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SECL ने लीज ठुकराई, जमीन खाली करने का आदेश दिया—फिर किसके संरक्षण में धधक रहा पेट्रोल पंप?

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₹2.5 करोड़ में कथित सौदे की चर्चा; IOCL रिकॉर्ड में नाम बदलने का दावा—लेकिन जमीन आज भी SECL की, नई लीज नदारद!

 

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किराया तक लौटाने का आदेश, फिर भी कारोबार जारी—वैध लीज, NOC या कोर्ट का स्थगन है तो सामने लाएं संचालक, IOCL और SECL

 

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क जमीन SECL की। भवन पर अधिकार SECL का। मूल लीजधारक का निधन हो चुका। नई लीज का आवेदन खारिज। जमीन खाली करने का लिखित आदेश जारी। बाद में जमा किराया तक लौटाने का निर्णय—फिर भी उसी जमीन पर पेट्रोल पंप संचालित! कुसमुंडा स्थित मेसर्स कोरबा सर्विस स्टेशन का मामला अब साधारण लीज विवाद नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की जमीन पर कथित अनधिकृत व्यावसायिक संचालन, पेट्रोल पंप के संदिग्ध हस्तांतरण और जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी का गंभीर मामला बन गया है। सूत्रों का सनसनीखेज दावा है कि इस पेट्रोल पंप का कथित तौर पर लगभग ₹2.5 करोड़ में सौदा किया गया। यह भी दावा किया जा रहा है कि Indian Oil Corporation Limited—IOCL के रिकॉर्ड में देबजानी मजूमदार के बाद किसी “दुलानी” नामक व्यक्ति का नाम दर्ज अथवा जोड़ दिया गया है।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क स्वतंत्र रूप से अभी ₹2.5 करोड़ के भुगतान और कथित नए व्यक्ति के नामांतरण की पुष्टि नहीं करता। लेकिन यदि यह सूचना सही है, तो सबसे विस्फोटक सवाल यही है—जिस जमीन की लीज ही नहीं मिली, उस जमीन पर खड़े पेट्रोल पंप का ₹2.5 करोड़ में सौदा आखिर किस अधिकार से किया गया?

 

SECL का पहला प्रहार: 30 दिनों में जमीन खाली करो SECL कुसमुंडा क्षेत्र के कार्मिक विभाग ने पत्र क्रमांक SECL/KSM/G.M./Per./2024/46, दिनांक 03 सितंबर 2024 से कोरबा सर्विस स्टेशन को स्पष्ट निर्देश दिया था कि पेट्रोल पंप वाली भूमि और भवन को 30 दिनों के भीतर खाली कर कब्जा SECL प्रबंधन को सौंपा जाए।

पत्र में SECL ने दर्ज किया कि:

मूल अनुबंध शांति पटेल के साथ 27 मार्च 1991 को हुआ था।
– अनुबंध प्रारंभिक रूप से भवन पूर्ण होने से तीन वर्ष के लिए था।
– मूल प्रोपराइटर शांति पटेल का निधन 21 अगस्त 2021 को हो चुका था।
– देबजानी मजूमदार ने 28 मई 2024 को अनुबंध नवीनीकरण का आवेदन दिया था।
– SECL को यह भूमि विस्थापितों की बसाहट और उससे जुड़ी सुविधाओं के लिए चाहिए।
– इसलिए नया अनुबंध अथवा लीज प्रदान नहीं किया जा सकता।

इतना स्पष्ट आदेश जारी होने के बाद भी पेट्रोल पंप की मशीनें कैसे चलती रहीं? जमीन खाली कराने की फाइल किस मेज पर जाकर सो गई? आदेश जारी करने वाले SECL ने उसका पालन क्यों नहीं कराया?

दूसरा पत्र और भी घातक: कब्जा नहीं दिया, किराया भी वापस लो!

मामले का सबसे गंभीर दस्तावेज SECL का 27 जनवरी 2025 का पत्र क्रमांक SECL/KSM/G.M./Per./2025/5601 है। इस पत्र में SECL ने स्वयं स्वीकार किया कि 3 सितंबर 2024 के आदेश के बावजूद भूमि खाली कर कब्जा नहीं सौंपा गया। इसके बाद भी किराया जमा किया जाता रहा, जिसे SECL ने उचित नहीं माना। SECL ने देबजानी मजूमदार से बैंक खाता विवरण मांगा, ताकि जमा किराया वापस किया जा सके।

इसका सीधा अर्थ है—SECL ने न केवल नई लीज से इनकार किया, बल्कि बाद का किराया स्वीकार कर किरायेदारी जारी रखने से भी हाथ खींच लिया।

जब मालिक किराया लेने से मना कर रहा है, जमीन खाली करने का आदेश दे चुका है और नया अनुबंध देने से साफ इनकार कर चुका है, तब वहां चल रहा करोड़ों का पेट्रोल कारोबार किस कानूनी छतरी के नीचे है?
दुकान का नाम बदल गया तो क्या जमीन भी बदल गई?

