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बेलर मशीन के द्वारा धान के पराली को बंडल बनाने में हुई आसानी

बालोद (ग्रामयात्रा छत्तीसगढ़ )। वर्तमान में कृषि यांत्रिकीकरण के विस्तार होने से धान की ज्यादातर कटाई हार्वेस्टर द्वारा की जा रही है। हार्वेस्टर से धान कटाई करने पर धान की पराली खेत में ही पड़ी रहती है जिसे वहाँ से उठाना किसानों के लिए अतिरिक्त मेहनत का काम होता है। जिससे अगली फसल लगाने में किसानों को बहुत समय लग जाता है, परंतु अब बेलर मशीन होने से यह कार्य बहुत ही सरल हो गया है।

इस बेलर मशीन द्वारा एक दिन में 100 से 150 बंडल तक पराली बाँधा जा सकता है। ट्रैक्टर द्वारा चलित यह बेलर मशीन किसानों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही है। विकासखंड डौंडी के भर्रीटोला निवासी संतोष यादव द्वारा यह मशीन सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है जिसे देखकर किसान अति प्रसन्न है क्योंकि इसमें बहुत कम समय में खेत एकदम साफ भी हो जाता है और अगली फसल के लिए खेत की तैयारी की जा सकती है। किसानों के घर गाय, बैल आदि पशु होते है जिन्हें खिलाने के लिए वर्ष भर के लिए पराली इक्कठा करके रखना पड़ता है। जिससे रखने के लिए बहुत ज्यादा जगह लगता था परंतु बेलर मशीन से बने इस बंडल को कम जगह में आसानी से और ज्यादा मात्रा में संग्रहित करके रख सकते हैं।

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सामान्यत एक बोझा पराली में 5 से 6 किलो पैरा आता है परंतु बेलर मशीन से बने एक बंडल में 15 से 17 किलो पैरा होते है। मतलब एक बंडल में 3 बोझा पैरा इकठ्ठा हो जाता है इसलिए कम स्थान पर ज्यादा पैरा इकठ्ठा कर संग्रहित भी सकते है। इसके साथ ही खाद बना सकते है या अन्य उपयोग में ले सकते हैं। बेलर मशीन संचालक ने बताया कि अब तक वे बहुत से किसानों के धान की पराली का बंडल बनाने का काम कर चूके है। उन्होंने बताया कि 4 दिन में अब तक धान की पराली के 400 बंडल बनाए हैं और सामान्यतः एक दिन में 3 से 4 एकड़ तक के पैरा का बंडलिंग आसानी से हो जाता है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिला खनिज संस्थान न्यास निधि से जिले के सभी विकासखंडों में बेलर मशीन प्रदाय किया गया है, जिसका उपयोग करने किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।

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