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बालको के श्याम स्टील एंपोरियम के संचालक पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया जुर्माना, ग्राहक को बेच दिया खराब इंडक्शन, बिगड़ने पर बनाया और न ही बदलकर दिया

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कोरबा। बालको में संचालित बर्तन दुकान से इंडक्शन चूल्हा खरीदना एक ग्राहक को महंगा पड़ गया। पहले तो दुकानदार ने उसे खराब उपकरण थमा दिया, जो वारंटी पीरियड में ही बिगड़ गया। उसके बाद उसे ठीक कराने या दूसरा बदलने की बजाय दुकानदार ने इंकार कर दिया। विवश होकर ग्राहक को दूसरा इंडक्शन लेना पड़ा। यह मामला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण केंद्र पहुंचा, जहां दुकानदार को यह मनमानी भारी पड़ी। फोरम ने दुकानदार पर जुर्माने और फटकार के साथ साढ़े चार गुना भरपाई करने के आदेश दिए हैं।

हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी न्यू शांति नगर बालको के प्लॉट नंबर 396/6 में रहने वाले सुशील राठौर ने सिविक सेंटर बालको के शॉप नंबर 12 में संचालित श्री श्याम स्टील एंपोरियम से पिछले साल 9 अक्टूबर 2023 को 3500 रूपए में इंडक्शन चूल्हा खरीदा था। वह इंडक्शन चूल्हा वारंटी अवधि में ही खराब हो जाने के बाद भी दुकान संचालक अक्की अग्रवाल ने इस चूल्हे को न तो रिपेयर किया जा रहा था और ना ही बदले में नया चूल्हा ही प्रदान किया जा रहा था। जिसे सेवा में कमी बताते हुए श्री राठौर ने यह मामला उपभोक्ता परिवाद रूप में पेश किया। इस तरह श्री राठौर को पुराने सामान और नए उपकरण खरीदने का खर्च 3,400 समेत कुल 6,900 रूपए की आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा। साथ ही साथ उसे अधिवक्ता द्वारा नोटिस दिए जाने का खर्च 1,500 रूपए एवं उसे मानसिक एवं शारीरिक क्षति का सामना करना पड़ा। जिला उपभोक्ता आयोग ने इस शिकायत पत्र पर सुनवाई करते हुए ये पाया कि स्टील एंपोरियम के संचालक की ओर से जवाब दावा, लिखित कथन, शपथ पत्र एवं कोई अन्य दस्तावेज साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हुआ है। परिवादी सुरेंद्र कुमार राठौर द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का खण्डन नहीं होने की स्थिति में उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर अविश्वास किए जाने का कोई कारण अभिलेख में उपलब्ध नहीं है। जिस कारण परिवादी द्वारा प्रस्तुत परिवाद को स्वीकार किया गया। प्रकरण के अनुसार श्री राठौर के द्वारा पुराने विवादित इंडक्शन चुल्हे के उपयोगहीन होने से नया चुल्हा क्रय किया गया है। ऐसी स्थिति में परिवादी पुराने विवादित इंडक्शन चुल्हे की कीमत 3,500 रूपए प्राप्त करने का अधिकारी है। इस दौरान परिवादी को हुई आर्थिक एवं मानसिक क्षति से इंकार नहीं किया जा सकता। चूंकि दुकानदार द्वारा वास्तविक बिल न देकर स्टीमेट बिल दिया है एवं विक्रय किए गए वस्तु खराब हो जाने पर विकित वस्तु में दी गयी गारंटी/ वारंटी जीवित होने के उपरांत भी सामान का न तो रिपेयरिंग किया गया और न ही उक्त सामान बदलकर नया सामान दिया, जो स्पष्ट रूप से सेवा में कमी एवं व्यावसायिक कदाचरण की श्रेणी को दर्शाता है। आयोग ने कहा कि इसके लिए व्यावसायिक कदाचरण के मद में 5,000 रूपए अर्थदण्ड दुकानदार के विरूद्ध प्रतिकर के रूप में अधिरोपित किया जाना उचित प्रतीत होता है। फलस्वरूप परिवादी सुशील राठौर के पक्ष में निष्कर्ष प्रमाणित में दिया जाता है।

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श्री श्याम एंपोरियम ने खराब चूल्हा तो दिया ही, जीएसटी बिल देकर शासन को भी क्षति पहुंचाई

विरोधी पक्षकार यानी श्री श्याम स्टील एंपोरियम के प्रोपाइटर अक्की अग्रवाल ने सुशील राठौर को सामान खरीदी किए जाने के उपरांत भी उसे वास्तविक एवं सही बिल (जीएसटी बिल) प्रदान नहीं कर डुप्लीकेट बिल प्रदान किया गया है। इस प्रकार उसके द्वारा न केवल परिवादी को बल्कि शासन को भी आर्थिक क्षति पहुंचाई गयी है। दुकानदार द्वारा वास्तविक बिल न देकर डुप्लीकेट सामान देकर परिवादी के साथ किया गया छल तथा वस्तु खराब हो जाने पर माल की दी गई वारंटी व वारंटी जीवित होने के उपरांत भी सामान का न तो रिपेयरिंग किया गया और न ही उक्त सामान को बदलकर नया सामान दिया गया।

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इस तरह करनी होगी भरपाई, नहीं तो 6 प्रतिशत ब्याज भी

उपभोक्ता आयोग कोरबा ने निर्णय दिया है कि श्री श्याम स्टील एंपोरियम के संचालक अक्की अग्रवाल द्वारा परिवादी सुशील राठौर को आर्थिक एवं मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में 5,000 रूपए प्रदान करेगा। श्री राठौर को वाद व्यय के रूप में 3,000 रूपये का भुगतान भी करेगा। दुकान संचालक द्वारा किए गए व्यवसायिक कदाचरण के मद में 5,000 रूपए का प्रतिकर अधिरोपित किया जाता है जो जिला उपभोक्ता आयोग कोरबा में संधारित “जिला उपभोक्ता विधिक सहायता” के खाता में जमा किया जाएगा। साथ ही दुकान संचालक को निर्देशित किया गया है कि है भविष्य में वे अपने किसी भी उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापार, व्यवहार एवं घोर व्यवसायिक कदाचरण के कृत्य की पुनरावृत्ति नहीं करेगें। यह भी आदेशित किया गया है कि दुकान संचालक अक्की अग्रवाल द्वारा सभी आदेशित राशियों का भुगतान परिवादी सुशील राठौर को आदेश दिनांक से 30 दिन के भीतर करे। ऐसा न करने पर आदेश दिनांक से भुगतान दिनांक तक 6 प्रतिशत साधारण वार्षिक दर से ब्याज आदेशित राशि पर भुगतान करना होगा।

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