दस्तावेज बताते हैं कि मूल पेट्रोल पंप शांति पटेल के नाम था। उनकी मृत्यु के बाद देबजानी मजूमदार ने स्वयं को पुत्रवधू बताते हुए नया SECL अनुबंध मांगा।

वर्ष 2024 के दस्तावेजों में:

– कोरबा सर्विस स्टेशन देबजानी मजूमदार के नाम से दर्ज है।
– GSTIN 22BHGPS9547C1Z8 है।
– PAN BHGPS9547C है।
– SECL Vendor Code 10105790 दर्ज है।

लेकिन GST पंजीयन, vendor code अथवा IOCL dealership का नाम बदल जाने से SECL की जमीन का मालिकाना या लीज अधिकार नहीं बदल जाता। कारोबार बेचा जा सकता है, लेकिन किसी दूसरे की जमीन जेब में रखकर नहीं बेची जा सकती!

यदि IOCL ने dealership का पुनर्गठन या नामांतरण किया, तो उसने वैध land document कौन-सा देखा? क्या SECL की नई NOC ली गई? क्या 3 सितंबर 2024 का खाली करने वाला आदेश IOCL से छिपाया गया? या आदेश की जानकारी होने के बावजूद नामांतरण का खेल आगे बढ़ा?
99 वर्ष की कथित लीज या केवल तीन वर्ष का अनुबंध?

मामले में एक और दस्तावेजी बारूद दबा हुआ है। प्रस्तुत पुरानी लीज की एक प्रति में “99 years” लिखा दिखाई देता है। दूसरी ओर SECL के 2024 और 2025 के आधिकारिक पत्र मूल अनुबंध को प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष का बताते हैं।

सवाल जहरीला है और जवाब जरूरी:

99 वर्ष वाली प्रति कहां से आई?
– क्या यह SECL के मूल रिकॉर्ड से प्रमाणित है?
– लीज की धारा 14 की पूरी प्रति कहां है?
– क्या 99 वर्ष का उल्लेख मूल अनुबंध में था या किसी प्रति में बाद में जोड़ा गया?
– क्या इसी विवादित दस्तावेज के आधार पर IOCL में नामांतरण कराया गया?
– SECL ने मूल लीज की फॉरेंसिक अथवा विभागीय जांच क्यों नहीं कराई?

अभी उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति को कूटरचना का दोषी घोषित नहीं किया जा सकता। लेकिन 99 वर्ष और तीन वर्ष की दो परस्पर विरोधी अवधियां दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह अवश्य खड़ा करती हैं। ₹11.07 लाख का बकाया, लेकिन भुगतान केवल ₹5.32 लाख?

SECL के 4 जुलाई 2023 के मांग पत्र में:

नवंबर 2003 तक बिजली बकाया: ₹4,83,159

– दिसंबर 2003 से जून 2023 तक भूमि/भवन किराया: ₹6,23,968

– कुल बकाया: ₹11,07,127 इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड में ₹5,32,414 का भुगतान दिखाई देता है।

दोनों के बीच का अंतर:

«₹11,07,127 – ₹5,32,414 = ₹5,74,713»

यह शेष राशि कब जमा हुई? क्या इसे माफ किया गया? किस सक्षम अधिकारी ने समायोजन किया? संशोधित मांग पत्र कहां है?

₹11.07 लाख की मांग अचानक ₹5.32 लाख के भुगतान में कैसे समा गई—यह गणित SECL को सार्वजनिक करना चाहिए। ₹5.32 लाख का चेक भी किसी और के खाते से!

₹5,32,414 का चेक “Md. Aziz Memon” के नाम वाले खाते से जारी दिखाई देता है। जबकि भुगतान को कोरबा सर्विस स्टेशन और देबजानी मजूमदार के बकाया से जोड़ा गया।

सवाल है:

मोहम्मद अजीज मेमन का इस पेट्रोल पंप से क्या संबंध है?

– भुगतान तीसरे व्यक्ति के खाते से क्यों हुआ?

– क्या वह खरीदार, निवेशक, साझेदार अथवा मध्यस्थ था?

– क्या SECL ने भुगतान स्वीकार करने से पहले स्रोत और कारोबारी संबंध की जांच की?

भवन पर भी निजी मालिकाना दावा संदिग्ध पुराने अनुबंध की शर्तों के अनुसार पेट्रोल पंप के लिए निर्मित भवन का निर्माण पूरा होते ही उसका स्वामित्व SECL में निहित होना था।

यदि यह शर्त लागू है, तो कथित ₹2.5 करोड़ के सौदे में बेचा क्या गया?
– IOCL dealership?
– पेट्रोल पंप की मशीनरी?
– goodwill?
– कारोबार का संचालन अधिकार?
– या SECL की जमीन और भवन को भी निजी संपत्ति बताकर कीमत वसूली गई?

