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महामाया मंदिर में माता का विशेष श्रृंगार, माथे पर सजा 1.75 किलो का स्वर्ण मुकुट

बिलासपुर। रतनपुर स्थित प्रसिद्ध महामाया मंदिर में आज माता का विशेष श्रृंगार किया गया, जो साल में केवल तीन बार होता है। इस बार का श्रृंगार खासतौर पर चर्चा में है क्योंकि माता के सिर पर पहली बार शुद्ध सोने का नया मुकुट सजाया गया। यह मुकुट 1,759 ग्राम वजन का है और इसे बनाने में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आई है।

स्वर्ण मुकुट ने बढ़ाई श्रृंगार की भव्यता:
मंदिर समिति के अध्यक्ष आशीष सिंह ने बताया कि नया मुकुट पूरी तरह से शुद्ध सोने से निर्मित है। इससे पहले माता को जो मुकुट पहनाया जाता था, वह 25 साल पुराना था और उसका वजन लगभग 900 ग्राम था। नए मुकुट का वजन पिछले मुकुट से लगभग दोगुना है, जिससे माता का राजसी श्रृंगार और भी भव्य हो गया है।

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विशेष अवसरों पर होता है श्रृंगार:
महामाया माता का यह विशेष श्रृंगार साल में तीन प्रमुख अवसरों पर किया जाता है—दोनों नवरात्र की अष्टमी और दीपावली। इन अवसरों पर माता को विशेष आभूषण पहनाए जाते हैं, जिन्हें आम दिनों में सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है। आभूषणों को राजसी श्रृंगार से एक दिन पहले कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर में लाया जाता है।

इस बार का श्रृंगार माता के भक्तों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, और मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

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