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कृषि और ग्रामीण विकास के बिना विकसित राष्ट्र संभव नहीं: धनखड़

नई दिल्ली (ग्रामयात्रा छत्तीसगढ़ )। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि ग्रामीण भारत और कृषि विकास के बिना विकसित राष्ट्र का स्वप्न पूरा करना संभव नहीं है। श्री धनखड़ ने उप राष्ट्रपति भवन में चौधरी चरण सिंह पुरस्कार 2024 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि ग्रामीण विकास की रीढ़ है। जब तक कृषि का विकास नहीं होगा, ग्रामीण परिदृश्य नहीं बदल सकता और जब तक ग्रामीण परिदृश्य नहीं बदलेगा, हम विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा नहीं रख सकते।

देश की आर्थिक प्रगति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस समय भारत पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। निस्संदेह, हमारी अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है। हम वैश्विक स्तर पर पांचवें सबसे बड़े देश हैं और जापान और जर्मनी से आगे निकलकर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं लेकिन वर्ष 2047 तक विकसित देश बनने के लिए हमारी आय में आठ गुना वृद्धि होनी चाहिए जो एक बड़ी चुनौती है।

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श्री धनखड़ ने गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि गांव की अर्थव्यवस्था तभी बेहतर हो सकती है, जब किसान और उनका परिवार विपणन, मूल्य संवर्धन और हर जगह उद्योग संकुल बनाने में शामिल हो, जिससे आत्मनिर्भरता आए। हमारे पास सबसे बड़ा कृषि उपज बाजार है, फिर भी कृषक समुदाय इससे शायद ही जुड़े हों। कृषि क्षेत्र को सरकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि यह आर्थिक विकास का इंजन बन सके।

उपराष्ट्रपति ने लोकतंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति और संवाद लोकतंत्र को परिभाषित करते हैं। एक राष्ट्र कितना लोकतांत्रिक है, यह उसके व्यक्तियों और संगठनों की अभिव्यक्ति की स्थिति से परिभाषित होता है।

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