DMFT के करोड़ों की फाइलें खुलीं… अब कोरबा में होगा सबसे बड़ा खुलासा?

CAG की रिपोर्ट, आयुक्त तक पहुंची फाइलें और 128 निर्माण कार्य… क्या खनिज न्यास मद की अब शुरू होगी सबसे बड़ी जांच?
कोरबा में DMFT-PWD के कार्यों पर बढ़ी हलचल, तकनीकी, वित्तीय और भौतिक सत्यापन की मांग तेज
विशेष खोजी रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा/बिलासपुर/रायपुर/नई दिल्ली। क्या कोरबा जिले में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) से कराए गए करोड़ों रुपये के विकास कार्य अब सबसे बड़ी जांच की ओर बढ़ रहे हैं?
उपलब्ध दस्तावेज़ों ने ऐसे कई संकेत दिए हैं, जिन्होंने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने राज्यभर में DMFT एवं PMKKKY के क्रियान्वयन पर गंभीर टिप्पणियां दर्ज की हैं, वहीं दूसरी ओर कोरबा में PWD द्वारा कराए गए DMFT कार्यों की फाइलें जांच समिति और आयुक्त स्तर तक पहुंच चुकी हैं।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आयुक्त बिलासपुर संभाग को भेजे गए पत्र में 128 निर्माण कार्यों का विवरण, उनकी कुल लागत लगभग ₹12.31 करोड़, ग्रामवार सूची तथा संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराए जाने का उल्लेख किया गया है। यह दर्शाता है कि इन कार्यों का दस्तावेज़ीय परीक्षण उच्च स्तर पर पहुंच चुका था।
अब सबसे बड़ा सवाल
यदि CAG की टिप्पणियों और उपलब्ध अभिलेखों को साथ रखकर देखा जाए तो कई महत्वपूर्ण प्रश्न स्वतः सामने आते हैं—
क्या सभी 128 कार्य वास्तव में स्थल पर पूरे हुए?
क्या भुगतान से पहले माप पुस्तिका (MB) का सही परीक्षण हुआ?
क्या गुणवत्ता परीक्षण और पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं?
क्या भुगतान वास्तविक प्रगति के अनुरूप किए गए?
क्या सभी परियोजनाएं वास्तव में खनन प्रभावित क्षेत्रों और लोगों के हित में थीं?
CAG की रिपोर्ट ने क्यों बढ़ाई चिंता?
CAG की Performance Audit Report No. 05 of 2026 में राज्य स्तर पर कई गंभीर कमियों की ओर संकेत किया गया है, जिनमें प्रभावित गांवों की पहचान, योजना निर्माण, सोशल ऑडिट, निगरानी व्यवस्था और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह मांग उठ रही है कि कोरबा के DMFT कार्यों का भी परियोजना-वार तकनीकी, वित्तीय और भौतिक सत्यापन कराया जाए।
क्या आने वाला है बड़ा खुलासा?
यदि संबंधित एजेंसियां—
प्रत्येक स्थल का भौतिक निरीक्षण,
माप पुस्तिकाओं (MB) का मिलान,
भुगतान अभिलेखों की जांच,
गुणवत्ता परीक्षण,
पूर्णता प्रमाणपत्र,
उपयोगिता प्रमाणपत्र
का समग्र परीक्षण करती हैं, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुए या कहीं अनियमितताओं की गुंजाइश है।
अब सबकी निगाहें जांच पर
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि—
क्या राज्य सरकार, DMFT प्रबंधन, लोक निर्माण विभाग और अन्य सक्षम जांच एजेंसियां इन दस्तावेज़ों तथा CAG की टिप्पणियों के आधार पर व्यापक तकनीकी, वित्तीय और भौतिक जांच का निर्णय लेंगी?
यदि ऐसा होता है, तो कोरबा जिले में DMFT निधि से कराए गए विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति पहली बार व्यवस्थित रूप से सामने आ सकती है।
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