हाईकोर्ट ने कहा—कानून से फैसला करो; निगम ने ₹12 लाख की पेनाल्टी छिड़की और ‘FAR Limit Exceed’ भवन को पवित्र कर दिया!

HIG-30 में नियमों की शवयात्रा? दो बार भवन अधिकारी ने लिखा—FAR सीमा से अधिक, नक्शा गलत; तीसरी बार आयुक्त की कलम चली और वही फाइल ‘Approved’!
252 वर्गमीटर के प्लॉट पर 1,248.69 वर्गमीटर निर्माण, 91.98% कवरेज, चारों तरफ setback शून्य—यह भवन अनुज्ञा है या नगर निगम के दस्तावेजों में दर्ज प्रशासनिक चमत्कार?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर पालिक निगम कोरबा में भवन निर्माण के नियम शायद अब किताबों में ही सुरक्षित हैं। जमीन पर नियम कितने लागू होंगे, यह नक्शे से कम और फाइल की “पहुंच” से अधिक तय होता दिखाई दे रहा है। पंडित रविशंकर शुक्ल नगर के मुख्य मार्ग पर स्थित HIG-30 की बहुमंजिला इमारत से संबंधित प्रस्ताव क्रमांक 2863 की ऑनलाइन फाइल खोलते ही नगर निगम की भवन अनुमति व्यवस्था का ऐसा चेहरा सामने आता है, जिसमें पहले नियम चीखते हैं, फिर अधिकारी आपत्ति लिखते हैं, उसके बाद भारी penalty जमा होती है और अंत में आयुक्त की मंजूरी सबको मौन करा देती है।
फाइल में दो बार लिखा गया—
«“FAR is More…”
“Ground Coverage and FAR is More…”
“Incorrect Drawing and FAR Limit Exceed…”»
लेकिन अंत में वही प्रस्ताव—
«“Approved!”»
वाह रे नगर निगम! पहले नियमों ने रोका, फिर पेनाल्टी ने धोया और आखिर में आयुक्त की कलम ने सब कुछ ‘वैध’ कर दिया? हाईकोर्ट के आदेश को ढाल मत बनाइए—न्यायालय ने भवन वैध नहीं किया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दर्ज Vikas Singh बनाम State of Chhattisgarh, WPC No.1087/2025, Neutral Citation 2025:CGHC:9889 में 27 फरवरी 2025 को न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु ने आदेश पारित किया था। याचिकाकर्ता ने केवल यह मांग की थी कि 4 जुलाई 2023 को प्रस्तुत उसके निर्माण नियमितीकरण आवेदन पर निर्णय लिया जाए।
हाईकोर्ट ने जिला नियमितीकरण प्राधिकारी से कहा—
«आवेदन पर कानून के अनुसार 30 दिनों के भीतर विचार कर निर्णय करें।»। बस इतना ही!
हाईकोर्ट ने:
– भवन को वैध घोषित नहीं किया,
– नियमितीकरण मंजूर नहीं किया,
– किसी नोटिस को रद्द नहीं किया,
– FAR की सीमा बढ़ाने का आदेश नहीं दिया,
– setback को शून्य करने की छूट नहीं दी,
– नगर निगम को आंख बंद करके अनुमति देने नहीं कहा।
फिर सवाल है—
क्या हाईकोर्ट के “कानून के अनुसार निर्णय” वाले आदेश को निगम ने “हर हाल में मंजूरी” का परवाना समझ लिया?
और सबसे बड़ा पेंच यह है कि हाईकोर्ट की संपूर्ण याचिका तथा Annexure P/4—दिनांक 4 जुलाई 2023 का नियमितीकरण आवेदन सार्वजनिक नहीं है। इसलिए अभी यह प्रमाणित ही नहीं कि हाईकोर्ट वाला आवेदन इसी HIG-30 का था या विकास सिंह की किसी दूसरी संपत्ति का।
यदि दोनों मामले अलग हैं तो HIG-30 की फाइल में हाईकोर्ट आदेश की छाया क्यों दिखाई जा रही है?
और यदि मामला यही है तो Annexure P/4 छिपा क्यों है?
निगम दस्तावेज खोले—हाईकोर्ट का नाम लेकर प्रशासनिक धुंध फैलाना बंद करे! नगर निगम की पहली चीख—नक्शा गलत, FAR सीमा से अधिक। प्रस्ताव क्रमांक 2863, प्रोजेक्ट कोड VISI-KMC-2025-0071 में मालिक के रूप में श्रीमती शांति सिंह, पत्नी ए.एन. सिंह एवं श्री विकाश सिंह, पुत्र ए.एन. सिंह का नाम दर्ज है।
पहली तकनीकी remark में उप अभियंता ने साफ लिखा: «“As Per Drawing Attached FAR is More.”»
