर 2026, सुबह 11 बजे संपदा अधिकारी कार्यालय में स्वयं अथवा अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष और प्रमाण प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। नोटिस की चेतावनी स्पष्ट है—निर्धारित तारीख और समय पर उपस्थित नहीं होने पर प्रकरण का एकपक्षीय निपटारा किया जाएगा। हालांकि, यह अभी कारण बताओ नोटिस है। उपलब्ध दस्तावेजों में अंतिम बेदखली आदेश शामिल नहीं है।
निरीक्षण रिपोर्ट का अहम बिंदु—लीज की अवधि समाप्त
13 अक्टूबर की निरीक्षण रिपोर्ट में वैशाली नगर मुख्य मार्ग पर कोरबा सर्विस स्टेशन के नाम से पेट्रोल पंप संचालित मिलने का उल्लेख है। रिपोर्ट में लीज की अवधि समाप्त होने की बात लिखते हुए विभागीय कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। यहीं से जवाबदेही का असली प्रश्न खड़ा होता है। जब निरीक्षण रिपोर्ट लीज समाप्त होने की बात कह रही है, तो आगे संचालन का आधार क्या था? नवीनीकरण हुआ था? कोई अन्य वैध अनुमति थी? यदि थी, तो उसे सामने रखने में देरी क्यों? इन सवालों का जवाब किसी मौखिक दावे से नहीं, संबंधित आदेश और अनुमति से मिलेगा।
मजुमदार–तीवरता कथित सौदा: खरीदा क्या गया, बेचा क्या गया?
पूर्व रिपोर्टिंग और प्राप्त दावों में मजुमदार से जुड़े पेट्रोल पंप का तीवरता ग्रुप को कथित रूप से बेचे जाने का मामला उठाया गया था। दूसरे नोटिस के बाद उस कथित सौदे की शर्तों पर स्पष्टता और जरूरी हो गई है। क्या सौदा केवल कारोबार और उपकरणों का था? क्या डीलरशिप से जुड़े हित शामिल थे? या जमीन पर अधिकार का दावा भी सौदे का हिस्सा बनाया गया? संबंधित पक्षों ने एसईसीएल से क्या अनुमति ली? इन सवालों का जवाब बिक्री अथवा हस्तांतरण के वास्तविक दस्तावेजों से ही मिलेगा। उपलब्ध नोटिस कथित सौदे की पुष्टि नहीं करते और तीवरता ग्रुप के विरुद्ध कोई निष्कर्ष भी दर्ज नहीं करते। लेकिन जिस परिसर को लेकर बेदखली का नोटिस जारी हुआ है, उससे जुड़े कथित लेन-देन का आधार सार्वजनिक जवाबदेही का विषय अवश्य है।
सुनवाई की तारीख बीती—अब फाइल में क्या हुआ?
28 अक्टूबर की निर्धारित तारीख बीत चुकी है। अब एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन से स्पष्ट जानकारी अपेक्षित है—क्या संबंधित पक्ष उपस्थित हुआ? क्या जवाब दाखिल किया गया? कौन-से प्रमाण प्रस्तुत किए गए और आगे क्या आदेश हुआ? दूसरा नोटिस जारी होने के बाद कार्रवाई किस चरण में है, यह बताना भी उतना ही जरूरी है जितना नोटिस जारी करना। उपलब्ध सामग्री में सुनवाई के बाद की कार्यवाही का विवरण नहीं है। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस मामले को लगातार उठाता रहा है। अब उसी विषय पर दूसरा नोटिस सामने आया है; हालांकि नोटिस में समाचारों को कार्रवाई का कारण नहीं बताया गया है।
इस पूरे मामले का केंद्रीय सवाल सीधा है—एसईसीएल की जमीन पर संचालन और कथित सौदे का अधिकार किस दस्तावेज से मिला? प्रबंधन कार्रवाई का अगला चरण स्पष्ट करे और संबंधित पक्ष अपने अधिकार का प्रमाण सामने रखें। सार्वजनिक संपत्ति के मामले में जवाब भी दस्तावेजों के साथ चाहिए।
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