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कुपोषित बच्चों की देखभाल के लिए दान कर दी जमीन

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में रहने वाली आदिवासी महिला शिवकुमारी ने कुपोषित बच्चों की देखभाल के लिए अपनी जमीन दान कर दी है। यह जमीन अब कुपोषण के शिकार आदिवासी बच्चों के लिए आश्रय स्थल बन गई है।
बच्चों को यहां रखकर पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। आदिवासी परिवार सुबह अपने छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर रोजी रोटी की तलाश में निकल जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर उनके मन में चिंता बनी रहती है। इसके अलावा समय पर भोजन न मिलने से बच्चे कुपोषण के शिकार भी हो रहे हैं।
बिलासपुर स्थित ग्राम करही कछार निवासी शिव कुमारी से यह सब देखा नहीं गया। उन्होंने बच्चों की खातिर सरपंच से अपनी 20 डिसमिल जमीन देने की बात कही। जमीन दान करने के लिए उन्होंने शर्त रखी कि इस पर बच्चों के लिए फुलवारी केंद्र बनाया जाए और कुपोषित बच्चों को रखकर देखभाल की जाए। सरपंच ने यह बात अफसरों को बताई।
अफसरों ने बिलासपुर जिले के तत्कालीन कलेक्टर पी. दयानंद तक यह बात पहुंचाई। यह सुनकर कलेक्टर भी अचरज में पड़ गए। कलेक्टर ने उनके प्रस्ताव पर हामी भर दी। बस फिर क्या था, शिव कुमारी ने अपनी जमीन दान में दे दी। इस जमीन पर कलेक्टर के निर्देश पर फुलवारी केंद्र बनकर तैयार हो गया।
केंद्र में वनवासी बच्चों को रखा जा रहा है। इस केंद्र में ग्रामीणों को काम पर जाते वक्त बच्चों को छोड़ने की सुविधा दी जा रही है। देखभाल के लिए गांव की लड़कियों को रखा गया है। यहां बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अफसर इस केंद्र पर खास नजर रखे हुए हैं। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौने भी रखे गए हैं। शिव कुमारी के पास तीन एकड़ जमीन है। इस पर वह खेती करती हैं।
इसमें से ही उन्होंने 20 डिसमिल जमीन बच्चों की बेहतरी के लिए दान में दे दी है। आदिवासी महिला के मन में कुपोषित बच्चों के प्रति संवेदना व सेवाभाव को देखकर कलेक्टर भी बेहद प्रभावित हुए थे। उन्होंने शिव कुमारी को सम्मानित भी किया था।

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