इसके बाद भवन अधिकारी ने फाइल वापस करते हुए लिखा: «“Reassigned due to incorrect drawing and FAR limit exceed.”» यानी नक्शा गलत था और FAR सीमा से अधिक था।
यह किसी विरोधी दल का आरोप नहीं।
यह किसी शिकायतकर्ता की कल्पना नहीं।
यह नगर निगम के अपने भवन अधिकारी का ऑनलाइन लिखा हुआ सत्य है।
दूसरी जांच में भी वही बीमारी—Ground Coverage और FAR फिर अधिक
फाइल दोबारा चली। दूसरी remark में उप अभियंता ने लिखा: «“Ground Coverage and FAR is More.”»
भवन अधिकारी ने फिर लिखा: «“As Per Attached Drawing FAR is More than limit Exceed.”» अर्थात दूसरी बार भी नियमों ने फाइल का गला पकड़ लिया। लेकिन तीसरी बार फाइल ऊपर पहुंची और वही भवन अधिकारी “For Approval” लिखने लगा!
अब कोरबा की जनता जानना चाहती है—
बीच में नक्शे की सर्जरी हुई, नियमों का पोस्टमार्टम हुआ या अधिकारी की नजर का इलाज हुआ?
यदि संशोधित नक्शा नियमों के अनुरूप हो गया था तो उसकी तकनीकी तुलना कहां है?
कितना निर्माण घटाया गया?
कितना setback छोड़ा गया?
FAR सीमा में कैसे आया?
इन प्रश्नों का उत्तर सार्वजनिक रिकॉर्ड में नहीं दिखता, लेकिन “Approved” जरूर दिखाई देता है। 252 वर्गमीटर की जमीन और 1,248.69 वर्गमीटर का निर्माण—वाह निगम, वाह!
वेबसाइट पर उपलब्ध संशोधित नक्शे में:
– प्लॉट क्षेत्रफल—252 वर्गमीटर
– ग्राउंड फ्लोर—231.79 वर्गमीटर
– प्रथम तल—231.79 वर्गमीटर
– द्वितीय तल—231.79 वर्गमीटर
– तृतीय तल—231.79 वर्गमीटर
– चतुर्थ तल—242.51 वर्गमीटर
– पंचम तल—79.02 वर्गमीटर
– कुल निर्माण—1,248.69 वर्गमीटर
– प्लॉट कवरेज—91.98 प्रतिशत
– दर्शाया गया FAR—2.91
– भवन की ऊंचाई—18.15 मीटर
– सामने की सड़क—18 मीटर
यानी 252 वर्गमीटर के HIG प्लॉट पर ग्राउंड से पांचवीं मंजिल तक निर्माण! सामान्य नागरिक दो कमरे बढ़ा दे तो निगम का फीता उसकी दीवार पर चढ़ जाता है। यहां 1,248.69 वर्गमीटर का पहाड़ खड़ा हो गया और नियम शायद नीचे दबकर दम तोड़ते रहे।
चारों तरफ setback शून्य—क्या हवा भी पेनाल्टी देकर आएगी?
कंप्यूटर-जनित अनुज्ञा में:
– सामने का setback—0
– पीछे का setback—0
– Side-A—0
– Side-B—0। दर्ज दिखाई देता है। पांच मंजिला भवन और चारों तरफ setback शून्य!
तो क्या आग लगने पर दमकल हवा में उड़ेगी?
आपदा में बचाव दल छत से उतरेगा?
रोशनी, वेंटिलेशन और आपात मार्ग भी पेनाल्टी की रसीद देखकर रास्ता बना लेंगे?
नगर निगम बताए कि शून्य setback तकनीकी गलती है या “विशेष भवन नीति”।
क्या आम आदमी के लिए setback और खास फाइलों के लिए ‘सेटिंग-बैक’?
₹12,15,850 की पेनाल्टी—नियमों का जुर्माना या अवैधता का प्रवेश शुल्क?
नगर निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध भुगतान रसीद क्रमांक 100775, दिनांक 30 जून 2026, में दर्ज है:
– आवेदन शुल्क—₹60
– पोस्ट फीस—₹48,634
– रोड ब्लॉकेज शुल्क—₹21,000
– श्रम कल्याण शुल्क—₹1,61,142
– Penalty—₹12,15,850
– कुल भुगतान—₹14,46,686
सवाल यह नहीं कि पैसा जमा हुआ।
सवाल यह है कि बारह लाख से अधिक की penalty आखिर किस अपराध का मौन बयान है?
कितना निर्माण नियम-विरुद्ध था?
किस अवधि में बना?
निर्माण रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या नोटिस जारी हुआ?
क्या पंचनामा बना?
क्या स्थल निरीक्षण हुआ?
क्या penalty भरते ही FAR, setback, fire safety और structural safety की आत्मा शुद्ध हो गई?
यदि पैसा देकर हर उल्लंघन धुल सकता है तो भवन नियमावली को गंगाजल में विसर्जित क्यों नहीं कर दिया जाता?
तारीखों का खेल—अनुमति 2025 में, आवेदन 2026 में!
