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ईंधन संकट के बीच छत्तीसगढ़ में ‘वर्क फ्रॉम होम’ की मांग तेज

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रायपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और अनावश्यक आवागमन कम करने की अपील का असर अब राज्यों में दिखाई देने लगा है। कई राज्यों में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने का फैसला लिया है। छत्तीसगढ़ में भी कई मंत्रियों ने अपने सरकारी काफिलों को सीमित करने की पहल की है।

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इसी बीच छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सरकारी कर्मचारियों के लिए “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने की मांग की है। फेडरेशन ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और पेट्रोल-डीजल की संभावित कमी व बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कहा है कि ऊर्जा संरक्षण अब समय की जरूरत बन चुका है।

फेडरेशन ने अपने पत्र में लिखा है कि केंद्र सरकार की ऊर्जा बचत संबंधी अपील राष्ट्रहित में है और छत्तीसगढ़ में भी इसे गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि राज्य में ई-ऑफिस और पेपरलेस कार्यप्रणाली पहले से लागू है, जिससे अधिकांश प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन संचालित किए जा सकते हैं। ऐसे में मंत्रालय और अन्य शासकीय कार्यालयों में आवश्यकतानुसार वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करना व्यवहारिक कदम होगा।

फेडरेशन का कहना है कि नया रायपुर स्थित मंत्रालय और सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी निजी और सरकारी वाहनों से आवागमन करते हैं। यदि सप्ताह में कुछ दिन घर से काम की व्यवस्था लागू की जाती है, तो बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत के साथ ट्रैफिक दबाव और प्रदूषण भी कम किया जा सकता है।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही रेखा गुप्ता सरकार ने दिल्ली में सरकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया है। इसके बाद अब छत्तीसगढ़ में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

 

 

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