EXCLUSIVE : एशिया की सबसे बड़ी खदान में “डीजल माफिया” का आतंक! हजारों लीटर डीजल की कथित चोरी, माफियाओं के आगे बेबस प्रशासन?

देश जहां एक तरफ पेट्रोल-डीजल संकट, महंगाई और ऊर्जा बचाने की चुनौती से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक में खुलेआम डीजल चोरी का कथित काला खेल धड़ल्ले से जारी है।
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल खदान के अंदर ही संचालित होने के आरोप लग रहे हैं और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
सूत्रों की मानें तो रोजाना हजारों की संख्या में ट्रेलर और भारी वाहन कोयला लोडिंग के लिए खदान क्षेत्र में प्रवेश करते हैं। इसी अफरा-तफरी और भारी मूवमेंट का फायदा उठाकर संगठित डीजल चोर गिरोह सरकारी संसाधनों पर हाथ साफ कर रहे हैं। आरोप है कि लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपए का डीजल लंबे समय से गायब किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गिरोह का इतना आतंक है कि कई अधिकारी भी कार्रवाई करने से बचते हैं। बताया जाता है कि नवीन कश्यप पर कोरबा समेत आसपास के जिलों में गंभीर अपराध दर्ज हैं, जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उसका नेटवर्क आज भी बेखौफ सक्रिय है।
चर्चा तो यहां तक है कि इस पूरे नेटवर्क के तार बिलासपुर के बड़े डीजल माफियाओं से जुड़े हुए हैं, जिनकी पकड़ जिला प्रशासन से लेकर राजधानी तक बताई जाती है। यही कारण है कि इतने बड़े स्तर पर कथित चोरी होने के बावजूद कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल से इस खदान क्षेत्र में कुछ माफियाओं की “तूती” बोलती रही है और सत्ता बदलने के बाद भी हालात में ज्यादा फर्क नहीं आया। सवाल अब सीधे कोल इंडिया लिमिटेड, SECL प्रबंधन, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर उठ रहे हैं।
क्या प्रशासन पूरी तरह नाकाम हो चुका है या फिर इस पूरे खेल को किसी बड़े संरक्षण का कवच मिला हुआ है?
सबसे बड़ा सवाल —
क्या सरकारी डीजल पर डाका डालने वालों के खिलाफ कभी बड़ी कार्रवाई होगी, या फिर राष्ट्रीय संपत्ति ऐसे ही माफियाओं के हवाले होती रहेगी?
आखिर कब टूटेगा “डीजल माफिया” का साम्राज्य?
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