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वन्यजीव व पर्यावरण को संरक्षित करने दे अपनी सहभागिता : वन मंत्री केदार कश्यप

जिले में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस

नारायणपुर । 29 जुलाई को पूरी दुनिया में बाघ दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाघ पूरी दुनिया से दिनों दिन गायब हो रहे हैं। ऐसे में इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को बाघ के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। अगर बाघ नहीं बचेंगे, तो इससे पूरा पारिस्थितिक तंत्र बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसका महत्व समझना जरूरी है। बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत साल 2010 में हुई थी। रूस में एक टाइगर समिट में बाघ रेंज के देशों द्वारा बाघ संरक्षण पर चर्चा की थी। उसी सम्मेलन में हर साल 29 जुलाई को इंटरनेशनल बाघ दिवस मनाने का फैसला लिया गया था। इस समिट में दुनियाभर के करीब 13 देशों ने हिस्सा लिया था। बाघ दिवस मनाने का फैसला लेते हुए इन सभी देशों ने बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा था।

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, संसदीय कार्य, कौशल विकास तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वन्य पशु पक्षियों का संरक्षण करने के लिए कार्य किया जा रहा है। देश में छत्तीसगढ़ वनों की दृष्टि से तीसरा स्थान पर है। देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में नारायणपुर जिले के विश्व प्रसिद्ध मावली मेले का जिक्र किया गया है। उन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा शुरूवात की गई एक पेड़ मां के नाम तहत् वृक्षारोपण का कार्य पूरे छत्तीसगढ़ में 04 करोड वृक्ष लगाने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री केदार ने कहा कि जिले के प्रत्येक व्यक्ति को एक पौधा लगाने के लिए प्रोत्साहित करें। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर वन मंत्री ने चेंदरू पार्क के उन्नयन एवं सौंदर्यीकरण कार्य के लिए 33.02 लाख रुपए के कार्य का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि चेंदरू पार्क के सौंदर्यीकरण से नगरवासियों को वहां घुमने एवं मनोरंजन हेतु एक उत्तम स्थान मिल पाएगा।

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उन्होंने फलदार एवं लघुवनोपज वृक्षों को संरक्षित कर लघुवनोपज का संग्रहण करने के लिए ग्रामीणों को आग्रह किया, क्योंकि लघुवनोपज वृक्ष ग्रामीणों का आय का जरिया होता है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्रहण 15 लाख मानक बोरा किया गया है, जिससे वन क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को 500 करोड़ से ज्यादा आमदनी प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि बस्तर की जंगलो से विलुप्त हो रहे वन भैंसा, पहाड़ी मैना, बाघ सहित विभिन्न जंगली जानवरों के बचाव के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर जिले टाइगर बॉय के नाम से प्रसिद्ध चेंदरू मंडावी के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए जिले के आडिटोरियम में प्रर्दशित करने के लिए जिलाधीश को निर्देशित किया। कार्यक्रम में वन मंत्री द्वारा चंदरू मण्डावी के परिजनों को श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, उन्हें भी स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।

आज अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर 29 जुलाई को वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, संसदीय कार्य, कौशल विकास तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप गढ़बेगाल पहुच कर वहां स्थित पार्क का निरीक्षण किया। यहां बच्चो के खेलने के लिए सुविधायें उपलब्ध करायी गई है। उन्होंने कहा कि टाइगर बॉय के नाम से प्रसिद्ध चेंदरू मंडावी का जन्म नारायणपुर जिले के ग्राम गढ़बेंगाल में हुआ था। उनकी दोस्ती बाघ (टेंबु) से होने के कारण चेन्दरू मण्डावी को टाइगर बॉय के नाम से जाना जाता है। चेंदरू और बाघ की दोस्ती पर बनी फिल्म ‘‘द जंगल सागा‘‘ को 1997 में ऑस्कर अवार्ड प्राप्त हुआ है। स्वीडन के फिल्म निर्देशक अरने सक्सहार्फ द्वारा बनाई गई इस फिल्म से चेंदरू मंडावी की ख्याति पूरे विश्व में फैल गई। चेंदरू स्वीडन में भी 1 वर्ष रहे। चेंदरू मंडावी अपने जीवन के अंतिम समय में अपने गांव में ही रहे, जहां 78 वर्ष की आयु में 18 सितंबर 2013 को उनका निधन हुआ।

कार्यक्रम में सर्व आदिवासी के संरक्षक रूपसाय सलाम, लघुवनोपज के समिति के अध्यक्ष मंगऊराम कावड़े, बृजमोहन देवांगन, गौतम एस गोलछा, गुलाब बघेल, नारायण मरकाम, प्रताप मण्डावी, सोनूराम कार्राम, जैकी कश्यप, सुकमन कचलाम, अन्य जनप्रतिनिधि, वन संरक्षक दिलराज प्रभाकर, कलेक्टर बिपिन मांझी, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, डीएफओ सचिकानंदन के सहित जिला स्तरीय अधिकारी कर्मचारी और ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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