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छत्तीसगढ़ सरकार फिर बेच रही 1500 करोड़ का बांड

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार फिर 1500 करोड़ रुपये की प्रतिभूति (सिक्योरिटी बांड) बेचने जा रही है। महीनेभर पहले ही सरकार ने दो किश्तों में आठ सौ करोड़ का लोन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) से लिया है। इससे राज्य सरकार पर आरबीआइ का कर्ज 20 हजार करोड़ के करीब पहुंच गया है। हालांकि सरकार अभी इस वर्ष लगभग चार से साढ़े चार हजार करोड़ तक का कर्ज अभी और ले सकती है।

छत्तीसगढ़ सरकार बांड बेचकर जो 1500 करोड़ का कर्ज ले रही है, उसका भुगतान दो वर्ष में कर देगी। सरकार ने ऐसा आश्वासन आरबीआइ को दिया है।

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नवंबर में सत्ता से बाहर होने से पहले भाजपा सरकार भी लगभग तीन हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी थी। इसका उपयोग धान पर बोनस, मुफ्त में मोबाइल जैसी योजनाओं में किया गया। वहीं मई 2018 में सरकार ने बांड बेचकर 500 करोड़ का कर्ज लिया था। पिछले वर्ष जनवरी में तत्कालीन भाजपा सरकार ने दो बार 21 सौ करोड़ का कर्ज लिया था।

इस बीच नाबार्ड ने भी छत्तीसगढ़ के लिए 1300 करोड़ का कर्ज मंजूर किया है। सूत्रों के अनुसार इस राशि का उपयोग धान खरीद में की जाएगी। उल्लेखनीय है कि नई सरकार ने धान खरीदी की सीमा 85 लाख टन तक ले जाने का मन बना लिया है। पहले यह सीमा 75 लाख टन का था।

तत्कालीन भाजपा सरकार ने प्रतिभूति (बांड) बेचकर करीब 18 हजार करोड़ रुपये कर्ज ले रखा है। सरकार ने 2014 में चार बार में 2200, 2015 में छह बार में पांच हजार, 2016 में तीन बार में 1850 और 2017 में पांच बार में 7200 करोड़ रुपये लिया है।

छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा समेत 11 राज्य कर्ज लेने की कतार में खड़े हैं। इन राज्यों को कुल 12 हजार 900 करोड़ का कर्ज चाहिए। यूपी ने दो हजार, उत्तराखंड दो सौ, हरियाणा 15 सौ, पंजाब सात सौ, महाराष्ट्र को दो हजार करोड़ चाहिए।

महाराष्ट्र इस कर्ज का भुगतान 20 वर्षों में करेगा। बाकी राज्य 10 वर्ष के लिए कर्ज ले रहे हैं।

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