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मोर गांव मोर पानी महाभियान से कांकेर में जल संरक्षण को मिला बढ़ावा

कांकेर (ग्रामयात्रा छत्तीसगढ़ )। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिले में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाभियान के तहत जल संरक्षण और भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा ऋतु में जल संचयन कर जिले को जल संकट से स्थायी रूप से निजात दिलाना है, साथ ही मनरेगा योजना के तहत जल संवर्धन के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण तेज गति से जारी है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने बताया कि जिले में जल संरक्षण और भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए मोर गांव मोर पानी महाभियान के तहत जिले के ग्राम पंचायतों में पहाड़ी ढलानों पर कुल 3620 से अधिक संरचनाएं बनाई जा चुकी  हैं। इस वर्ष 1666 से अधिक जल संरक्षण कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है,। 

इनमें तालाब निर्माण, निजी कृषि तालाब, सोखता गड्ढे, लूज बोल्डर चेक डेम, गैबियन स्ट्रक्चर, अर्दन डैम, चेक डैम, कंटूर ट्रेच, सोक पिट, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज, परकोलेशन टैंक जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल है। इन संरचनाओं का मुख्य उद्देश्य बरसात के मौसम में नालों के माध्यम से बहकर व्यर्थ जाने वाले पानी को रोकना और उसे धरती में समाहित कर भू-जल स्तर को बढ़ाना है। 

उन्होंने बताया कि इन कार्यों की योजना बनाने और कार्यान्वयन में आधुनिक जीआईएस तकनीक (जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम) का उपयोग किया जा रहा है। इसकी मदद से रिज टू वैली (पहाड़ी से घाटी तक) सिद्धांत पर आधारित स्ट्रक्चर्स की प्लानिंग की गई है ताकि बारिश का पानी व्यवस्थित तरीके से संरचनाओं में एकत्र हो और अधिकतम जल संचयन हो सके। पूर्व में इन क्षेत्रों में वर्षा जल के बहाव से बड़े पैमाने पर मिट्टी कटाव की समस्या उत्पन्न होती थी।

अब इन संरचनाओं के निर्माण से न केवल जल संरक्षण होगा, बल्कि मिट्टी कटाव की समस्या पर भी स्थायी समाधान मिलेगा। नालों का बहाव धीमा होगा और पानी धीरे-धीरे भूमि में रिसकर भू-जल भंडार को समृद्ध करेगा। ये प्रयास जिले में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थानीय समुदायों की आजीविका को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

 

 
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