यदि SECL की जमीन और SECL के भवन को सौदे का हिस्सा दिखाया गया, तो मामला केवल लीज विवाद नहीं रहेगा। यह कथित धोखाधड़ी, तथ्य छिपाने और बिना अधिकार संपत्ति हस्तांतरण की जांच का विषय बन सकता है। पंप आज भी सक्रिय—SECL की चुप्पी किसके लिए? Indian Oil की आधिकारिक वेबसाइट पर कोरबा सर्विस स्टेशन, गेवरारोड कुसमुंडा वर्तमान में सूचीबद्ध है और 24 घंटे खुला बताया गया है।

यदि पंप वास्तव में संचालित हो रहा है तो स्थिति गंभीर है:

SECL का खाली कराने का आदेश लागू है।
– नया अनुबंध अस्वीकार हो चुका है।
– बाद का किराया लौटाने का निर्णय हो चुका है।
– कब्जा नहीं सौंपे जाने का उल्लेख स्वयं SECL ने किया है।
– इसके बावजूद ज्वलनशील पेट्रोलियम पदार्थ का कारोबार जारी बताया जा रहा है।

तो क्या SECL का आदेश केवल कागज पर दहाड़ने के लिए था? या फिर फाइल के नीचे किसी प्रभावशाली हाथ ने ऐसा वजन रख दिया कि बेदखली की पूरी कार्रवाई दब गई?

IOCL से सीधे सवाल

1. वर्तमान में कोरबा सर्विस स्टेशन का अधिकृत dealer/proprietor कौन है?

2. देबजानी मजूमदार के बाद किसी “दुलानी” अथवा अन्य व्यक्ति का नाम जोड़ा गया है या नहीं?

3. नामांतरण/reconstitution की प्रभावी तारीख क्या है?

4. नए व्यक्ति ने land document के रूप में कौन-सी लीज प्रस्तुत की?

5. क्या IOCL को SECL के 03.09.2024 और 27.01.2025 के पत्रों की जानकारी थी?

6. क्या IOCL ने SECL से स्वतंत्र NOC अथवा land validity confirmation लिया?

7. जमीन खाली करने के आदेश के बावजूद पेट्रोल की आपूर्ति क्यों जारी है?

8. क्या IOCL ₹2.5 करोड़ के कथित निजी सौदे की जांच करेगा?

SECL से सीधे सवाल

1. 30 दिनों में जमीन खाली कराने का आदेश लागू क्यों नहीं हुआ?

2. जनवरी 2025 के बाद कब्जा लेने के लिए क्या कार्रवाई की गई?

3. आज पेट्रोल पंप किस वैध अनुबंध के तहत संचालित है?

4. 99 वर्ष वाली कथित लीज SECL के मूल रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं?

5. तीन वर्ष और 99 वर्ष के विरोधाभास की जांच किस अधिकारी ने की?

6. क्या किसी दस्तावेज में कूटरचना की आशंका पाई गई?

7. जमा किराया वास्तव में वापस किया गया या नहीं?

8. ₹11,07,127 के बकाये में से शेष ₹5,74,713 का क्या हुआ?

9. क्या किसी अधिकारी ने बेदखली कार्रवाई रोकने का मौखिक अथवा लिखित आदेश दिया?

10. SECL की संपत्ति पर बिना प्रभावी लीज कारोबार चलता रहा तो जवाबदेही किसकी होगी?

संचालक से सवाल

₹2.5 करोड़ के कथित सौदे में सत्यता कितनी है?
– कारोबार किसे और किस तारीख को हस्तांतरित किया गया?
– वर्तमान वैध SECL लीज कहां है?
– क्या कोई न्यायालयीन स्थगन आदेश प्राप्त है?
– यदि सब कुछ वैध है तो लीज, NOC और IOCL नामांतरण आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?

दस्तावेज सामने रखिए—वरना सवाल और जहरीले होंगे!

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क किसी निष्कर्ष को छिपाना नहीं चाहता और किसी पक्ष को बिना अवसर दोषी भी घोषित नहीं करता। संचालक, IOCL और SECL के पास यदि कोई बाद की वैध लीज, NOC, न्यायालयीन स्थगन आदेश अथवा नया अनुबंध है तो उसकी प्रति सार्वजनिक करें। लेकिन जब तक ऐसा दस्तावेज सामने नहीं आता, उपलब्ध रिकॉर्ड एक ही तीखा प्रश्न उछालता रहेगा:

«SECL ने लीज ठुकरा दी, जमीन खाली करने का आदेश दे दिया, किराया लौटाने तक की प्रक्रिया शुरू कर दी—फिर SECL की जमीन पर यह पेट्रोल पंप आखिर किसके आदेश, किसके संरक्षण और किस कानून से चल रहा है?»

यह केवल एक पेट्रोल पंप का मामला नहीं। यह सरकारी कंपनी की संपत्ति, करोड़ों के कथित निजी सौदे, विवादित लीज और सार्वजनिक जवाबदेही की अग्निपरीक्षा है। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस प्रकरण के दस्तावेजी सच, कथित ₹2.5 करोड़ के सौदे और IOCL में हुए संभावित नामांतरण की अगली कड़ी जल्द प्रकाशित करेगा।

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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