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जनता की महापौर: 100 से अधिक लोगों के भविष्य की रक्षा के लिए खड़ी हुईं संजूदेवी राजपूत, पहले पुनर्वास, फिर कार्रवाई” – आरटीओ कार्यालय के सामने वर्षों से व्यवसाय कर रहे दुकानदारों को दिया भरोसा

25 परिवारों की रोजी-रोटी बचाने आगे आईं महापौर संजूदेवी राजपूत

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कोरबा, ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

कोरबा नगर निगम की महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जनप्रतिनिधि का पहला दायित्व जनता के हितों और उनके जीवनयापन की रक्षा करना है। आरटीओ कार्यालय के सामने पिछले 12-13 वर्षों से अपनी छोटी-छोटी दुकानें और ठेले संचालित कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे व्यवसायियों के सामने जब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ, तब महापौर स्वयं उनके पक्ष में खड़ी नजर आईं।

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निगम कार्यालय साकेत भवन पहुंचकर संबंधित दुकानदारों और ठेला संचालकों ने महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत से मुलाकात की और अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उन्हें तीन दिन के भीतर दुकानें हटाने का नोटिस दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि उन्हें तत्काल वहां से हटा दिया गया तो उनके परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।

महापौर ने सुनी गरीब परिवारों की आवाज

दुकानदारों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए महापौर श्रीमती राजपूत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में गरीब परिवारों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षों से व्यवसाय कर रहे इन दुकानदारों को यथावत रखा जाए अथवा यदि किसी कारणवश हटाना आवश्यक हो तो पहले उनके लिए वैकल्पिक स्थान और समुचित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

25 परिवारों की जिंदगी का सवाल

महापौर ने कहा कि इन दुकानों और ठेलों के माध्यम से लगभग 25 परिवारों के 100 से अधिक लोगों का जीवनयापन हो रहा है। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि विकास कार्य और प्रशासनिक व्यवस्थाएं आवश्यक हैं, लेकिन किसी गरीब की रोजी-रोटी छीनकर नहीं। प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें विकास और मानवीय संवेदनाएं दोनों साथ चलें।

जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता

महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने संबंधित व्यवसायियों को आश्वस्त किया कि नगर निगम उनके साथ न्याय करेगा और उनकी आजीविका की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उनके इस मानवीय और जनहितैषी निर्णय की व्यापारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने सराहना की है।

जनता की महापौर के रूप में उभर रही पहचान

पिछले कुछ समय से महापौर संजूदेवी राजपूत लगातार ऐसे मामलों में सक्रिय भूमिका निभाती नजर आ रही हैं जहां आम नागरिकों, गरीब परिवारों और छोटे व्यवसायियों के हित प्रभावित होते हैं। आरटीओ कार्यालय के सामने संचालित दुकानों और ठेलों के मामले में उनका हस्तक्षेप यह संदेश देता है कि नगर निगम केवल प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि आम जनता की समस्याओं के समाधान का माध्यम भी है।

“पहले पुनर्वास, फिर विस्थापन” की सोच के साथ महापौर का यह कदम कोरबा के छोटे व्यवसायियों और श्रमिक परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है।

इस अवसर पर वार्ड 26 के पार्षद/अधिवक्ता अब्दुल रहमान सहित संबंधित व्यवसायी उपस्थित रहे।

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