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गठिया दिवस : प्रदूषण से बढ़ा गठिया रोग का खतरा, शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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प्रदूषण कणों की वजह से गठिया रोग का खतरा बढ़ जाता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।अध्ययन के दौरान प्रदूषण की वजह से 20 फीसदी लोगों में गठिया जैसी ऑटोइम्यून बीमारी के तत्व बढ़े पाए गए।
एम्स की रुमेटॉलोजी विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. उमा कुमार ने बताया कि प्रदूषण से गठिया जैसे रोगों के संबंधों को और पुख्ता करने के लिए उन्होंने दिल्ली में पिछले 10 वर्षों से रह रहे 18 से 60 साल की उम्र के 350 स्वस्थ लोगों के ब्लड सैंपल लिए।
इनमें पता किया गया कि इन्हें गठिया जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों के तत्व बढ़ते हैं या नहीं। इसमें 20 फीसदी लोगों में पॉजिटिव एंटीबॉडी मिले जिनकी वजह से गठिया जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां होती हैं। वहीं, 76 फीसदी लोगों के सीरम में ऑक्सेडेटिव स्ट्रेस बढ़ा पाया गया।
खून में घुल जाते हैं-
पीएम 2.5 और एक माइक्रॉन जितने छोटे आकार के कण सांस लेते वक्त शरीर के अंदर जाकर खून में घुल जाते हैं। शरीर का प्रतिरोधी तंत्र इन्हें बाहरी कण समझकर इनसे लड़ने के लिए एंटीबॉडी पैदा करने लगता है। ये एंटीबॉडी घुटनों या दूसरे जोड़ों की कोशिकाओं पर भी हमला करने लगते हैं।
एक अध्ययन में यह साबित हो चुका है कि जब प्रदूषण के स्तर में इजाफा होता है तो गठिया पीड़ित लोगों में इसके लक्षण बढ़ने लगते हैं। इससे जोड़ों में दर्द, जकड़न और सूजन की परेशानी हो सकती है।

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