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राम मंदिर प्राणप्रतिष्ठा से नगर सेठ जयसिंह अग्रवाल ने बनाई दूरी ! वजह जानकर हैरान रह जाएंगे आप…

चुनाव पूर्व सड़कों पर राम राग आलाप रहे नगर सेठ के बदले सुर, सामने आया पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह का दोहरा रंग

कोरबा। सियासी फायदे के लिए किसी भी हद तक गुजर जाने में माहिर पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का दोहरा रंग अब साफ दिखाई दे रहा है। बीते विधानसभा चुनाव के ऐन पहले शहर की सड़कें उनके बैनर-पोस्टरों से ऐसे पट गए थे, जैसे जनता को वे जताना चाह रहे हों कि उनसे बड़ा भक्त कोई है ही नहीं। पर आज जनता खुद राममय हो चली तो नगर सेठ की खुशियों को जैसे ग्रहण लग गया है। इस बदले-बदले सुर से जयसिंह का पाखंड का पता चलता है। जिनके पास जनता की भावनाओं के लिए कद्र नहीं, उनके लिए जनता का साथ भी नहीं और यही वजह रही कि इस बार के नतीजों में जनता ने अपना फैसला कर दिया। नगर सेठ को अपने दिलों से ही नहीं, बल्कि शहर से ही चलता कर दिया।

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एक पल पीछे मुड़कर देखें, तो याद आएगा कि बीते वर्ष इसी ऊर्जानगरी में बालको-कोसाबाड़ी से लेकर टीपीनगर, पावर हाउस रोड व सीतामढ़ी तक सड़कों पर पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने बैनर-पोस्टरों की बाढ़ सी आ गई थी। आलम यह था कि किसी और को बधाई संदेश देने के लिए जगह ही नहीं बची थी। इनमें उन्होंने खुद को सबसे बड़ा स्वयंभू रामभक्त साबित करने की पुरजोर कोशिश की। हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते उनकी तस्वीरें हर जगह देखी जा सकती थीं। तब उन्होंने चुनावी फायदे के लिए हिंदू कार्ड खेलने का प्रयास किया और जनता में खुद को सबसे बड़े रामभक्त के रूप में पेश किया। पर अगर उनमें सचमुच राम पर सच्ची आस्था होती, तो आज जनता के इस उत्सव में भी शरीक नजर आते। पर जिस राम के उत्सव में आज कोरबा समेत सारा विश्व सराबोर है, पूर्व मंत्री जयसिंह के पास श्रीराम की शरण में आने का वक्त ही दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल उठना लाजमी हो जाता है कि अब कहां गए तब की नवमीं राम की आड़ में सियासी रोटी सेंकने वाले नगर सेठ। पूर्व मंत्री जयसिंह के दोहरे मापदंड पर उठ रहे सवाल का यही जवाब सुनाई देता है कि कोरबा में राम मंदिर का निर्माण केवल चुनावी फायदे एवं हिन्दू वोट साधने के लिए गया था। जहां एक ओर पूरा देश 22 जनवरी को राम जन्मभूमि के प्राणप्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारी में लगा है, वहीं पूर्व विधायक नगर सेठ कही दिखाई नही पड़ रहे हैं। यह प्रमाणित करता है कि विधायक के ढोंग ने ही उन्हें नेस्तोनाबूत किया एवं भगवान श्रीरामचंद्र ने भी पाखंडी को अपनी कृपा से वंचित कर दिया।

 

अस्वीकरणीय

 ये तमाम बातें लोगो के बीच हो रही चर्चा के आधार पर लिखा गया है, ग्राम यात्रा न्यूज नेटवर्क का यह अपना मत नहीं है।

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