कंप्यूटर-जनित अनुज्ञा में:
– आवेदन दिनांक—08 अक्टूबर 2025
– अनुज्ञा दिनांक—08 अक्टूबर 2025
– वैधता—08 अक्टूबर 2027 तक दर्ज है।
लेकिन सार्वजनिक RTI रिकॉर्ड में इसी प्रस्ताव की प्रस्तुति तिथि 23 मई 2026 दिखाई देती है। उसी रिकॉर्ड में:
– 10 नवंबर 2025—Re-Assigned
– 31 जनवरी 2026—Re-Assigned
– 4 जून 2026—Approved
– 30 जून 2026—भारी penalty वाली रसीद दर्ज है। निगम की फाइल में समय भी शायद उल्टा चलता है!
आवेदन बाद में आया तो अनुमति पहले कैसे निकली?
यदि तारीख पोर्टल की गलती है तो डिजिटल रिकॉर्ड किसके भरोसे चल रहा है?
यदि 2025 में अनुमति जारी हो गई थी तो 2026 में फाइल पर मंजूरी का नाटक क्यों हुआ?
यदि 4 जून 2026 को अंतिम स्वीकृति हुई तो अक्टूबर 2025 का certificate किस आधार पर वेबसाइट पर मौजूद है?
और यदि अनुमति पहले ही वैध थी तो ₹12.15 लाख की penalty किस बात की?
आयुक्त की कलम का ‘अद्भुत उपचार’। अंतिम remark में उप अभियंता ने लिखा—For Approval। भवन अधिकारी ने लिखा—For Approval।
फिर आयुक्त कोरबा की टिप्पणी आई:
«“The order passed in Satish Nayak vs. State of Madhya Pradesh 2018(3) MPLJ 651 shall be complied with; furthermore, the fine approved on April 13, 2026 shall be recovered.”» और फाइल Approved! यानी दो बार FAR सीमा पार मिला, नक्शा गलत मिला, Ground Coverage अधिक मिला—लेकिन Satish Nayak फैसले का नाम आया, fine की बात आई और निगम की सारी आपत्तियों का अंतिम संस्कार हो गया!
नगर निगम बताए:
– Satish Nayak फैसला यहां कैसे लागू हुआ?
– किसने विधिक अभिमत दिया?
– 13 अप्रैल 2026 का fine order कहां है?
– fine की गणना किसने की?
– किस तकनीकी रिपोर्ट ने FAR को वैध घोषित किया?
– क्या आयुक्त की मंजूरी से भूमि विकास नियम स्वयं संशोधित हो जाते हैं?
क्या कानून की किताब पर आयुक्त की कलम रख देने से नियम छोटे हो जाते हैं?
अब केवल जवाब नहीं—पूरी फाइल चाहिए। नगर निगम को तत्काल सार्वजनिक करना चाहिए:
1. प्रस्ताव 2863 की संपूर्ण नोटशीट।
2. हाईकोर्ट याचिका और Annexure P/4।
3. 4 जुलाई 2023 का नियमितीकरण आवेदन।
4. जिला नियमितीकरण प्राधिकारी का अंतिम आदेश।
5. भवन अधिकारी की मूल तकनीकी रिपोर्ट।
6. 13 अप्रैल 2026 का fine approval order।
7. ₹12,15,850 penalty की calculation sheet।
8. आयुक्त का हस्ताक्षरित अनुमोदन।
9. मूल और संशोधित नक्शे की तुलना।
10. वास्तविक स्थल निरीक्षण एवं मापन।
11. Housing Board की NOC।
12. मूल आवंटन और lease conditions।
13. fire NOC तथा structural stability certificate।
14. lift permission और parking verification।
15. पोर्टल की digital audit trail।
नगर निगम में नियम नहीं मरते—उन्हें पेनाल्टी की रसीद देकर पुनर्जन्म दिया जाता है! पहली बार—FAR अधिक। दूसरी बार—Ground Coverage और FAR अधिक। भवन अधिकारी—नक्शा गलत, सीमा पार। फिर penalty—₹12.15 लाख। फिर Commissioner—Approved!
यह अनुमति प्रक्रिया है या नियमों की नीलामी?
यह नियमितीकरण है या अवैधता को सरकारी रसीद पहनाने का समारोह?
हाईकोर्ट ने कहा था—कानून के अनुसार निर्णय करो।
अब नगर निगम कोरबा बताए—
कानून का पालन हुआ या हाईकोर्ट के आदेश को ढाल बनाकर FAR, setback और तारीखों के सारे सवाल दफना दिए गए?
जब तक प्रस्ताव 2863 की पूरी फाइल सार्वजनिक नहीं होती, तब तक इस मंजूरी पर सवालों की बदबू आती रहेगी—और ₹14.46 लाख की रसीद उस बदबू पर इत्र नहीं छिड़क सकती। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस मामले की दस्तावेजी परतें खोलता रहेगा। अगली कड़ी में सवाल केवल नक्शे से नहीं—उन हस्ताक्षरों से होंगे जिन्होंने “Limit Exceed” को “Approved” बनाया।
—संपादक
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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