17/04/2026

CG HIGH COURT : सहायक अनुसंधान अधिकारी के डिमोशन आदेश पर हाईकोर्ट की सख़्त रोक, बिना नोटिस पदावनति को बताया प्रथम दृष्टया मनमाना, राज्य सरकार से जवाब तलब

0
0p3mp1cg_-chhattisgarh-high-court-_625x300_28_November_24

बिलासपुर, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग, रायपुर में सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदस्थ
मीनाक्षी भगत को सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर डिमोशन किए जाने के शासनादेश पर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। माननीय न्यायालय ने इस मामले में
राज्य शासन सहित सभी उत्तरवादीगणों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

मामला छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी उस आदेश से जुड़ा है,
जिसके तहत मीनाक्षी भगत को बिना किसी पूर्व सूचना अथवा सुनवाई का अवसर दिए
सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद से हटाकर सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर पदावनत कर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस कार्रवाई को
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना है।

2008 में नियुक्ति, 2022 में हुई थी पदोन्नति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मीनाक्षी भगत की नियुक्ति वर्ष 2008 में
सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर हुई थी। विभाग द्वारा जारी वरिष्ठता सूची में
उनका नाम वरीयता क्रम में प्रथम होने के कारण
विभागीय पदोन्नति समिति ने उन्हें पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया था।

इसके आधार पर आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा
दिसंबर 2022 में मीनाक्षी भगत को
सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया था,
और वे तब से लगातार इसी पद पर कार्यरत थीं।

अन्य कर्मचारियों ने पदोन्नति को दी थी चुनौती

मीनाक्षी भगत की पदोन्नति के खिलाफ विभाग के कुछ अन्य अनुसंधान सहायकों द्वारा
माननीय न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। इसके साथ ही विभाग के समक्ष
सामूहिक अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया गया था।

विभाग द्वारा अभ्यावेदन के परीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि
वर्ष 2016 एवं 2020 में सहायक अनुसंधान अधिकारी,
सहायक नियोजन अधिकारी एवं सहायक सांख्यिकी अधिकारी पदों के लिए
संयुक्त संवर्ग सूची तैयार की गई थी।

DPC की पुनरीक्षित बैठक के बाद डिमोशन आदेश

विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक दिनांक 28 दिसंबर 2022 के क्रम में
पुनरीक्षित बैठक 11 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई।
इस बैठक में यह कहते हुए कि संबंधित संवर्ग में पद रिक्त नहीं है,
मीनाक्षी भगत के नाम पर पदोन्नति की अनुशंसा नहीं की गई।

इसके बाद राज्य शासन द्वारा विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के आधार पर
31 दिसंबर 2025 को मीनाक्षी भगत को
सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद से हटाकर
सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर पदावनत करने का आदेश जारी कर दिया गया।

हाईकोर्ट में दी गई चुनौती

इस आदेश से क्षुब्ध होकर मीनाक्षी भगत ने अपने अधिवक्ता
मतीन सिद्दीकी एवं नरेंद्र मेहेर के माध्यम से
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति पी.पी. साहू के समक्ष हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क रखा गया कि दिसंबर 2022 से लेकर अब तक
मीनाक्षी भगत लगातार सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर कार्य कर रही थीं और
ऐसे में बिना कारण बताओ नोटिस एवं
सुनवाई का अवसर दिए डिमोशन किया जाना कानूनन अस्वीकार्य है।

हाईकोर्ट से अंतरिम राहत

सभी पक्षों को सुनने के बाद माननीय हाईकोर्ट ने
आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा जारी
31 दिसंबर 2025 के डिमोशन आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
साथ ही उत्तरवादीगणों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट के इस आदेश को प्रशासनिक मनमानी के मामलों में
एक महत्वपूर्ण नज़ीर के रूप में देखा जा रहा है।

 
HOTEL STAYORRA नीचे वीडियो देखें
Gram Yatra News Video

Live Cricket Info

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed Latest News