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बिलासपुर में EOW–ACB की दस्तक… दीपका–गेवरा में ‘एलाउ’ के नाम पर कथित वसूली का हिसाब कब?

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साजिद खान का नाम चर्चा में; खुर्शीद और संतोष सिन्हा पर पूर्व में उठे सवाल फिर सामने—₹50 प्रति टन ‘एलाउ’ और अच्छे कोयले के लिए ₹150–₹450 के आरोपों की जांच हो

 

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कोरबा–बिलासपुर | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क  कोयले की कीमत बिल में दर्ज होती है। लेकिन उसके उठाव या बेहतर गुणवत्ता के लिए यदि अलग रकम मांगी जाए, तो वह पैसा किस खाते में जाता है? अनुमति, लोडिंग, तौल और निकासी की निगरानी के बीच ऐसी कथित व्यवस्था कैसे चल सकती है?    बिलासपुर में EOW–ACB की तलाशी के बाद दीपका–गेवरा से उठ रहे इन सवालों को भी दस्तावेजी जवाब चाहिए।    30 अक्टूबर को ईओडब्ल्यू ने कथित शराब, कोल लेवी और मेडिकल घोटालों के तीन अलग मामलों में छह जिलों के 16 स्थानों पर तलाशी ली। इनमें कोल लेवी प्रकरण से जुड़े कोरबा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के छह स्थान शामिल थे।

बिलासपुर के अलका एवेन्यू स्थित कारोबारी के आवास पर हुई कार्रवाई को लेकर साजिद खान का नाम उपलब्ध कराई गई जानकारी में प्रमुखता से सामने रखा गया है। प्रकाशित समाचारों में संबंधित कारोबारी का नाम शाहबाज खान बताया गया है। दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है। रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी की विज्ञप्ति में संबंधित व्यक्ति का नाम और उससे प्राप्त सामग्री का अलग विवरण नहीं दिया गया था।    तलाशी में किसकी क्या भूमिका सामने आती है, यह जांच तय करेगी। लेकिन कोयलांचल की वर्तमान शिकायतों का परीक्षण भी अपनी जगह जरूरी है।

₹50 का ‘एलाउ’, ₹450 तक अच्छे कोयले का कथित सौदा—आरोपों की तह तक कौन जाएगा?

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के समक्ष रखे गए आरोपों में दीपका–गेवरा क्षेत्र में ‘एलाउ’ के नाम पर ₹50 प्रति टन तक कथित वसूली की बात कही गई है। अच्छे कोयले की उपलब्धता और गुणवत्ता में कथित हेरफेर के लिए ₹150 से ₹450 प्रति टन तक अतिरिक्त रकम मांगे जाने का आरोप भी है।   हर महीने करोड़ों रुपये की अवैध वसूली का दावा किया गया है। इन दरों, भुगतान, कुल रकम और लाभार्थियों की स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि अभी बाकी है। इसीलिए शिकायतों की जांच जरूरी है—ताकि आरोप और वास्तविकता के बीच का अंतर सामने आए।    यदि किसी खरीदार या परिवहनकर्ता से अतिरिक्त रकम मांगी गई, तो उसके बयान और भुगतान के प्रमाण लिए जाएं। यदि किसी को भुगतान के बदले प्राथमिकता या बेहतर कोयला मिला, तो संबंधित लोडिंग एवं गुणवत्ता रिकॉर्ड से उसका मिलान हो।

खुर्शीद और संतोष सिन्हा के नाम पर उठे सवालों का उत्तर कहां है?

 

ग्राम यात्रा की पूर्व रिपोर्टों में एन. खुर्शीद और संतोष सिन्हा के नाम शिकायतों के संदर्भ में प्रमुखता से उठाए गए थे।  मारुति शंकर और संतोष राठौर के संबंध में भी सवाल रखे गए थे।   इन नामों का समाचार या शिकायत में होना दोष सिद्ध होना नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति के संबंध में विशिष्ट आरोप, उसकी जिम्मेदारी और उपलब्ध साक्ष्य अलग-अलग जांचे जाने चाहिए। संबंधित पक्षों को अपना उत्तर रखने का अवसर भी मिले।   जवाबदेही तय करनी है तो यह स्पष्ट हो—कौन अनुमति देता था, कौन लोडिंग देखता था, किसके पास शिकायत पहुंची और उसने क्या किया?     पूर्व रिपोर्टों में पार्थ मुखर्जी तथा गेवरा–दीपका के GM/CGM और एसईसीएल के CMD स्तर से भी निगरानी और कार्रवाई के सवाल उठाए गए थे। उच्च अधिकारियों की कथित भूमिका का आरोप जांच का विषय है; किसी की व्यक्तिगत संलिप्तता अभी प्रमाणित नहीं है।   लेकिन प्रबंधन यह बता सकता है कि शिकायतों की जांच किस अधिकारी को दी गई, किन अभिलेखों का परीक्षण हुआ और निष्कर्ष क्या निकला।

सिर्फ “सब नियमानुसार है” कहने से सवाल समाप्त नहीं होंगे। नियमों का पालन हुआ है तो रिकॉर्ड उसका प्रमाण देगा।

 

बिलासपुर की तलाशी और दीपका–गेवरा के वर्तमान आरोपों के बीच प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों को एक सिद्ध नेटवर्क बताना जल्दबाजी होगी। मांग यह है कि वर्तमान आरोपों का भी स्वतंत्र परीक्षण हो।   DO, उठाव अनुमति, लोडिंग रजिस्टर, तौल कांटे का मूल डेटा, RFID/GPS, गेट एंट्री, गुणवत्ता रिपोर्ट और CCTV सुरक्षित रखे जाएं। इन्हें उपलब्ध भुगतान साक्ष्यों और शिकायतकर्ताओं के बयानों से मिलाया जाए।

कोयला सरकारी संपदा है। उसके उठाव का रास्ता किसी कथित निजी वसूली से होकर नहीं गुजरना चाहिए।   

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की मांग है कि एजेंसियां एवं एसईसीएल प्रबंधन शिकायतों पर समयबद्ध, निष्पक्ष जांच कराएं। आरोप सही निकलें तो जिम्मेदारी और कार्रवाई तय हो; गलत निकलें तो जांच का आधार सार्वजनिक किया जाए।  अब सवाल दरों की चर्चा से आगे है—पैसा किसने मांगा, किसने लिया और उसके बदले क्या दिया? जवाब रिकॉर्ड से आना चाहिए।  संबंधित व्यक्तियों और प्रबंधन का दस्तावेजी पक्ष प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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